विज्ञापन

गरबा में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने की विहिप की मांग का केंद्रीय मंत्री ने किया विरोध, अमृता फडणवीस भी साथ

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले से पहले महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी भी इस रुख का विरोध कर चुकी हैं.

गरबा में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने की विहिप की मांग का केंद्रीय मंत्री ने किया विरोध, अमृता फडणवीस भी साथ
  • केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने गरबा आयोजनों में मुसलमानों के शामिल होने पर रोक लगाने की मांग का विरोध किया है
  • आठवले ने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार और त्योहारों में भागीदारी का अधिकार देता है
  • उन्होंने अजमेर दरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू बड़ी संख्या में जाते हैं और यह सहिष्णुता का प्रतीक है
मुंबई/रायपुर:

गरबा के आयोजनों में मुसलमानों के शामिल होने पर रोक लगाने की विश्व हिंदू परिषद की मांग का केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने विरोध किया है. उनका कहना है कि भारत संविधान से चलता है, जो सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है. छत्तीसगढ़ के एक दिन के दौरे पर पहुंचे आठवले ने पत्रकारों से कहा कि ऐसा रुख सही नहीं है क्योंकि अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होने का अधिकार है. महाराष्ट्र में विहिप के नेताओं द्वारा यह कहे जाने पर कि जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, उन्हें ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों से दूर रहना चाहिए. आठवले ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह रुख सही नहीं है.'

उन्होंने कहा, ‘बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान सभी धर्मों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है. भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, लिंगायत, पारसी और कई अन्य धर्मों के लोग रहते हैं तथा संविधान सभी धर्मों की रक्षा करता है.' उन्होंने कहा, ‘यह कहना ठीक नहीं है कि मुसलमानों को गरबा में शामिल नहीं होना चाहिए. हिंदू और मुस्लिम समुदायों को एक साथ आकर देश के लिए काम करने की ज़रूरत है.' आठवले रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने राजस्थान में अजमेर शरीफ दरगाह का उदाहरण दिया और कहा कि बड़ी संख्या में हिंदू वहां जाते हैं.

आठवले से पहले महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी भी इस रुख का विरोध कर चुकी हैं. अमृता का कहना है कि किसी मुस्लिम व्यक्ति के उत्सव में शामिल होने में कोई बुराई नहीं है. अमृता के इस बयान का संजय राउत ने समर्थन किया और तंज भी कस दिया. राउत ने कहा कि मैं अमृता फडणवीस के इस रुख का स्वागत करता हूं कि मुस्लिम महिलाओं को गरबा में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में शामिल नव-हिंदुत्ववादियों और खुद सीएम को भी ऐसी सलाह देनी चाहिए. उनका साफ इशारा नितेश राणे की ओर था, जिन्होंने विहिप की मांग को सही बताया था. उनका कहना था कि गरबा में मुसलमानों की एंट्री से लव जिहाद के मामले बढ़ते हैं. 

वहीं आठवले ने गरबा के अलावा आरक्षण के मसले पर भी खुलकर बात की. आठवले ने कहा, ‘हमारा देश ऐसा है जहां सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होना चाहिए. हम ऐसे रुख का विरोध करते हैं। ऐसा रुख संविधान के खिलाफ है.' उनसे जातिगत आरक्षण को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर आठवले ने कहा कि यह नीति कमजोर वर्गों को अवसर देकर देश को मजबूत करने के लिए शुरू की गई थी. उन्होंने कहा, ‘जब जातिवाद खत्म हो जाएगा, तो हम आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं.' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण तब दिया गया था, जब 1950 में संविधान लागू हुआ था, जबकि अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण 1990-91 में वीपी सिंह सरकार के दौरान शुरू किया गया था.

उन्होंने कहा कि बाद में नरेंद्र मोदी सरकार ने एससी, एसटी या ओबीसी श्रेणी में न आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण शुरू किया. आठवले ने कहा, ‘आरक्षण जाति पर आधारित है। हालांकि संविधान ने अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत को खत्म कर दिया है, फिर भी दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार होते हैं. जब तक जातिवाद खत्म नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए.' उन्होंने कहा, ‘अगर आप जातिवाद को खत्म कर सकते हैं, तो हम आरक्षण छोड़ने को तैयार हैं। लेकिन आरक्षण का विरोध करना सही नहीं है. यह संविधान के खिलाफ है.' आठवले ने कहा कि जो लोग आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. उन्हें बातचीत करनी चाहिए और अपनी मांगें रखनी चाहिए.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Ramdas Athawale, Ramdas Athawale News, Ramdas Athawale NEWS IN HINDI, India News, Maharashtra News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com