विज्ञापन

निकाय चुनाव : बीकानेर में कांग्रेस के काम नहीं आ रहा बहुमत तो खेतड़ी में बागी बने आफत

निकाय चुनाव में कांग्रेस का बना बनाया बिगड़ा खेल, कहीं बहुमत होने पर भी पेंच फंसा, कहीं अपने ही बागी बने चुनौती, चुनावी मैनेजमेंट में भाजपा कांग्रेस पर भारी

राजस्थान मेयर उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस में बगावत
NDTV

राजस्थान के निकाय चुनाव में पार्षदों के नतीजे आने के बाद अब सियासत का दूसरा दौर शुरू हो गया है. यह दौर मेयर और पालिकाध्यक्ष चुनने का है. लेकिन इस खेल के सियासी मैनेजमेंट में भाजपा कांग्रेस पर भारी नजर आ रही है. कांग्रेस बहुमत में होने के बावजूद कहीं बगावत झेल रही है तो कहीं सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी बोर्ड बनाने में जूझ रही है.

बीकानेर में बहुमत, फिर भी कांग्रेस में बगावत

बीकानेर में कांग्रेस के पास सबसे मजबूत स्थिति है. 80 वार्ड वाले नगर निगम में पार्टी ने 42 सीटें जीती हैं. बहुमत का आंकड़ा 41 है. यानी कांग्रेस के पास बहुमत से एक सीट ज्यादा है. भाजपा के 27, निर्दलीयों के 10 और आरएलपी के एक पार्षद ने जीत दर्ज की है. ऐसे में कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे और वार्ड-73 के पार्षद अनिल कल्ला को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया. लेकिन यहीं से पार्टी की मुश्किल शुरू हो गई. 

वार्ड-50 के कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा ने पार्टी के फैसले के खिलाफ निर्दलीय नामांकन भर दिया. डागा ने कल्ला परिवार को बार-बार टिकट मिलने पर सवाल उठाया है. कांग्रेस के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 42 का आंकड़ा बहुमत तो देता है लेकिन बागी उम्मीदवार के मैदान में उतरने के बाद हर पार्षद की भूमिका अहम हो जाती है. भाजपा ने भी बहुमत नहीं होने के बावजूद वार्ड-13 के पार्षद सुरेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया है. यानी बीकानेर में भाजपा को बहुमत जुटाने के लिए कांग्रेस की बगावत का लाभ मिल सकता है.

खेतड़ी में कांग्रेस का पार्षद ही भाजपा के साथ चला गया

झुंझुनूं की खेतड़ी नगरपालिका में भी कांग्रेस को झटका लगा. यहां 25 वार्डों में भाजपा के 8, कांग्रेस के 4 और निर्दलीयों के 13 पार्षद जीते. कांग्रेस से पार्षद बनीं गीता सैनी भाजपा में शामिल हो गईं और पालिकाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भर दिया. उनके सामने दूसरा नामांकन नहीं आया और उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया. यहां भाजपा के पास बहुमत नहीं था. लेकिन कांग्रेस के एक पार्षद के पाला बदलने से उसके पास अध्यक्ष पद पहुंच गया.

दूसरी तरफ कुछ निकायों में भाजपा ने बिना मुकाबले ही अध्यक्ष पद की स्थिति मजबूत कर ली है. महवा नगरपालिका के 35 वार्डों में भाजपा के 17, कांग्रेस के 4 और निर्दलीयों के 14 पार्षद हैं. यहां भाजपा के विनीत बंसल के सामने कोई दूसरा नामांकन नहीं आया. बसेड़ी नगरपालिका में 25 वार्ड हैं. यहां भाजपा और कांग्रेस के 8-8 और निर्दलीयों के 9 पार्षद हैं. इसके बावजूद भाजपा के राघवेंद्र जाटव के खिलाफ कोई दूसरा नामांकन नहीं आया और उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया. 

गोविंदगढ़-रामबास नगरपालिका के 25 वार्डों में भाजपा के 12, कांग्रेस के 2 और निर्दलीयों के 11 पार्षद हैं. कांग्रेस का सिंबल पहुंचने के बावजूद प्रत्याशी और प्रस्तावक समय पर नहीं पहुंच सके. ऐसे में भाजपा की मधु गुप्ता का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया. बालोतरा की धोरीमन्ना नगरपालिका में 20 वार्ड हैं. यहां भाजपा ने 14, कांग्रेस ने 3 और निर्दलीयों ने 3 वार्ड जीते हैं. भाजपा की कीर्ति गोसाईवाल के सामने भी कोई दूसरा नामांकन नहीं आया.

ये सियासी घटनाएं सिर्फ चुनावी समीकरण नहीं हैं बल्कि कांग्रेस के चुनाव बाद मैनेजमेंट के पर भी सवाल खड़े करती हैं. नतीजों के बाद पार्टी अपने जीते हुए पार्षदों को एकजुट क्यों नहीं रख पा रही है. जहां संख्या उसके पक्ष में है वहां बगावत सामने आ रही है और जहां बहुमत नहीं है, वहां निर्दलीयों को साथ लाना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में मेयर और पालिकाध्यक्ष के चुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ बोर्ड बनाने की कवायद नहीं बल्कि अपने संगठन और पार्षदों के मैनेजमेंट की परीक्षा भी बन गए हैं.

यह भी पढ़ें: राजस्थान निकाय चुनाव री-पोलिंग के नतीजे: जयपुर की चारों सीटों पर कांग्रेस जीती; कोटा, जोधपुर का जानिए रिजल्ट

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nikay Chunav, Nikay Chunav 2026, Congress, Congress Government, Rajasthan Nagar Nigam Chunav
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com