राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है. भाजपा के इस प्रदर्शन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी भूमिका रही है. उनकी अगुवाई और मार्गदर्शन में ही भाजपा ने यह चुनाव लड़ा. भाजपा के इस प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम बड़े नेताओं ने उनकी तारीफ की.
मुख्यमंत्री शर्मा ने निकाय चुनाव में टिकट वितरण में पार्टी और संगठन को मार्गदर्शन दिया. उन्होंने चुनाव का मोर्चा खुद संभाला और बड़े नेताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी और प्रतिदिन फीडबैक लिया. मुख्यमंत्री ने चुनावी मैदान में उतरकर 10 नगर निगमों में रोड शो किए. निकाय चुनाव के परिणामों के बाद सभी पार्षदों को एकजुट रखा और निर्दलीयों को साधा.
उनकी इस रणनीति से कांग्रेस की जीत के दावे और उनकी पिक्चर फ्लॉप शो साबित हुई. सीएम अगुवाई में भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा ने अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की और भरतपुर नगर निगम में भी निर्विरोध कमल खिलाया. जयपुर में लगातार सातवीं बार नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है.
राजस्थान में इस बार एक साथ सभी 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद सहित 252 नगर पालिकाओं में चुनाव एक साथ हुए हैं. इन निकायों में दमदार जीत सरकार के ढाई साल के काम पर जनता की मोहर है. इससे पहले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए चुनाव में पिछले साल 7 में से 5 उपचुनाव में भाजपा जीती थी.
11 के मुकाबले 33
जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में मुख्यमंत्री के रोड शो ने राजधानी की जीत में अहम भूमिका निभाई. परकोटे से ही भाजपा के मेयर पद के प्रत्याशी सुनील कोठारी जीते हैं. मुख्यमंत्री ने रोड शो में परकोटे के लोगों को स्पष्ट संदेश दिया.
उन्होंने लव जिहाद, धर्मांतरण कानून, डिस्टर्ब एरिया बिल, यूसीसी की चर्चा के साथ महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला.
इस बार 33 निकायों में निर्विरोध चुनाव हुआ है. जबकि, 2018 से 2023 के दौरान कांग्रेस सरकार में 11 निकायों में निर्विरोध चुनाव हुआ था. इस बार 33 निकायों में से 30 पर भाजपा और 1 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार की निर्विरोध जीत हुई है. जबकि दो निकायों में कांग्रेस निर्विरोध जीती.
विपक्ष की रणनीति को किया फेल
कांग्रेस ने जातिगत समीकरण और होटल पॉलिटिक्स की रणनीति अपनाई, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोशल इंजीनियरिंग और वन स्टेट-वन इलेक्शन की रणनीति के आगे विपक्ष की हर चाल फेल हो गई. कांग्रेस को पार्षदों को होटलों में बंद करना पड़ा, फिर भी पार्षद भागते रहे, जबकि भाजपा ने पहले ही 33 बोर्ड निर्विरोध बनाकर बढ़त ले ली.
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