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अमेरिका में सिखों पर बयान देकर फंसे राहुल गांधी, MP-MLA कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट

वाराणसी के स्पेशल जज (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेन्द्र विक्रम सिंह ने नागेश्वर मिश्रा द्वारा दायर निगरानी याचिका को 21 जुलाई को स्वीकार कर लिया था. राहुल गांधी ने इसी आदेश को चुनौती दी है.

अमेरिका में सिखों पर बयान देकर फंसे राहुल गांधी, MP-MLA कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट
  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले साल अमेरिका दौरे में सिखों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
  • इस बयान पर एमपी एमएलए कोर्ट के स्पेशल जज ने निगरानी याचिका को 21 जुलाई को स्वीकार कर लिया था.
  • अब राहुल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल कर इस आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई है.
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल की तरफ से अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए उनके बयान पर निगरानी याचिका स्वीकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. उनकी क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर जस्टिस समीर जैन की बेंच 1 सितंबर को सुनवाई करेगी.

वाराणसी के स्पेशल जज (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेन्द्र विक्रम सिंह ने निगरानीकर्ता नागेश्वर मिश्रा द्वारा दायर निगरानी याचिका को 21 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया था. राहुल गांधी ने इसी आदेश को चुनौती दी है. 

क्या है पूरा मामला?

राहुल गांधी ने सितंबर 2024 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में सिख समुदाय को लेकर बयान दिया था. राहुल ने कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है. उन्होंने एक पत्रकार से सवाल किया था कि क्या एक सिख के रूप में पगड़ी बांधने, कड़ा पहनने और गुरुद्वारा जाने की अनुमति मिलेगी?

राहुल ने अपने कार्यक्रम में मौजूद सिख पत्रकार भलिन्दर सिंह का नाम पूछने के बाद यह बात कही थी. इस पर खुद भलिन्दर सिंह और अन्य सिखों ने आपत्ति जताई थी. आरोप लगा कि राहुल का यह बयान उकसाने वाला और राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोगों को लड़ाने-भिड़ाने वाला है. 

थाने में FIR नहीं हुई तो पहुंचे कोर्ट

वाराणसी के तिलमापुर निवासी नागेश्वर मिश्रा ने राहुल के अमेरिका में दिए बयान को लेकर सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई. उसके बाद मामला दर्ज करवाने के लिए उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) की अदालत में बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया. 

कोर्ट ने क्षेत्राधिकार से बाहर बता खारिज किया

नागेश्वर मिश्रा के प्रार्थना पत्र को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने 28 नवंबर 2024 को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया.  अदालत का कहना था कि भाषण अमेरिका में दिया गया था, ऐसे में यह मामला उनके क्षेत्राधिकार के बाहर है. 

नागेश्वर मिश्रा ने इसके बाद वाराणसी सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दायर की. एमपी एमएलए कोर्ट के स्पेशल जज ने इसे 21 जुलाई को स्वीकार कर लिया. इसी के खिलाफ राहुल अब हाईकोर्ट पहुंचे हैं.  

राहुल ने हाईकोर्ट से की ये मांग

राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में अपने वकीलों के जरिए दाखिल याचिका में कहा है कि पुनरीक्षणकर्ता एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है. समाज में उनका अच्छा सम्मान है. वाराणसी एमपी-एमएलए कोर्ट के स्पेशल जज द्वारा पारित निर्णय और आदेश, पूरी तरह गलत, अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर है. ऐसे में उसे रद्द किया जाना चाहिए. 

राहुल की तरफ से राज्य सरकार और शिकायतकर्ता नागेश्वर मिश्रा को प्रतिवादी बनाते हुए कहा गया है कि आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई होने तक वाराणसी के स्पेशल जज के 21 जुलाई के आदेश पर रोक लगाई जाए या तथ्यों व परिस्थितियों के आधार पर उचित आदेश पारित किया जाए अन्यथा अपूरणीय क्षति हो सकती है. 

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