- बिहार से अप्रैल में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, इसमें 4 एनडीए और एक महागठबंधन के पास है
- बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं, जिनमें एनडीए के 202 और महागठबंधन के 35 विधायक हैं
- राज्यसभा चुनाव में हर सीट जीतने के लिए 41 वोट जरूरी हैं, जिससे NDA चार सीटें आसानी से जीत सकता है
बिहार से अप्रैल में खाली होने जा रही राज्य सभा की पांच सीटों को लेकर दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर सामने आ रही है. इन पांच सीटों में से अभी चार एनडीए के और एक महागठबंधन के पास है. अप्रैल में होने वाले चुनाव में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एनडीए चार सीटों पर जीत सकता है. जबकि पांचवीं सीट के लिए जोड़-तोड़ और तिकड़म होने की संभावना है. इस बीच महागठबंधन की एकता पर उठे सवालों ने इस पांचवी सीट का मुकाबला रोचक बना दिया है.
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें हो रही हैं खाली
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं। इनमें जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और राम नाथ ठाकुर, आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेन्द्र धारी सिंह तथा आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं. वर्तमान में NDA के पास 202 विधायक हैं. यह संख्या इस प्रकार है- बीजेपी 89, जेडीयू 85, लोजपा रामविलास 19, हम 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4. जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं. इनमें आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6 और अन्य के चार विधायक हैं. छह विधायक किसी खेमे में नहीं हैं और राज्य सभा चुनाव में पांचवीं सीट पर इन पर सबकी नजरें होंगी. ये हैं एआईएमआईएम के पांच और बीएसपी का एक.
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राज्यसभा चुनाव में जीत का गणित
राज्यसभा चुनाव के लिए गणित देखें तो इसके लिए हर सीट जीतने के लिए 41 वोट जरूरी हैं. यह आंकड़ा इस तरह आता है- विधानसभा की कुल सीटों को राज्यसभा सीटों में एक जोड़ कर विभाजित किया जाता है. यानी 243/5+1 = (40.5) 41. इस हिसाब से देखें तो एनडीए के पास 202 विधायक होने से वह 4 सीटें आसानी से जीत सकता है. इस तरह उसके पास 38 सरप्लस वोट रहेंगे. यानी पांचवीं सीट के लिए विपक्ष या अन्य के 3 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा. उधर, विपक्ष के पास अगर सभी वोट इकट्ठा रहते हैं यानी 35+6=41 तभी वह पांचवी सीट पर जीत हासिल कर सकता है.
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AIMIM करेगी खेल?
इसमें पेच यह है कि AIMIM के सभी पांच विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिल चुके हैं और मुद्दों आधारित समर्थन की बात कर चुके हैं. बीएसपी का इकलौता विधायक क्या करेगा, यह अभी तय नहीं है. उधर, लोजपा राम विलास के कोटे से नीतीश सरकार में मंत्री संजय सिंह ने दावा किया है कि मकर सक्रांति के बाद कांग्रेस में टूट होगी और सभी छह विधायक एनडीए में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो राज्य सभा की पांचवी सीट भी एनडीए के खाते में आ सकती है. जबकि कांग्रेस के शकील अहमद भी कह चुके हैं कि कांग्रेस आरजेडी से अपना अलग रास्ता तलाशेगी.
NDA में किसे, कितनी सीटें
अभी के गणित के अनुसार एनडीए की चार तय सीटों में दो बीजेपी और दो जेडीयू को मिलेंगी. इस तरह आरएलएम के नेता उपेंद्र कुशवाहा का मामला फंसा दिखता है क्योंकि उनका कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. उनकी दिक्कत यह भी है कि पार्टी के चार में से तीन विधायक उनसे नाराज हैं क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को मंत्री बनवा दिया जो किसी भी सदन का सदस्य नहीं. ऐसे में यह फैसला बीजेपी को करना होगा कि कुशवाहा का क्या करना है. राज्यसभा की पांचवी सीट का विकल्प भी खुला है. उधर, जेडीयू अपने कोटे में से केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर को दोबारा राज्य सभा भेजना चाहती है ताकि अति पिछड़े वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जा सके. दूसरी सीट पर हरिवंश की वापसी मुश्किल है क्योंकि जेडीयू सामाजिक समीकरण साधना चाहती है. वहीं बीजेपी अपने कोटे से किन दो नेताओं को राज्यसभा भेजेगी, यह भी देखना दिलचस्प होगा क्योंकि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन बिहार में अभी विधायक हैं.
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