बीजेपी ने स्टूडेंट एक्टिविस्ट नेहा बोरा पर हिंदू धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि बोरा की बातें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों जैसी ही हैं और उनका बयान सनातन धर्म के खिलाफ एक वैचारिक अभियान को दर्शाता है. उन्होंने NDTV से कहा कि ये बयान राहुल गांधी से प्रेरित हैं, क्योंकि आपको याद होगा कि राहुल ने कहा था कि मंदिरों के अंदर लड़कियों के साथ छेड़खानी की जाती है.
नेहा बोरा ने दावा किया था कि महिलाओं को "ब्राह्मणवादी व्यवस्था" से सुरक्षा की जरूरत है और मंदिरों के अंदर पुजारी दुष्कर्म करते हैं. 2014 में, दिल्ली में एक महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि जो लोग मंदिरों में जाकर देवियों की पूजा करते हैं, वही लोग बसों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी करते हैं.
प्रदीप भंडारी ने कहा, "ये वही कांग्रेस पार्टी है जिसने 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था. नेहा बोरा बांग्लादेश के इस्लामवादियों से प्रेरित हैं. इससे पता चलता है कि कांग्रेस की पूरी विचारधारा और सोच भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है, क्योंकि वे सनातन को बदनाम कर रहे हैं और हिंदू आस्था को निशाना बना रहे हैं. जो उनकी सांप्रदायिक मानसिकता को दर्शाता है. इससे ये भी साफ होता है कि कांग्रेस पार्टी का DNA हिंदू-विरोधी, संविधान-विरोधी और सनातन-विरोधी है."

'हिंदू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान तीखे राजनीतिक विवाद खड़े कर दिए थे. उस समय, 2010 से 2013 के बीच, तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और सुशील कुमार शिंदे ने बम धमाकों के मामलों की जांच पर चर्चा करते हुए इन शब्दों का इस्तेमाल किया था.
ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन करते हुए ये बयान दिया था. मतदाता सूची से जानबूझकर नाम हटाने और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए, नेहा बोरा ने दावा किया कि "वोट की पवित्रता को तार-तार कर दिया गया है". इसी बयान के तुरंत बाद, उन्होंने जाति और धार्मिक संस्थानों को लेकर अपनी बात कही.
बोरा ने कहा, "सुरक्षा बेहद जरूरी है और यह सुरक्षा खास तौर पर 'ब्राह्मणवादी व्यवस्था' से चाहिए. ये एक ऐसी व्यवस्था है जो मानती है कि गरीब, शोषित, जानवर और महिलाएं - ये सभी दमन और दुर्व्यवहार के ही लायक हैं. इसी व्यवस्था के तहत ब्राह्मण महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं और वे यौन शोषण का शिकार होती हैं. मंदिरों के भीतर पुजारी दुष्कर्म करते हैं. हमने ऐसी घटनाएं देखी हैं."

जून 2019 में एक विशेष अदालत ने छह लोगों को दोषी ठहराया और तीन आरोपियों - जिनमें मंदिर की देखरेख करने वाला सांझी राम भी शामिल था, उसको आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.
बोरा के बयान की सोशल मीडिया पर भी आलोचना हुई है, क्योंकि उन्होंने एक पूरे समुदाय पर व्यापक आरोप लगाए हैं. इंस्टाग्राम हैंडल 'सनातनिकिड्स' ने एक पोस्ट में कहा, "एक पूरे समुदाय के खिलाफ इतने गंभीर आरोप और व्यापक बयान सार्वजनिक चर्चा में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर सवाल खड़े करते हैं. जवाबदेही ज़रूरी है, लेकिन ज़िम्मेदारी से बोलना भी उतना ही ज़रूरी है."
इसमें कहा गया है कि अगर यौन शोषण के मामले सामने आते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. खुद को 'हिंदू-विरोधी दुष्प्रचार का तथ्यों के साथ जवाब देने वाला मंच' बताने वाले इस समूह ने कहा, "हालांकि, पूरे समुदाय को महिलाओं के लिए खतरा बताना बहुत ही गलत है. महिलाओं की सुरक्षा का इस्तेमाल कभी भी किसी समुदाय को बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए."
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