- आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने Blinkit डिलीवरी एजेंट बनकर एक दिन काम किया
- राघव चड्ढा ने अपने अनुभव से देश की गिग इकॉनमी की शोषणकारी हकीकत को उजागर करने का प्रयास किया
- उन्होंने हाल ही में सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी नियमों का स्वागत किया था
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों सुर्खियों में है. वजह है उनका एक वीडियो, जो कि इंटरनेट की दुनिया में खूब वायरल हो रहा है. दरअसल इस हफ्ते उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने सभी को चौंका दिया. राघव ने अपनी पारंपरिक सियासी पहचान छोड़कर कुछ वक्त के लिए Blinkit डिलीवरी एजेंट की भूमिका निभाई. इस दौरान वो स्कूटी पर सवार होकर ब्लिंकिट के डिलीवरी एजेंट काम करते दिखे.
🔴#BREAKING | राघव चड्ढा बने डिलीवरी एजेंट#RaghavChadha | @DeoSikta pic.twitter.com/wIW8ztyhkh
— NDTV India (@ndtvindia) January 12, 2026
राघव ने शेयर किया वीडियो
राघव चड्ढा ने अपने X अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर, मैंने उनका एक दिन जिया. बने रहिए, आगे और भी है! वीडियो में राघव Blinkit की पहचान वाली पीली यूनिफॉर्म पहने नजर आए. उन्होंने डिलीवरी बैग पीठ पर लटकाया और एक अन्य राइडर के साथ स्कूटी पर सवार होकर डिलीवरी करने निकल पड़े. क्लिप के अंत में राघव एक अपार्टमेंट के दरवाजे तक पहुंचते दिखते हैं.
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गिग इकॉनमी पर सवाल
AAP सांसद का यह वीडियो उस पोस्ट के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देश की गिग इकॉनमी की “शोषणकारी हकीकत” को लोगों के सामने उजागर किया था. पिछले दिनों ही AAP सांसद ने सरकार द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी नियमों का स्वागत किया है. ये नियम 30 दिसंबर 2025 को कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत अधिसूचित किए गए थे. चड्ढा ने इसे “लाखों गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए पहचान, सुरक्षा और सम्मान की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम” बताया. उन्होंने कहा कि भले ही प्लेटफॉर्म कंपनियों ने इन आवाज़ों को न सुना हो, लेकिन देश और सरकार ने जरूर सुना.
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संसद सत्र के बाद, राघव चड्ढा ने एक डिलीवरी पार्टनर को अपने आवास पर लंच के लिए आमंत्रित किया था. यह मुलाकात बेहद सहज और आत्मीय रही, जिसमें खुलकर बातचीत हुई. लंच के दौरान डिलीवरी पार्टनर ने अपने वास्तविक अनुभव साझा किए. इस दौरान दोनों के बीच लंबे काम के घंटे, अनिश्चित कमाई, एल्गोरिदम आधारित टारगेट्स और बुनियादी सुरक्षा या शिकायत निवारण तंत्र की कमी पर बात हुई थी.
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