- सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की हड़ताल के समर्थन में आई आलोचनाओं का जवाब देते हुए शोषण को गलत बताया
- चड्ढा ने हड़ताल करने वालों को गुंडा कहने पर निशाना साधते हुए उचित वेतन की मांग को सही ठहराया
- राघव चड्ढा ने प्लेटफॉर्म कंपनियों के बोर्ड सदस्यों पर उनके खिलाफ सुनियोजित अभियान चलाने का आरोप लगाया
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की हालिया हड़ताल के समर्थन पर आई तीखी आलोचना का करारा जवाब दिया है. Naukri.com के संस्थापक संजीव भिखचंदानी और Zomato के सीईओ दीपिंदर गोयल जैसे उद्यमियों के व्यक्तिगत हमलों का विरोध करते हुए चड्ढा ने कहा कि वो स्टार्टअप्स और व्यापार के समर्थक हैं, लेकिन प्रगति के नाम पर श्रमिकों के 'शोषण' को कभी स्वीकार नहीं करेंगे.
राघव चड्ढा ने स्टार्टअप प्लेटफॉर्म्स की प्रतिक्रिया पर निशाना साधा, जो हड़ताल करने वालों को 'गुंडे' (miscreants) बता रहे थे. एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट कर कहा, "मैं व्यापार और स्टार्टअप्स का समर्थक हूं. संसद में नवाचार और उद्यमिता के लिए खड़ा रहा हूं. भारत को बिल्डर्स और रिस्क-टेकर्स चाहिए. लेकिन प्रगति के नाम पर शोषण कभी नहीं. सफलता कड़ी मेहनत करने वालों का आखिरी बूंद निचोड़कर नहीं बनती. उचित वेतन मांगना अब 'राजनीतिक एजेंडा' बन गया? जब एक दिन की कमाई से किराया, बिजली या बच्चे की स्कूल फीस चलती हो, तो हड़ताल के दिन काम करना मंजूरी नहीं, मजबूरी है."
Delivery partners across India went on strike demanding basic dignity, fair pay, safety, predictable rules and social security. The response from the Platform was to call them "miscreants" and turn a labour demand into a law & order narrative. That is not just insulting, it is…
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) January 3, 2026
चड्ढा ने गंभीर आरोप लगाया, "मुझे वेतन और सुरक्षा पर स्वस्थ चर्चा चाहिए थी. इसके बजाय घंटों में एक जैसे टॉकिंग पॉइंट्स वाले पोस्ट आ गए. बोर्ड सदस्यों ने सोशल मीडिया खोज लिया. यह पेड कैंपेन लगता है. प्लेटफॉर्म्स वाले जो फोन कर रहे हैं और ट्वीट के पक्ष में मैसेज भेज रहे हैं, वे मेरे पास पहुंचे इससे पहले ट्वीट आए."
राघव चड्ढा ने अपील की, "प्रगति यह है कि सिस्टम चलाने वाले सम्मान से जी सकें. यह लड़ाई संसद में और बाहर, जवाबदेही तक चलेगी. प्लेटफॉर्म्स बनाने वाले वर्कर्स को 'गुंडा' न कहें, इंसान मानें."
उन्होंने कहा, "उचित वेतन की मांग करने वाले श्रमिक अपराधी नहीं हैं. यदि आपको अपने श्रमिकों को सड़क पर बनाए रखने के लिए पुलिस की आवश्यकता है, तो वे कर्मचारी नहीं, बल्कि हेलमेट पहने बंधक हैं. रिकॉर्ड ऑर्डर संख्या सफलता का पैमाना हो सकती है, लेकिन यह नैतिकता का पैमाना नहीं है."
चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म कंपनियों के बोर्ड सदस्यों ने उनके खिलाफ एक "सुनियोजित अभियान" चलाया है. उन्होंने कहा कि जैसे ही मुनाफे पर आंच आती है, जायज मांगों को 'राजनीतिक एजेंडा' बता दिया जाता है.

क्या था संजीव भीकचंदानी का 'शैम्पेन सोशलिस्ट' कटाक्ष?
इससे पहले, 'नौकरी डॉट कॉम' के संस्थापक संजीव भीकचंदानी ने राघव चड्ढा का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल की पोस्ट का समर्थन करते हुए लिखा, "यह मानना मुश्किल है कि एक 'शैम्पेन सोशलिस्ट', जिसने शानदार शादी की और मालदीव में छुट्टियां मनाईं, वह गिग वर्कर्स के शोषण पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है. आम आदमी धिक्कार है!"
भीकचंदानी ने तर्क दिया कि बोर्ड की बैठकों में डिलीवरी पार्टनर्स को लेकर काफी चर्चा होती है और हड़ताल केवल एक राजनीतिक स्टंट है.
Very well written @deepigoyal Every word is true. It beggars belief that a Champagne Socialist who married a film star and had a designer wedding in Udaipur and a first wedding anniversary in Maldives has the audacity to then shed crocodile tears around alleged exploitation of… https://t.co/pgcTa0hwKy
— Sanjeev Bikhchandani (@sbikh) January 2, 2026
जोमैटो का पक्ष: आय में वृद्धि का दावा
यह विवाद Zomato सीईओ दीपिंदर गोयल के पोस्ट से भड़का. विवाद के बीच दीपेंद्र गोयल ने आंकड़े साझा करते हुए दावा किया कि डिलीवरी पार्टनर्स की औसत प्रति घंटा आय में 10.9% की वृद्धि हुई है. उनके अनुसार, यह आय 2024 के ₹92 से बढ़कर 2025 में ₹102 प्रति घंटा हो गई है. गोयल ने गिग इकोनॉमी का बचाव करते हुए कहा कि इस मॉडल ने सदियों से चली आ रही श्रमिकों की अनदेखी को खत्म किया है.
यह हड़ताल डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर श्रमिकों की स्थिति को उजागर करती है. चड्ढा ने राज्यसभा में मुद्दा उठाया, जिससे बहस तेज हुई. भारत की गिग इकोनॉमी अरबों की है, लेकिन असुरक्षा और कम वेतन की शिकायतें आम हैं. अभी कोई नीतिगत बदलाव नहीं, लेकिन यह बहस जारी है.
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