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QFON ऐप के नाम पर 183 करोड़ का डिजिटल पोंजी घोटाला, ED ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

QFON ऐप के जरिए चल रही फर्जी डिजिटल निवेश स्कीम का भंडाफोड़ करते हुए ED ने 183 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है.

QFON ऐप के नाम पर 183 करोड़ का डिजिटल पोंजी घोटाला, ED ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
  • ED के मुंबई ज़ोनल ऑफिस ने 11 मार्च 2026 को सुधीर दलसुखभाई कोटडिया और उमंग शांतिभाई कोटडिया को गिरफ्तार किया है
  • दोनों आरोपियों पर डिजिटल निवेश पोंजी स्कीम चलाने और हजारों निवेशकों को ठगने के आरोप हैं
  • QFON App Limited के माध्यम से निवेशकों को ऑनलाइन विज्ञापन देखने पर लाभ का झांसा देकर पैसा जुटाया गया था

ED के मुंबई ज़ोनल ऑफिस ने डिजिटल निवेश घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 मार्च 2026 को सुधीर दलसुखभाई कोटडिया और उमंग शांतिभाई कोटडिया को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया. बाद में आरोपियों को मुंबई की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 20 मार्च 2026 तक ED की हिरासत में भेज दिया है. जांच के मुताबिक यह मामला एक फर्जी डिजिटल निवेश स्कीम से जुड़ा है, जिसे QFON App Limited और उससे जुड़ी कंपनियों के जरिए चलाया जा रहा था.

QFON App से जुड़ी फर्जी डिजिटल निवेश स्कीम

इस मामले में पहले Vartak Nagar Police Station, ठाणे सिटी में 28 दिसंबर 2024 को FIR दर्ज की गई थी. केस में सुधीर कोटडिया, उमंग कोटडिया, जयसुख साखरिया समेत कई लोगों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर एक डिजिटल पोंजी स्कीम चलाई और लोगों को निवेश के नाम पर ठगा. ED की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने गुजरात और महाराष्ट्र के हजारों निवेशकों को झांसा देकर इस स्कीम में पैसा लगवाया. निवेशकों को बताया जाता था कि मोबाइल ऐप पर ऑनलाइन विज्ञापन देखने और डिजिटल गतिविधियों के जरिए पैसा कमाया जाएगा.

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पोंजी स्कीम के जरिए निवेशकों से ठगी का खुलासा

इसके बदले उन्हें हर महीने 2% से लेकर 10.5% तक भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह पूरा सिस्टम पोंजी स्कीम की तरह काम कर रहा था. यानी नए निवेशकों से लिया गया पैसा पुराने निवेशकों को रिटर्न के तौर पर दिया जाता था, जबकि बड़ी रकम आरोपियों द्वारा हड़प ली जाती थी. निवेशकों से जुटाए गए पैसे को कई फर्जी कंपनियों, अलग-अलग बैंक खातों और व्यक्तियों के जरिए घुमाया गया. इसके अलावा बड़ी रकम को नकद में अंगड़िया ऑपरेटरों के जरिए भी ट्रांसफर किया गया.

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183 करोड़ की अवैध कमाई, फरारी के बाद गिरफ्तारी

अब तक की जांच में पता चला है कि इस फर्जी स्कीम के जरिए करीब 183 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई. ED के मुताबिक आरोपियों ने जांच से बचने के लिए काफी समय तक फरारी काटी, वे पहले दुबई भाग गए थे और बाद में नेपाल के रास्ते भारत लौटे. लंबे समय तक तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर ED ने आखिरकार दोनों आरोपियों को ट्रेस कर लिया और 11 मार्च को गिरफ्तार कर लिया. अब ED इस मामले में पैसों के पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और निवेशकों से जुड़े ट्रांजेक्शन की जांच आगे बढ़ा रही है.

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