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ट्वीशा शर्मा केस: बीमारी के बहाने सच छुपा रही हैं गिरिबाला !कॉल डिटेल और वाट्सएप चैट से खुलेगा आरोपियों का झूठ

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह सीबीआई के तीखे सवालों से बचने के लिए घबराहट और बीमारी का बहाना बना रही हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले चोट के निशान और ब्यूटी पार्लर से सीसीटीवी फुटेज गायब कराने के लिए तीन वकीलों को भेजने का सच अब एजेंसी के रडार पर है.अब सीबीआई की टीम गवाहों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल-लैपटॉप से मिले डेटा का मिलान दोनों आरोपियों के बयानों से कर रही है ताकि पूरी स्थिति साफ हो सके.

  • ट्विशा शर्मा केस में गिरिबाला सिंह CBI के सवालों का जवाब देने से बच रही है
  • गिरिबाला सिंह ने अचानक एंजायटी और घबराहट होने की बात कह रही है. CBI इसे समय काटने का तरीका मान रही है
  • CBI का फोकस डिजिटल सबूतों को नष्ट करने के प्रयास और पुलिस को सूचना देने में हुई जानबूझकर देरी पर है
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Twisha Sharma Case:भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई की जांच अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच रही है. सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान खुद को कानून की जानकार बताने वाली पूर्व जज गिरिबाला सिंह CBI के सवालों का जवाब देने से बच रही है. वो लगातार  घबराहट व एंजायटी की बात करके जांच से बचने का प्रयास कर रही है. दूसरी तरफ सीबीआई का मुख्य फोकस इस समय कथित क्राइम सीन (घटनास्थल) के साथ की गई छेड़छाड़, डिजिटल सबूतों को नष्ट करने के प्रयास और पुलिस को सूचना देने में हुई जानबूझकर देरी पर है.

पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ने का बहाना

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई की हिरासत में जब पूछताछ का दायरा बढ़ा, तो पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने अचानक एंजायटी और घबराहट होने की बात कही. वह बार-बार बेचैनी की शिकायत कर रही हैं, जिसे जांच अधिकारी पूछताछ से बचने और समय काटने का एक तरीका मान रहे हैं. जब भी उनसे मामले से जुड़े सीधे सवाल किए जा रहे हैं, वह ज्यादातर समय खामोश रह जा रही हैं.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चोट के निशानों पर घेरा

सीबीआई ने इस पूछताछ में मृतका ट्विशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सबसे बड़ा हथियार बनाया है. रिपोर्ट से साफ हुआ है कि ट्विशा के शरीर पर मौत से पहले की चोटों के निशान थे.

सीबीआई ने गिरिबाला सिंह से साफ पूछा कि ये चोटें कैसे आईं और क्या उस समय परिवार के लोग घर में ही मौजूद थे? जांच अधिकारियों का कहना है कि ये चोटें ऐसी बिल्कुल नहीं हैं जो मौत के बाद शव को उठाने या संभालने के दौरान सामान्य तौर पर लगती हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर शारीरिक प्रताड़ना की ओर इशारा करती हैं.

पार्लर के सीसीटीवी फुटेज और वकीलों का कनेक्शन

इस पूरे मामले में सबसे संदिग्ध मोड़ तब आया जब ट्वीशा की मौत वाले दिन का एक नया सच सामने आया. सीबीआई ने पूर्व जज से सीधा सवाल किया कि ट्विशा की मौत के तुरंत बाद पार्लर से सीसीटीवी फुटेज लेने के लिए तीन वकीलों को किसने और क्यों भेजा था? एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि वकीलों को वहां सच में सबूत सुरक्षित रखने के लिए भेजा गया था या फिर डिजिटल रिकॉर्ड को मिटाने या उसके साथ कोई छेड़छाड़ करने की कोशिश की जा रही थी.

सबूत मिटाने और पुलिस को देर से बताने की जांच

सीबीआई की जांच का सबसे बड़ा केंद्र इस समय यही है कि क्या घटना वाली जगह यानी क्राइम सीन की स्थिति को बदला गया था? एजेंसी इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि ट्विशा की मौत हो जाने के बाद भी पुलिस को सूचना देने में इतनी देरी क्यों की गई? इसके अलावा, शादी के बाद ट्विशा और ससुराल वालों के बीच के खराब रिश्तों, विवादों और वाट्सएप चैट को सामने रखकर पूर्व जज और उनके बेटे समर्थ से जवाब मांगे जा रहे हैं.अब सीबीआई की टीम गवाहों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल-लैपटॉप से मिले डेटा का मिलान दोनों आरोपियों के बयानों से कर रही है ताकि पूरी स्थिति साफ हो सके.
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