राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि आज की राजनीति ने अपनी शालीन भाषा खो दी है और आज जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता है वैसा पहले कभी सुनने को नहीं मिलता था. वह जब्बार पटेल द्वारा निर्देशित 1979 की मराठी फिल्म ‘सिंहासन' से संबंधित एक चर्चा में बोल रहे थे. यह फिल्म 1970 के दशक की महाराष्ट्र की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती है. उन्होंने कहा, "राजनीति ने आज अपनी शालीन भाषा खो दी है. अब जिस अतिवादी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, वह अतीत में कभी भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा नहीं थी."
यह पूछे जाने पर कि वह उन दिनों की किस चीज को याद करते हैं, पवार ने कहा, ‘‘उन दिनों की राजनीति अधिक शालीन थी.''
-
परजीवी, बोझ, फेल प्रोडक्ट... NDTV World Summit में PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा -
PM Modi in NDTV World Summit : बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की क्या भूमिका? PM मोदी ने बताया -
PM Modi Speech: Rahul Gandhi पर PM मोदी क्या-क्या बोले? | NDTV World Summit 2026 -
फेल प्रोडक्ट लॉन्च कर रही कांग्रेस, इतनी तो लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती; NDTV वर्ल्ड समिट में PM मोदी -
NDTV World Summit के मंच से कौन से नए खेल का जिक्र कर गए मोदी...! -
'मत्स्य न्याय' के उदाहरण से पीएम मोदी ने UN पर क्या कुछ कह दिया? -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब
जब फिल्म बनी थी तब पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने पटेल को मंत्रालय के साथ-साथ तत्कालीन मंत्रियों और विधायकों के कार्यालयों और बंगलों के अंदर शूटिंग करने की अनुमति दी थी.
फिल्म पत्रकार-लेखक स्वर्गीय अरुण साधु द्वारा लिखे गए दो उपन्यासों - मुंबई दिनांक और सिम्हासन पर आधारित है, जबकि पटकथा स्वर्गीय विजय तेंदुलकर द्वारा लिखी गई थी.
यह पूछे जाने पर कि फिल्म में वह किस किरदार के साथ सबसे अधिक सहानुभूति रखते हैं, पवार ने कहा कि यह स्वर्गीय नीलू फुले द्वारा निभाई पत्रकार की भूमिका थी.
पवार ने कहा, ‘सरकार को कवर करने वाले पत्रकार कभी-कभी महसूस करते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं और उनमें से कुछ तो मंत्रियों और विधायकों के सलाहकार भी बन जाते हैं.'
पाटेकर और अगाशे ने कहा कि राजनीति कभी निर्दाेष नहीं होती. अगाशे ने कहा,' लेकिन यह कभी प्रतिशोध की भावना नहीं थी. कुछ ऐसे सिद्धांत थे जिनका पालन किया गया था, जिन्हें हम आज देखने में विफल हैं.‘
ये भी पढ़ें :
* FULL INTERVIEW : "हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर JPC की मांग करना सही नहीं...", NDTV से बोले शरद पवार
* AAP को मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा, ममता बनर्जी और शरद पवार को लगा झटका
* किसी की डिग्री की जगह, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे हैं ज्यादा अहम हैं : शरद पवार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं