- पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट विस्तार के कयास फिर हो गए हैं तेज
- बताया जा रहा है कि इस बार के कैबिनेट विस्तार में सहयोगी दलों को मिलेगा पूरा मौका
- इसके अलावा सरकार परिसीमन बिल को लेकर भी रणनीति बनाने में जुटी है
चार दिनों की मध्य एशिया की यात्रा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वापसी के बाद अब एक बार फिर उनके मंत्रिपरिषद के विस्तार को लेकर कयास शुरू हो गया है. सूत्रों के मुताबिक इस महीने सरकार में फेरबदल और परिसीमन को लेकर संसद के विशेष सत्र को लेकर फैसला होने की संभावना है. गौरतलब है कि 13 अगस्त को संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद से उसका अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है. वहीं बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के गठन के बाद अब माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रख कर जल्दी ही मोदी मंत्रिपरिषद में भी फेरबदल होगा.
अभी ब्रिक्स सम्मेलन पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभी पूरा फोकस 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन पर है. इसमें चीन और रूस के राष्ट्रपति भी शामिल होंगे. भारत वैश्विक स्तर के इस आयोजन को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो से चार सितंबर की बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा में व्यस्त हैं. पांच सितंबर को वे दिल्ली के एसआरसीसी कॉलेज के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेंगे. आठ सितंबर को उनका गुजरात के नवसारी और वडोदरा जाने का कार्यक्रम है. वहां वे नवसारी जिला बीजेपी मुख्यालय का उद्घाटन करेंगे.
कई सहयोगी दलों को मिल सकता है मंत्री पद
परिसीमन बिल पर समर्थन मिलने को सीधे तौर पर मोदी मंत्रिपरिषद में विस्तार से जोड़ कर देखा जा रहा है. कुछ नए दलों को समर्थन मिलने पर उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है. इसके लिए खासतौर से एनसीपी शरद पवार का नाम लिया जा रहा है जहां से सुप्रिया सुले प्रबल दावेदार रहेंगी. हालांकि इसके साथ ही बीजेपी को एनसीपी के दूसरे धड़े की दावेदारी को भी ध्यान में रखना होगा. यही कारण है कि बीजेपी चाहती है कि एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय हो जाए. हालांकि डीएमके के सरकार में शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है. वहीं परिसीमन बिल के समर्थन का ऐलान कर चुके अकाली दल को भी पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंत्रिपरिषद में हिस्सेदारी की बात कही जा रही है. टीएमसी के बागियों से बनी एनसीपीआई से मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं. आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए सात राज्य सभा सांसदों में से किसी को पंजाब चुनाव के मद्देनजर जगह दी जा सकती है. वहीं शिवसेना को कैबिनेट मंत्री पद मिल सकता है क्योंकि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शामिल होने से उसकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है.
जेन जी पर भी नजर
कहा जा रहा है कि जेन जी को ध्यान में रख कर इस बार मंत्रिपरिषद में युवाओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है. अभी सत्तर वर्ष से अधिक उम्र के बारह कैबिनेट और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं. 81 वर्ष के जीतन राम मांझी सबसे ज्यादा उम्र के कैबिनेट मंत्री हैं. जबकि 38 वर्ष के के राम मोहन नायडू सबसे युवा कैबिनेट मंत्री हैं. हाल ही में मोदी सरकार से तीन मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री जॉर्ज कूरियन और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस्तीफा दिया है. इस तरह अभी 29 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्य मंत्री हैं. यानी प्रधानमंत्री को मिला कर अभी मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं जबकि अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं. यानी अभी 12 मंत्री और बनाए जा सकते हैं. लेकिन कई मौजूदा मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है. ऐसे में फेरबदल के बाद मंत्रिपरिषद में करीब दो दर्जन नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं.
फेरबदल की कवायद शुरू- सूत्र
सूत्रों के मुताबिक संभावित मंत्रिपरिषद फेरबदल की कवायद शुरू हो चुकी है. इसमें क्षेत्रीय, जातीय और धार्मिक समीकरणों के हिसाब से नाम तैयार किए जा रहे हैं. मंत्रिपरिषद के फेरबदल में कई मौजूदा मंत्रियों की प्रदर्शन के आधार पर छुट्टी भी हो सकती है. आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र भी कुछ राज्यों से मंत्रियों की संख्या बदली जा सकती है. बीजेपी नेताओं के अनुसार मंत्रिपरिषद में फेरबदल करते समय 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखा जाएगा. इसीलिए महिलाओं और युवाओं की संख्या बढ सकती है.
कुछ मंत्रियों का प्रभार घटेगा
चौदह मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार है. ऐसे में कुछ मंत्रियों का बोझ हल्का भी किया जा सकता है. संभावना है कि सितंबर में बीजेपी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड का भी पुनर्गठन किया जाए. इसमें कुछ ताकतवर नेताओं को शामिल किया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार किसी मुख्यमंत्री को पार्लियामेंट्री बोर्ड में लेने का प्रस्ताव नहीं है क्योंकि ऐसे में यह प्रश्न उठेगा कि अन्य सीएम को क्यों नहीं लिया गया. इसी तरह बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद का भी गठन होना है.
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