पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी पहली मुलाकात का कभी न भूलने वाला अनुभव साझा किया है. उन्होंने कहा- जब मैं पीएम मोदी की यात्रा पर विचार करता हूं, तो कृतज्ञता से भर जाता हूं.
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा- मुझे 2009 में पीएम मोदी के साथ हुई अपनी पहली मुलाकात आज भी स्पष्ट रूप से याद है. उस समय मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे, युवा मोर्चा की एक टीम उनसे मिलने गई थी, जिसमें मैं भी शामिल था. हम जैसे ही मोदी जी के सामने पहुंचे, उन्होंने हमारी ओर देखा और कहा- 'आप सभी राजनीति में हैं, एक बार हमेशा ध्यान रखें कि मैं न तो कोई नेता हूं, न मंच हूं और न ही कोई माइक हूं'.
उनके साथ काम करना अनुशासन और असीम ऊर्जा का पाठ
हर्ष संघवी ने कहा- मोदी जी के उस एक वाक्य ने राजनीति की पारंपरिक अवधारणा को ध्वस्त कर दिया. उन्होंने हमें विपक्षी राजनीतिक शोर और आलोचनाओं से आगे देखने का निर्देश दिया. उनका संदेश साफ था- मैदान में जाओ, गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के वंचित वर्गों की सेवा करो. हमारा लक्ष्य पार्टी-केंद्रित राजनीति खेलना नहीं था, बल्कि अपना समय पूरी तरह से नागरिक सेवा के लिए समर्पित करना था.
यही मूल दर्शन आज भी मोदी जी को प्रेरित करता है. मोदी जी ने कभी अपने जन्मदिन पर केक नहीं काटे और न ही बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए हैं. इसके बजाय, वे इस दिन को सामाजिक सेवा और जन कल्याण के लिए समपर्ति करते हैं. उनकी ऐसी पहल जो वास्तव में जीवन को बदल देती हैं. यही सब कारण हैं कि उनके साथ काम करना अनुशासन और असीम ऊर्जा का पाठ है.
हर दिन 16 से 18 घंटे काम करते हैं
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने कहा- लोग अक्सर पूछते हैं कि वह हर दिन 16 से 18 घंटे काम करते हुए इतना व्यस्त कार्यक्रम कैसे बनाए रखते हैं. इसका जवाब बहुत सरल है, जो लोग निस्वार्थ भाव से सेवा करना चाहते हैं, वे आसानी से उनकी गति से तालमेल बिठा सकते हैं. लेकिन, जो केवल सत्ता के सुखों का आनंद लेना चाहते हैं, वे उनके आसपास नहीं टिक सकते. उनकी जीवनशैली ही अंतिम फिटनेस दिनचर्या है.
मैंने उच्च स्तरीय बैठकों में बैठकर अंतरराष्ट्रीय सलाहकारों और अनुभवी अधिकारियों को उन्हें जटिल योजनाएं बताते देखा है. फिर भी जब मोदी जी बोलते हैं तो उनका विशाल ज्ञान और व्यावहारिक, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण ऐसे पहलुओं को दिखाता है जिन्हें विशेषज्ञों से भरा कमरा भी अक्सर नजरअंदाज कर देता है. वह परियोजना का मूल्यांकन इस बात से नहीं करते कि कोई इमारत कितनी बड़ी दिखती है, वह देखते हैं कि वह आम नागरिक की कितनी सेवा और उत्थान करेगी.
पीएम ने युवाओं को राष्ट्र-निर्माण में लगाया
हर्ष संघवी ने कहा- आज के दौर में विपक्ष अक्सर युवाओं को लेकर बड़े-बड़े भाषण देता है, उन्हें चुनाव के लिए चर्चा का विषय बनाता है. लेकिन, उन्होंने कभी युवाओं को क्या दिया? बिना अवसरों के अधर में छोड़ दिया, न तो शैक्षणिक सीटों का विस्तार किया और न ही आधुनिक प्लेटफॉर्म बनाए. इससे अलग मोदी जी ने स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे माध्यम से युवाओं को वास्तविक रोजगार प्रदान किया. मेडिकल और इंजीनियरिंग सीटों को बढ़ाया और युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक राष्ट्र-निर्माण में लगाया.
पीएम ने जताया भरोसा- हम कर सकते हैं
हम आज की जेन-जी में इस परिवर्तनकारी ऊर्जा को स्पष्ट रूप से देखते हैं. पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर हुए हमारे दीपोत्सव समारोहों में हजारों युवाओं ने न केवल भाग लिया; बल्कि उन्होंने गर्व और जुनून के साथ पूरा 'वंदे मातरम' गाया. वहीं, अवसरवादी राजनीतिक तत्व हमारी राष्ट्रीय पहचान का सम्मान करने में भी संकोच करते हैं या मना करते हैं. देश की जेन-जी पीढ़ी भारत की विरासत के साथ गर्व से खड़ी है क्योंकि मोदी जी ने उनमें यह विश्वास जगाया है कि हां... हम यह कर सकते हैं'.
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