- PM मोदी शनिवार को दिल्ली में पिपरहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे.
- प्रदर्शनी का शीर्षक “द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” है, जो भगवान बुद्ध के विचारों को दिखाता है.
- पिपरहवा के प्रामाणिक अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय और भारतीय संग्रहालय के संग्रह में संरक्षित हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की ग्रैंड इंटरनेशनल प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. यह प्रदर्शनी सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसका टाइटल “द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के नेक विचारों को और ज्यादा लोकप्रिय बनाने की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है. यह हमारे युवाओं और हमारी समृद्ध संस्कृति के बीच बंधन को और गहरा करने का भी एक प्रयास है. मैं उन सभी लोगों की भी सराहना करना चाहूंगा जिन्होंने इन अवशेषों को वापस लाने के लिए काम किया."
Tomorrow, 3rd January, is a very special day for those passionate about history, culture and the ideals of Bhagwan Buddha.
— Narendra Modi (@narendramodi) January 2, 2026
At 11 AM, the Grand International Exposition of Sacred Piprahwa Relics related to Bhagwan Buddha, ‘The Light & the Lotus: Relics of the Awakened One', will… pic.twitter.com/V6bPwZjsK7
भगवान बुद्ध के आदर्शों के लिए प्रेम रखने वालों के लिए खास दिन
उन्होंने आगे लिखा कि कल, 3 जनवरी, इतिहास, संस्कृति और भगवान बुद्ध के आदर्शों के प्रति उत्साही लोगों के लिए एक बहुत ही खास दिन है. सुबह 11 बजे भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी, 'द लाइट एंड द लोटस: द अवेकन्ड वन के अवशेष', का उद्घाटन दिल्ली में राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में किया जाएगा.

पिपरहवा के अवशेष संग्रहालय में संरक्षित
पीएम ने लिखा, "एक सदी से भी ज्यादा समय के बाद वापस लाए गए पिपरहवा के अवशेष. पिपरहवा से प्रामाणिक अवशेष और पुरातात्विक सामग्री जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संग्रह में संरक्षित हैं."
प्रदर्शनी को अलग-अलग विषयों के आधार पर सजाया गया है. इसके केंद्र में सांची स्तूप से प्रेरित एक पुनर्निर्मित मॉडल रखा गया है, जिसमें राष्ट्रीय संग्रहों के प्रामाणिक अवशेष और स्वदेश वापस लाए गए रत्न एक साथ प्रदर्शित किए गए हैं. अन्य खंडों में पिपरहवा रिविजिटेड, बुद्ध के जीवन की झलकियां, मूर्त में अमूर्त: बौद्ध शिक्षाओं की कलात्मक भाषा, सीमाओं के पार बौद्ध कला और विचारों का विस्तार तथा सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी: निरंतर प्रयास शामिल हैं.

प्रदर्शनी में ऑडियो विजुअल की भी व्यवस्था
आम लोगों की समझ बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी में ऑडियो विजुअल व्यवस्था भी की गई है, इसमें इमर्सिव फिल्में, डिजिटल पुनर्निर्माण, व्याख्यात्मक प्रोजेक्शन और मल्टीमीडिया प्रस्तुतियां शामिल हैं. इसके जरिए भगवान बुद्ध के जीवन, पिपरहवा अवशेषों की खोज, उनके संदेशों के प्रसार और उनसे जुड़ी कला परंपराओं की सरल और गहन जानकारी दी गई है.
दरअसल पिपरहवा सिद्धार्थनगर (उत्तर प्रदेश) एक प्राचीन बौद्ध स्थल है. इसे उस स्थान के बारे में माना जाता है, जहां भगवान बुद्ध ने अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया. 1898 में ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने एक स्तूप की खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेष खोजे थे.औपनिवेशिक काल में इनमें से अधिकांश अवशेष कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में रखे गए, जबकि कुछ हिस्सा पेप्पे के वंशजों के पास रहा और विदेश चला गया। 127 वर्ष बाद उन्हीं अवशेषों को जुलाई 2025 को भारत वापस लाया गया था.
इनपुट-IANS के साथ
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