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This Article is From Nov 09, 2022

PM मोदी 12 नवंबर को तेलंगाना के रामागुंडम में उर्वरक संयंत्र का करेंगे उद्घाटन

सरकार ने स्वदेशी यूरिया उत्पादन को अधिकतम करने के उद्देश्य से मौजूदा 25 गैस आधारित यूरिया इकाइयों के लिए नई यूरिया नीति, 2015 अधिसूचित की थी.

PM मोदी 12 नवंबर को तेलंगाना के रामागुंडम में उर्वरक संयंत्र का करेंगे उद्घाटन
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवंबर को तेलंगाना के रामागुंडम में उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन करेंगे. भारत में उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक और कदम है. रामागुंडम परियोजना की आधारशिला भी 7 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा ही रखी गई थी. देश भर में उर्वरक संयंत्रों के पुनरुद्धार के पीछे उद्देश्य यूरिया के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है. दिसंबर 2021 में, प्रधानमंत्री ने गोरखपुर उर्वरक संयंत्र को राष्ट्र को समर्पित किया था, जिसकी आधारशिला भी उनके द्वारा 22 जुलाई, 2016 को रखी गई थी. यह संयंत्र 30 से अधिक वर्षों से बंद पड़ा हुआ था, इसे पुनर्जीवित किया गया और लगभग 8600 करोड़ की लागत से बनाया गया.

पिछले महीने अक्टूबर में हिंदुस्तान उर्वरक एंड रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के बरौनी प्लांट ने भी यूरिया का उत्पादन शुरू किया था. 8,300 करोड़ की लगात से शुरू हुए इस संयंत्र की 12.7 एलएमटीपीए की यूरिया उत्पादन क्षमता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मई, 2018 को एचयूआरएल की सिंदरी उर्वरक परियोजना के पुनरुद्धार के लिए आधारशिला रखी थी. इसके भी शीघ्र ही चालू होने की उम्मीद है. इसी तरह, उन्होंने 22 सितंबर, 2018 को तालचर उर्वरक परियोजना के पुनरुद्धार के लिए आधारशिला रखी थी. यह संयंत्र कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी पर आधारित है और 2024 में चालू होने की उम्मीद है. रामागुंडम, गोरखपुर में इन सभी यूरिया संयंत्रों के संचालन के बाद, सिंदरी, बरौनी और तालचर, वे यूरिया के 63.5 एलएमटी प्रति वर्ष जोड़ देंगे, जिससे यूरिया के आयात में कमी आएगी. वे यूरिया उत्पादन में आत्मानिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य के करीब जाने में महत्वपूर्ण मदद करेंगे.

सरकार ने स्वदेशी उर्वरक उत्पादन बढ़ाने और किसानों को उर्वरक की समय पर आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया है. सरकार ने स्वदेशी यूरिया उत्पादन को अधिकतम करने के उद्देश्य से मौजूदा 25 गैस आधारित यूरिया इकाइयों के लिए नई यूरिया नीति, 2015 अधिसूचित की थी. यूरिया उत्पादन में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दिया और सरकार पर सब्सिडी के बोझ को युक्तिसंगत बनाया. एनयूपी-2015 के कार्यान्वयन से मौजूदा गैस आधारित यूरिया इकाइयों से अतिरिक्त उत्पादन हुआ है, जिसके कारण यूरिया के वास्तविक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

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