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संसद में महिला आरक्षण 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में एक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने महिला सम्मेलन में जलियांवाला बाग शहीदों को श्रद्धांजलि दी और देश में बैसाखी व नव वर्ष के उत्सव का उल्लेख किया.

संसद में महिला आरक्षण 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में एक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले पीएम मोदी
  • PM मोदी ने महिला सम्मेलन में बैसाखी और नव वर्ष के उत्सव के बीच जलियांवाला बाग शहीदों को श्रद्धांजलि दी
  • मोदी ने कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक लेने जा रहा है जो नारी शक्ति को समर्पित है
  • उन्होंने बताया कि संसद एक नया इतिहास रचने जा रही है जो सामाजिक न्याय को कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाएगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सम्‍मेलन के दौरान कहा कि हर कोई लोकतांत्रिक ढांचों में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने की आवश्यकता दशकों से महसूस कर रहा है. अब ये हकीकत में बदलने जा रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि बैसाखी के त्योहार को लेकर देश में उत्साह का माहौल है. कल देश के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष भी मनाया जाएगा. आज मैं जलियांवाला बाग हत्याकांड के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. देश के विकास पथ में इन महत्वपूर्ण पड़ावों के बीच, भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है. मैं अत्यंत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि यह 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है. यह निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है. नारी शक्ति वंदन को समर्पित.

संसद एक नया इतिहास रचने के करीब

पीएम मोदी ने कहा, "हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत के सपनों को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतावादी हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग हो. बता दें कि यह सम्मेलन संसद के उस सत्र से पहले आयोजित किया जा रहा है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों को विचार और पारित करने के लिए पेश किए जाने की उम्मीद है."

बिल को सभी दलों का समर्थन 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विपक्षी पार्टियों द्वारा समर्थन करने पर सराहना करते हुए, पीएम मोदी ने कहा, " जब 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया गया था, तब सभी दलों ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया था. उस समय सर्वसम्मति से यह मांग उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू किया जाना चाहिए. विशेष रूप से, हमारे सभी विपक्षी सहयोगियों ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि इसे 2029 तक लागू किया जाना चाहिए. लोकतांत्रिक संरचनाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की आवश्यकता दशकों से महसूस की जा रही है. यह चर्चा लगभग चार दशकों से चल रही है. इसमें सभी दलों और कई पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं. हर दल ने इस विचार को अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ाया है."

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पंचायती राज महिला लीडरशिप का बेहतरीन उदाहरण

वुमेन लीडरशिप की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में राष्‍ट्रपति से लेकर वित्‍त मंत्री तक का पद महिलाएं पूरी जिम्‍मेदारी से निभा रही हैं. उन्‍होंने कहा, "पंचायती राज संस्थाएं भी हमारे देश में महिला लीडरशिप का बेहतरीन उदाहरण हैं. आज भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय सरकारी निकायों में सफलतापूर्वक कार्यरत हैं. लगभग 21 राज्यों में पंचायतों में उनकी भागीदारी लगभग 50% तक पहुंच गई है. हमारे देश में महिलाओं ने राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक के प्रतिष्ठित पदों पर रहकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है. आज भी राष्ट्रपति और वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन महिलाएं कर रही हैं, जिससे देश का गौरव और भी बढ़ रहा है. राजनीति और सामाजिक जीवन में लाखों महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी विश्व के महानतम नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए भी आश्चर्य का विषय है. इससे भारत का गौरव और भी बढ़ जाता है. अनेक अध्ययनों से पता चला है कि निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से व्यवस्थाओं में संवेदनशीलता भी बढ़ती है."

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लेखक के बारे में
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अखिलेश शर्मा
Executive Editor, NDTV India
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