शनिवार शाम दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने फिर से आधा खाली दिखने वाले ग्लास का जिक्र किया. पीएम मोदी ने 13 साल पहले भी SRCC के मंच से आधा खाली दिखने वाले ग्लास का उदाहरण देते हुए भारत बदलने की चाहत का जिक्र किया था. शनिवार को पीएम मोदी ने SRCC के शताब्दी समारोह में अपने पुराने भाषण को याद करते हुए कहा, "मैंने पानी के ग्लास का उदाहरण दिया था और उस पर तीन नजरिए बताए थे. वह ऐसा समय था जब देश में बहुत नकारात्मकता थी. उस समय मैंने कहा था कि मुझे ग्लास भरा हुआ दिखता है - आधा पानी से और आधा हवा से."
पीएम मोदी ने खुद कहा- 2013 के भाषण पर फिर हो रही चर्चा
PM मोदी ने आगे कहा कि 2013 के उस भाषण पर अब फिर से चर्चा हो रही है. उस भाषण का असर आज भी महसूस किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि भले ही उस समय हम विपक्ष में थे. लेकिन मैंने तब जो कुछ भी कहा, पूरे यकीन के साथ कहा और उसी रास्ते पर चला."
Delighted to join the centenary celebrations of Shri Ram College of Commerce. Over the years, this institution has given generations of students the opportunity to learn, grow and make a difference.@SRCCOfficial
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
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पीएम मोदी ने कहा, "लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं. उस समय आपके स्थानों पर यहां आपके सीनियर बैठे थे. मैं तब देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का सदस्य भी था. उस समय सभी लोग यह उम्मीद कर रहे थे कि मैं तब की केंद्र सरकार पर आरोप लगाऊंगा, लेकिन मैंने तत्कालीन सरकार का आलोचक होने के बावजूद इस मंच का उपयोग नहीं किया था. मैंने एक विजन रखा था और सकारात्मक बात कही थी. मैं उस रास्ते पर ही चलता रहा हूं."
तब बतौर गुजरात सीएम शामिल हुए थे मोदी
13 साल पहले 6 फरवरी 2013 इसी जगह पर दिए गए एक भाषण ने उन्हें BJP के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने का काम किया था. तब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे. लेकिन SRCC में दिए मोदी के भाषण ने उनकी छवि को बदलने का काम किया था.
शनिवार को पीएम मोदी का SRCC में दिए भाषण का बड़ा हिस्सा 2013 के भारत और देश की मौजूदा स्थिति के बीच अंतर पर केंद्रित था. उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के विजन पर भी बात की.

2013 में आधा ग्लास पर पीएम मोदी ने दिया था 'तीसरा नजरिया'
उन्होंने अपने भाषण में ग्लास का 'तीसरा नजरिया' वाला तर्क भी दिया था. छात्रों को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा था कि एक ही चीज को देखने के अलग नजरिए होते हैं. आशावादी को ग्लास आधा भरा दिखता है, निराशावादी को आधा खाली. लेकिन मेरा एक तीसरा नजरिया है— "ग्लास आधा पानी और आधा हवा से भरा है. इसी सकारात्मक ऊर्जा से निराशा का माहौल बदला जा सकता है."
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