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'साफे को हेलमेट मत मान लेना'; सेवा यात्रियों से बोले पीएम मोदी, भारत को किताबों से नहीं, गांव-गांव घूमकर समझें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा कर रहे सेवा यात्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया. उन्होंने सेवा, सामाजिक सुधार, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझने के महत्व पर जोर दिया.

'साफे को हेलमेट मत मान लेना'; सेवा यात्रियों से बोले पीएम मोदी, भारत को किताबों से नहीं, गांव-गांव घूमकर समझें
वडनगर से वाराणसी जा रहे सेवा यात्रियों से पीएम मोदी का संवाद, सेवा और समाज सुधार का दिया संदेश
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  • वडनगर से वाराणसी जा रहे सेवा यात्रियों से पीएम मोदी का संवाद, सेवा और समाज सुधार का दिया संदेश
  • ‘सरकारी योजनाएं सिर्फ खर्च नहीं, किसी की नई जिंदगी की शुरुआत होती हैं’: पीएम मोदी
  • हेलमेट पहनने की सलाह से लेकर समाज सुधार तक, सेवा यात्रियों से पीएम मोदी की खास बातचीत
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा पर निकले ‘सेवा यात्रियों' से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया और सेवा, समाज सुधार तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के महत्व पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा और कलश यात्रा के दौरान मिलने वाले अनुभव जीवनभर की पूंजी बनेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता, गांवों की संस्कृति और लोगों की सेवा भावना को करीब से समझना किसी भी पुस्तक से कहीं बड़ा अनुभव है. उन्होंने सुरक्षा, सामाजिक सुधार और जनसेवा को राजनीतिक कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता बताया.

‘यह यात्रा आपके जीवन में नई ऊर्जा भरेगी'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा यात्रा में शामिल लोगों से बातचीत के दौरान कहा, 'सेवा संकल्प यात्रा में जो अनुभव आपको मिल रहे हैं ये सचमुच में अमूल्य हैं आपकी पूरी जीवन यात्रा में ये यात्राएं एक नई ऊर्जा भर देगी और लोगों के बीच जाना और उनसे जुड़ने उसमें अपने आपको ढाल देना ये अपने आप में एक अद्भूत अनुभव होता है और अलग-अलग प्रदेश के गांवों में आप जब जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि भारत कितना भव्य, विशाल है ये सब आप किताबों में नहीं समझेंगे जो आप इस यात्रा में देख सकते हैं.'

भारत की विविधता को करीब से देखने का अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं, अलग खानपान और अलग जीवनशैली देखने को मिलती है. उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों के माध्यम से यह समझ आता है कि समाज किस तरह एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ता है. 'हम स्वयं तो केवल निमित्त मात्र हैं, लेकिन समाज के लोग जो अद्भुत योगदान देते हैं, उनकी कहानियां सुनकर और उनके कार्यों को देखकर हमें नई ऊर्जा मिलती है.' उन्होंने सेवा यात्रियों से कहा कि इस पूरे अनुभव को पूरी तरह जीना चाहिए क्योंकि यह जीवन की एक बड़ी पूंजी है.

पगड़ी और हेलमेट पर मजेदार अंदाज में दी सलाह

संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों की ओर से पहनी गई भगवा पगड़ियों का भी जिक्र किया. उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, 'आप सबने केसरिया साफा पहना है, क्या यह गांव वालों ने आपको भेंट किया है? गांव वालों ने आपका इतना आत्मीय स्वागत किया, इसके लिए मैं उन्हें प्रणाम करता हूं.' इसके बाद उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'लेकिन बाइक चलाते समय आप यह साफा पहनकर तो नहीं चलते होंगे? हेलमेट पहनते होंगे ना? साफा को हेलमेट मत समझ लेना.'

‘सरकारी योजना जब किसी का जीवन बदलती है, तब असली संतोष मिलता है'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'जब योजनाएं बनती है तो कभी-कभी लगता है कि सरकारें हैं तो योजनाएं बना दी. लेकिन जब योजना से जब किसी भी जिंदगी बदल जाती है किसी के जीवन में एक नई जिंदगी आ जाती है तो कितना संतोष मिलता है ये आपने अनुभव किया होगा इसलिए सेवा यात्रियों के लिए ये भी एक प्रशिक्षण हैं कि सरकारे की योजनाएं सिर्फ पैसे खर्च करना नहीं होता है अगर वो योजना आखिरी व्यक्ति तक पहुंचती है. तो उसके लिए एक नया जीवन शुरू हो जाता है उसका संतोष बहुत अद्भुत है.'

महात्मा गांधी का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के जीवन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि 'जब हम गांधी जी के जीवन की ओर देखते हैं, तो वे अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने और आजादी का आंदोलन चलाने के साथ-साथ एक बड़े सामाजिक सुधारक भी थे. समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ उन्होंने हमेशा काम किया. इसलिए हमें भी समाज में निरंतर सुधार और सकारात्मक परिवर्तन के लिए काम करते रहना चाहिए, केवल वोटबैंक की राजनीति के लिए नहीं. जो सेवा करता है, उस सेवा का सम्मान होना चाहिए. प्रयागराज में जो सफाई का काम करते थे, जिसके कारण हमारा कुंभ पूरी दुनिया में स्वच्छता के लिए मशहूर हो गया था, भारत की इज्जत बढ़ गई थी. तो मेरा मन किया कि जिन्होंने भारत की इज्जत को इतना बढ़ाया है, मैं उनके पैर धोकर के आशीर्वाद लूंगा, इसीलिए मैं उनका पैर धोकर उन्हें सम्मान दिया, क्योंकि उन्होंने दुनिया में भारत का मान बढ़ाया.'

सफाईकर्मियों के सम्मान पर दिया जोर

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सफाई कार्य से जुड़े लोगों के सम्मान की बात कही. उन्होंने कहा कि समाज के लिए सफाईकर्मी जो सेवा करते हैं, उसका सम्मान होना चाहिए और हर परिवार में उनके प्रति सम्मान की भावना विकसित की जानी चाहिए. 'हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सफाई कार्य में लगे हमारे भाई-बहनों को सम्मान और गरिमा मिले. समाज के लिए उनकी सेवा अत्यंत महत्वपूर्ण है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए.'

'चरैवति-चरैवति-चरैवति का मंत्र'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म-जयंती भी है. पंडित दीनदयाल जी चरैवति-चरैवति-चरैवति के मंत्र का हमें हमेशा संदेश देते रहे, अपने जीवन से देते रहे। वे स्वयं अविरत यात्री थे. एक सेवा यात्री के रूप में निरंतर चलते रहना ही हमारा ध्येय है और इसमें हमें बहुत बड़ी प्रेरणा पंडित दीनदयाल जी से मिलती है. पंडित दीनदयाल जी भारतीय राजनीति के उन महान व्यक्तित्वों में रहे हैं, जिन्होंने भारत को विदेशी चश्में से देखने के बजाय स्वदेशी विजन दिया है. उन्होंने सेवा के संस्कार को नए सिरे से गढ़ा. उनके एकात्म मानव दर्शन में सेवा का वो स्वरूप है जिसे बीजेपी के हर कार्यकर्ता, बीजेपी की हर सरकार को हमेशा प्रेरित करता है.'

सेवा, समाज और राष्ट्र निर्माण का संदेश

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से समाज के बीच निरंतर कार्य करते रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सेवा, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के माध्यम से ही मजबूत समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है. वडनगर से वाराणसी तक निकली यह सेवा यात्रा केवल एक बाइक यात्रा नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और भारत की विविधता को समझने का एक अभियान है.

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