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भारत से ऐसे जुड़ी हैं जापान की जड़ें, ये है दोनों देशों के बीच रिश्तों की पूरी कहानी

India-Japan Relationship: भारत और जापान के संबंधों को लेकर नेचुरल पार्टनशिप शब्द का इस्तेमाल होता है. दोनों देशों का ये रिश्ता कुछ दशक नहीं बल्कि 1400 साल पुराना है.

भारत से ऐसे जुड़ी हैं जापान की जड़ें, ये है दोनों देशों के बीच रिश्तों की पूरी कहानी
जापान और भारत के रिश्तों की पूरी कहानी
  • भारत और जापान के रिश्ते लगभग 1400 साल से चले आ रहे हैं और बौद्ध धर्म के प्रचार से जुड़े हैं
  • हर मुश्किल वक्त में भारत और जापान एक दूसरे के साथ खड़े नजर आए
  • पिछले कुछ सालों में भारत-जापान के बीच व्यापार अपने नए स्तर पर पहुंचा है
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PM Modi Japan Visit: पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन की जापान यात्रा पर हैं, जहां वो भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. जापान पहुंचने के बाद टोक्यो एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया गया. यहां सुरक्षा और व्यावसायिक समझौतों समेत दोनों देशों के बीच तमाम मुद्दों पर बातचीत होगी. पिछले तमाम दशकों में भारत और जापान के रिश्ते काफी मजबूत रहे हैं और दोनों देशों ने हमेशा एक दूसरे का साथ दिया है. आज हम आपको इस 1400 साल पुराने रिश्ते के बारे में बताएंगे और जापान और भारत संबंधों की हर वो बात बताएंगे, जिनसे काफी कम लोग वाकिफ हैं.

भारत से कैसे जुड़ी हैं जापान की जड़ें

भारत और जापान के संबंधों को लेकर नेचुरल पार्टनशिप शब्द का इस्तेमाल होता है. दोनों देशों का ये रिश्ता कुछ दशक नहीं बल्कि 1400 साल पुराना है. बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार भारत से ही जापान गया था. जापान के लोग अब भी भारत को अपना धार्मिक आधार वाला देश मानते हैं. भारत के मदुरई से बोधिसेना नाम के बौद्ध गुरु 736 ईस्वी में जापान पहुंचे थे, जिन्होंने वहां बौद्ध धर्म को फैलाने का काम किया और यहां बुद्धिज्म की जड़ें मजबूत हुईं. आज जापान में शिंतो धर्म के बाद बौद्ध धर्म को मानने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है.

इन चीजों में एक जैसे हैं भारत और जापान

  • खाने से पहले प्रार्थना करना दोनों ही देशों में शुभ माना जाता है
  • दोनों ही देश काफी पुराने दौर से योग की ताकत को अच्छी तरह से समझते हैं
  • घर या मंदिर में घुसने से पहले दरवाजे पर जूते उतारना
  • जापान को लोग भी भारत के लोगों की तरह कई भगवानों को मानते हैं
  • जापान में जिन भगवानों की पूजा होती है, उनमें ज्यादातर भारतीय हैं

जब भारत को जापान के हमले का था डर

जब भारत अंग्रेजों से आजाद होने के लिए पूरे जोर से लड़ाई लड़ रहा था, उस वक्त जापान भी भारत की तरफ लगातार कदम बढ़ा रहा था. तमाम बड़े नेताओं को डर था कि जापान भारत पर हमला कर सकता है. क्योंकि जापानी सेना के सामने दक्षिणी-पूर्व एशिया में अंग्रेज सेना लगातार घुटने टेक रही थी, ऐसे में जापान भारत में मौजूद अंग्रेजी हुकूमत पर हमला कर कब्जा कर सकता था. नेताओं को डर था कि अंग्रेजों के लंबे शासन के बाद कहीं अब भारत पर जापान का राज न हो. इस डर के चलते भारत छोड़ो आंदोलन और तेज हो गया और अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने की शुरुआत हुई.

सुभाष चंद्र बोस ने मांगी मदद

इस दौरान 1943 में सुभाष चंद्र बोस जापान गए और उन्होंने वहां प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो से मुलाकात की, इस दौरान जापान के पीएम बोस की बुद्धिमत्ता और उनकी सोच से काफी प्रभावित हुए. इसके बाद उन्होंने वादा किया कि जापान की सेना भारत की आजादी में मदद करेगी. जापानी सेना की मदद से आजाद हिंद फौज ने कई जगह अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किए, जिसने ब्रिटिश हुकूमत पर बड़ा डेंट लगाने का काम किया और कुछ साल बाद भारत को आजादी मिली.

भारत ने दिया पूरा साथ

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान ने दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी देखी, जब उसके दो बड़े शहरों पर अमेरिका ने परमाणु बम गिरा दिए. इसके बाद जापान से दुनिया के बाकी देशों ने किनारा कर लिया था, लेकिन भारत ने उसे एशियन गेम्स का न्योता देकर बड़ी राहत दी. साल 1951 एशियन गेम्स की मेजबानी करते हुए भारत की तरफ से जापान को न्योता दिया गया. 

  • भारत के हाथ बढ़ाए जाने का नतीजा ये हुआ कि 1952 में ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध बनने लगे. 
  • इसके बाद 1958 में जापान की तरफ से भारत को आर्थिक मदद मिली और ये सिलसिला लगातार चलता रहा. 
  • भारत ने जब 1998 में परमाणु हथियारों का परीक्षण किया तो दुनियाभर के देशों ने भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाए, जिनमें जापान भी शामिल था. 
  • जापान हमेशा से ही परमाणु हथियारों के खिलाफ रहा है, इसीलिए उसने 1998 से लेकर 2000 तक भारत पर प्रतिबंध लगाए रखे. इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट देखी गई. 
  • करीब दो साल बाद भारत और जापान के रिश्तों में पड़ी ये गांठ खुल गई और ग्लोबल पार्टनरशिप की शुरुआत हुई. 
  • साल 2006 से शिंजो आबे ने जापान की सत्ता संभालने के बाद से ही भारत को तवज्जो देनी शुरू कर दी और दोनों देशों के रिश्तों में गहराई आती रही. 
  • शिंजो आबे ने 2007 में भारत यात्रा की और भारत की संसद को भी संबोधित किया. इसके बाद वो तीन बार (2014, 2015, 2017) भारत दौरे पर आए.
  • नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही शिंजो आबे के साथ उनकी दोस्ती खूब देखी गई. पीएम मोदी भी अब तक 7 बार जापान की यात्रा कर चुके हैं. अब ये उनका 8वां दौरा है. 

भारत-जापान में कूटनीतिक संबंध

  • भारत और जापान QUAD देशों का हिस्सा हैं
  • दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के G-4 देशों में भी साथ बैठते हैं
  • जापान भारत में अगले 10 सालों में 68 अरब डॉलर का निवेश करेगा 
  • भारत में 1400 से ज्यादा जापान की कंपनियां हैं
  • टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और स्टार्टअप्स को लेकर दोनों देशों का सहयोग
  • ऑटो सेक्टर और सेमीकंडक्टर पर भी काम

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