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This Article is From Jan 02, 2026

Zomato-Blinkit 10 मिनट डिलीवरी का सच: क्या डिलीवरी बॉयज पर होता है दबाव? CEO दीपिंदर गोयल ने खुद किया बड़ा खुलासा

एक तरफ जहां 31 दिसंबर को देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल की चर्चा थी, वहीं दूसरी तरफ Zomato और ब्लिंकिट ने रिकॉर्ड तोड़ ऑर्डर पूरे किए. इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या 10 मिनट में सामान पहुंचाना डिलीवरी पार्टनर्स के लिए जानलेवा है?

Zomato-Blinkit 10 मिनट डिलीवरी का सच: क्या डिलीवरी बॉयज पर होता है दबाव? CEO दीपिंदर गोयल ने खुद किया बड़ा खुलासा
Gig Workers Strike :गिग यूनियनों का आरोप है कि डिलीवरी पार्टनर्स पर ज्यादा काम का दबाव है और कमाई घट रही है.
नई दिल्ली:

नए साल से ठीक पहले जब देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल की चर्चा तेज थी, उसी दिन Zomato और Blinkit पर रिकॉर्ड तोड़ डिलीवरी हुई. 10 मिनट की डिलीवरी को लेकर सुरक्षा और शोषण के सवाल फिर उठे. इन तमाम आरोपों और आशंकाओं पर अब जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल ने खुद चुप्पी तोड़ी है Zomato के सीईओ दीपिंदर गोयल ने X प्लेटफॉर्म के जरिये साफ कहा कि यह रफ्तार डिलीवरी पार्टनर्स पर दबाव से नहीं, बल्कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम डिजाइन से आती है. 

ऐसे में सवाल यही है कि क्या वाकई 10 मिनट की डिलीवरी असुरक्षित है, या इसे लेकर गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं?

10 मिनट की डिलीवरी कैसे होती है? 

दीपिंदर गोयल के मुताबिक, 10 मिनट की डिलीवरी का मतलब यह नहीं कि डिलीवरी पार्टनर तेज गाड़ी चलाने को मजबूर होते हैं. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से हमारे स्टोर नेटवर्क और टेक्नोलॉजी का कमाल है. यह मॉडल लोगों के घरों के पास बने छोटे-छोटे स्टोर्स की वजह से काम करता है. ऑर्डर मिलने के बाद सामान करीब 2.5 मिनट में पैक हो जाता है और डिलीवरी पार्टनर औसतन 2 किलोमीटर से भी कम दूरी तय करता है. इस दौरान उनकी एवरेज स्पीड करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, जो किसी भी तरह से खतरनाक नहीं मानी जा सकती.

क्या डिलीवरी पार्टनर्स पर समय का दबाव होता है? 

सीईओ ने यह भी साफ किया कि डिलीवरी पार्टनर्स को ऐप पर यह नहीं दिखता कि ग्राहक को कितने मिनट में डिलीवरी का वादा किया गया है. यानी उनके सामने कोई टाइमर नहीं होता. अगर किसी वजह से डिलीवरी में देरी हो जाए, तो इसके लिए उन्हें सजा या जुर्माना नहीं दिया जाता. कंपनी समझती है कि ट्रैफिक, मौसम या अन्य कारणों से देरी हो सकती है.

इंश्योरेंस और मेडिकल सुविधा का क्या है सच?

गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर गोयल ने कहा कि सभी डिलीवरी पार्टनर्स को मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस कवर मिलता है. हादसे या हेल्थ से जुड़ी किसी भी समस्या में उन्हें यह सुरक्षा दी जाती है. यह दावा गलत है कि गिग वर्कर्स को कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती.

हड़ताल के बीच रिकॉर्ड डिलीवरी 

31 दिसंबर को गिग वर्कर्स की हड़ताल के ऐलान के बावजूद Zomato और Blinkit ने एक ही दिन में 75 लाख से ज्यादा ऑर्डर पूरे किए. करीब 4.5 लाख डिलीवरी पार्टनर्स ने 63 लाख से ज्यादा ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचाईं. गोयल के मुताबिक, अगर यह सिस्टम सच में गलत या लोगों के साथ शोषण करने वाला होता, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग अपनी मर्जी से इसमें काम ही नहीं करते.

Zomato का कहना है कि गिग वर्क को स्थायी करियर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. यह एक अस्थायी काम है, जिसे लोग कुछ महीनों के लिए करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं. कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, सालाना करीब 65% डिलीवरी पार्टनर्स इस काम से बाहर हो जाते हैं, जो इसे “गिग” जॉब साबित करता है.

गिग इकॉनमी पर बढ़ती बहस 

गिग यूनियनों का आरोप है कि डिलीवरी पार्टनर्स पर ज्यादा काम का दबाव है और कमाई घट रही है. कंपनियों का कहना है कि गिग वर्क भारत में रोजगार देने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है. गोयल भी मानते हैं कि सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, लेकिन इसे बेहतर बनाने पर लगातार काम हो रहा है.

10 मिनट की डिलीवरी को लेकर बहस जारी है, लेकिन कंपनी का पक्ष यही है कि यह रफ्तार इंसानों की नहीं, सिस्टम की है. असली तस्वीर जानने का शायद सबसे बेहतर तरीका यही होगा कि अगली डिलीवरी पर आप खुद अपने डिलीवरी पार्टनर से बात करें.

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