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CJI के भाई को किया फोन, SC के आदेश पर उठाए सवाल; भड़कते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा- 'हिम्मत कैसे हुई?'

एक मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आदेश पास किया तो एक शख्स ने उनके भाई को फोन लगा दिया. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत भड़क गए और उन्होंने फोन करने वाले के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी.

CJI के भाई को किया फोन, SC के आदेश पर उठाए सवाल; भड़कते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा- 'हिम्मत कैसे हुई?'
सीजेआई सूर्यकांत. (फाइल फोटो)
IANS
  • एक व्यक्ति ने सीजेआई के भाई को फोन कर उनके आदेश पर सवाल उठाया था, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया
  • हरियाणा के निखिल और एकता पुनिया ने बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल में दाखिले की मांग की थी।
  • कोर्ट ने पुनिया भाई-बहन की याचिका को खारिज करते हुए इसे सिस्टम का दुरुपयोग बताया और फ्रॉड करार दिया।
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ दिन पहले एक आदेश जारी किया था, जिसके बाद एक शख्स ने उनके ही भाई को फोन कर डाला और पूछ लिया कि सीजेआई ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकते हैं? इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हरियाणा सरकार के वकील को कड़ी फटकार लगाई है. उन्होंने इस मामले में अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. 

हरियाणा सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस बात का खुलासा किया. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'किसी ने मेरे भाई को फोन किया और पूछा कि मैंने ऐसा आदेश कैसे पारिस किया? उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?'

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'उसकी हिम्मत कैसे हुई?'

इस मामले में नाराजगी जताते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सीधे हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील से बात की और इसमें शामिल व्यक्ति के बर्ताव पर सवाल उठाया.

सीजेआई ने कहा, 'उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई को फोन करने की और यह पूछने की कि CJI ने आदेश कैसे पारित किया? क्या अब वह मुझे डिक्टेट करेगा? आपको इसकी पुष्टि करनी चाहिए और एक वकील के तौर पर आपको सबसे पहले इस मामले से हट जाना चाहिए.'

उन्होंने आगे सख्त चेतावनी देते हुए कहा, 'भले ही वह भारत के बाहर कहीं भी छिपा हो. मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है. दोबारा कभी ऐसी कोशिश मत करना. मैं पिछले 23 सालों से ऐसे लोगों से निपटता आ रहा हूं.'

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क्या था पूरा मामला?

हरियाणा के भाई-बहन निखिल पुनिया और एकता पुनिया ने PG मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के तहत लाभ की मांग की थी. भाई-बहन ने दावा किया था कि बौद्ध धर्म अपनाने के बाद वे अल्पसंख्यकों को मिलने वाले लाभ के लिए पात्र हैं. 

इस मामले में कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के सिलसिले में गाइडलाइंस जारी करने का निर्देश दिया था. मामले पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने इस मामले को सिस्टम का दुरुपयोग बताया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, 'यह एक नए तरह का फ्रॉड है. हमें और ज्यादा कहने पर मजबूर मत करो.'

अदालत ने सवाल उठाया था कि पुनिया जाट समुदाय के उम्मीद हैं, जिन्हें सामान्य कैटेगरी में रखा जाता है. ऐसे में उन्हें अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र कैसे मिल सकता है. कोर्ट ने भाई-बहन की याचिका को खारिज कर दिया था. चीफ जस्टिस ने कहा था, 'आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं. आप सबसे समृद्ध समुदायों में से एक से आते हैं. अपनी योग्यता पर गर्व कीजिए.'

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी धर्मांतरण के समय को लेकर संदेह जाहिर किया था. उन्होंने कहा था, 'क्या वे परीक्षा से ठीक पहले बौद्ध बन गए थे?' उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा था कि ऐसे सर्टिफिकेट कैसे जारी किए गए? 

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सर्टिफिकेट के बाद भी नहीं मिला था एडमिशन

मेरठ में सुभारती मेडिकल कॉलेज एक बौद्ध अल्पसंख्यक संस्थान हैं, जिसे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) से मान्यता मिली है. हरियाणा के हिसार में रहने वाले कृष्ण पुनिया के बच्चे नितिन और एकता पुनिया को सब-डिविजनल ऑफिसर (सिविल) से बौद्ध अल्पसंख्यक सर्टिफिकेट मिल गया था. लेकिन वे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाए थे.

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