संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. सत्र के समापन पर राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही को लेकर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि लगातार अव्यवस्था और व्यवधान के कारण सदन का बहुमूल्य समय नष्ट हुआ और राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकी.
25 दिनों में सिर्फ 19 बैठकें, सीमित रहा विधायी कामकाज
सत्र के दौरान 25 दिनों की अवधि में कुल 19 बैठकें हुईं. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का असर कामकाज पर भी पड़ा. राज्यसभा में केवल 12 विधेयकों पर विचार हो सका और उन्हें पारित या लोकसभा को वापस भेजा जा सका. राज्यसभा सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार सदन की कार्यवाही केवल 37 घंटे 49 मिनट ही चल सकी. इस तरह राज्यसभा की उत्पादकता 39.17 प्रतिशत रही. वहीं लोकसभा की उत्पादकता इससे भी कम, लगभग 19 प्रतिशत दर्ज की गई.
सवाल पूछने और मुद्दे उठाने के अवसर भी रहे सीमित
इस सत्र में 285 तारांकित प्रश्न, 380 शून्यकाल प्रस्तुतियां और 380 विशेष उल्लेख उठाने के अवसर उपलब्ध थे. लेकिन लगातार व्यवधान के कारण केवल 16 प्रश्न पूछे जा सके. इसी तरह 52 शून्यकाल प्रस्तुतियां और 93 विशेष उल्लेख ही सामने आ सके.
छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों पर बना रहा गतिरोध
पूरे सत्र के दौरान छात्र आंदोलन, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संसद का समय बर्बाद करने का आरोप लगाते रहे.
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि इस बार विपक्ष चर्चा से बचता दिखाई दिया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं है. वहीं केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "मैं राहुल गांधी जी से पूछना चाहता हूं कि झारखंड और पंजाब क्यों नहीं गए... क्या छात्र सिर्फ दिल्ली में हैं?"
विपक्ष ने सरकार को घेरा
किरेन रिजिजू के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, "किरेन रिजिजू बड़े अच्छे इंसान हैं. लेकिन जब इंसान के पास ब्रीफ गलत हो तो अच्छा से अच्छा इंसान फिसल जाता है. वो फिसल गए हैं."
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता लगभग 20 दिनों तक सदन में आकर विपक्ष के सवालों का सामना करने से बचते रहे. खड़गे ने कहा कि सत्र खत्म होने से ठीक पहले छात्र आंदोलन पर चर्चा की पेशकश केवल एक दिखावा थी.
विपक्ष ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि इस मानसून सत्र में चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश नहीं हो सके, जिसे उन्होंने विपक्ष की बड़ी उपलब्धि बताया. इनमें "एक राष्ट्र, एक चुनाव" विधेयक, "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान" विधेयक, संविधान (130वां संशोधन) विधेयक और एफसीआरए विधेयक शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन से जुड़ा विधेयक भी आगे नहीं बढ़ सका.
शीतकालीन सत्र से पहले बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधि
सत्र समाप्त होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं. इसी बीच "एक राष्ट्र, एक चुनाव" पर बनी संसद की संयुक्त समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी ने बताया कि 24 अगस्त को समिति की अगली बैठक होगी. उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र तक रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जाएगा और राज्यों में राजनीतिक सहमति बनाने पर विशेष जोर रहेगा.
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