संसद के मॉनसून सत्र में पूरे वक्त हंगामा ही बरपा रहा. 18 दिनों के सत्र में कुल 18 दिन भी कामकाज नहीं हो सका. यही नहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रिश्ते इतने कमजोर हो गए कि आखिर दिन लोकसभा स्पीकर की ओर से दी गई चाय पार्टी में भी विपक्ष ने शिरकत नहीं की. कांग्रेस के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी चाय पार्टी का बहिष्कार कर दिया. लेकिन इस दौरान विपक्ष में दोफाड़ भी दिखी. तमिलनाडु की पार्टी डीएमके ने बहिष्कार की बात को नहीं माना और पार्टी नेता कनिमोझी ने इसमें हिस्सा लिया.
कांग्रेस ने तमिलनाडु में विजय की पार्टी टीवीके का समर्थन किया है और सरकार में शामिल है. तब से ही दोनों दलों के बीच रिश्ते सहज नहीं हैं. इस बीच चाय पार्टी में भी यह दिख गया. चर्चा यह भी है कि परिसीमन विधेयक पर भी डीएमके ने सरकार को समर्थन का वादा किया है. गुरुवार को संसद सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में कामकाज नहीं हुआ. इस पर वंदे मातरम के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. इसके बाद स्पीतर ओम बिरला के ऑफिस में चाय पार्टी का आयोजन था. लेकिन कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष की चाय का बहिष्कार किया.
ये भी पढ़ें: 'दुखदायी है, हम इसकी जांच करेंगे', खरगे के मंच के 'शुद्धिकरण' पर बोले जेपी नड्डा; सदन में हंगामा
क्यों हो रही चाय पार्टी?
सत्र के समापन पर स्पीकर सभी दलों के सीनियर नेताओं को चाय पर आमंत्रित करते हैं. पूरे सत्र के दौरान जारी गतिरोध के मद्देनजर राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं ने स्पीकर की टी पार्टी में नहीं शामिल होने का फैसला किया. सूत्रों के मुताबिक संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल से स्पीकर की टी पार्टी में शामिल होने का आग्रह किया. लेकिन राहुल ने आग्रह स्वीकार नहीं किया और प्रियंका गांधी के साथ खरगे के दफ्तर में आ कर बैठ गए. कांग्रेस से कोई नहीं गया तो फिर समाजवादी पार्टी और टीएमसी के नेताओं ने भी चाय पार्टी में शिरकत नहीं की.
ये भी पढ़ें: 'राहुल गांधी देश का मजाक बनाते हैं, दुनिया सोच रही कैसा शख्स है ये', बीजेपी सांसद कंगना रनौत का हमला
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं