- विपक्ष को आशंका है कि सरकार मानसून सत्र में फिर से परिसीमन बिल पास कराने की कोशिश करेगी
- डीएमके ने इंडिया गठबंधन से अलग होकर लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की है
- डीएमके के 22 सांसद यदि सरकार के साथ हो जाते हैं तो एनडीए दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकता है
संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार और विपक्ष के बीच राजनीति की बिसात बिछने लगी है. विपक्ष को लगता है कि जिस तरह सरकार ने पिछले सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की कोशिश की थी, मगर उनकी एकता की वजह से वह पारित नहीं हो पाया था. इस बार मानसून सत्र में सरकार ये कोशिश फिर करेगी. विपक्ष को लगता है कि तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना उद्धव गुट में टूट की वजह से सरकार धीरे-धीरे दो तिहाई बहुमत की तरफ बढ़ रही है. यहीं पर इंडिया गठबंधन से अलग हुई डीएमके की एंट्री होती है. यदि डीएमके के 22 सांसद लोकसभा में सरकार के साथ चली जाए तो एनडीए दो तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगी.
बीजेपी के नेताओं को लगता है कि ये संभव है, क्योंकि डीएमके अब इंडिया गठबंधन से अलग है और उन्होंने लोकसभा तथा राज्यसभा में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए सीट की मांग की है, जिसे दोनों सदनों के सभापतियों ने स्वीकार कर लिया है. अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में डीएमके एनडीए का हिस्सा रह चुकी है.
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डीएमके को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा विपक्ष
सरकार के इस कदम को भांपते हुए विपक्ष की तरफ से डीएमके को अपने पाले में लाने की कवायद शुरू हो गई है. तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन का हिस्सा रही, वीसीके पार्टी के प्रमुख थिरूमावलवन ने कहा है कि भले ही टीवीके और डीएमके, तमिलनाडु में एक दूसरे के खिलाफ लड़ सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ एक साथ आ सकते हैं. हालांकि थिरूमावलवन की पार्टी वीसीके जो डीएमके गठबंधन का हिस्सा थी, अब उसका साथ छोड़कर टीवीके की सरकार में शामिल हो गई है. कांग्रेस ने भी तमिलनाडु में यही किया वो भी अब सरकार का हिस्सा है. इससे डीएमके नाराज हो कर इंडिया गठबंधन से अलग हो गई है.
इधर वीसीके प्रमुख थिरूमावलवन के इस बयान का तमिलनाडु की कांग्रेस सांसद जोथिमणि ने समर्थन किया है, उनका कहना है कि यहां बात डीएमके, कांग्रेस, टीवीके या वीसीके की नहीं हो रही है, यहां बात देश के भविष्य की है. पहले वोटर पार्टी का चयन करती थी, अब बीजेपी एसआईआर के जरिए वोटरों का चयन कर रही है, फिर परिसीमन बिल और उसके बाद एक देश एक चुनाव. इन सबसे देश को बचाने के लिए सबको साथ आना पड़ेगा. जोथिमणि डीएमके विरोधी मानी जाती रही हैं.

राष्ट्रीय मुद्दों पर इंडिया गठबंधन के साथ डीएमके- तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष
यही नहीं डीएमके के साथ विधानसभा चुनाव लड़ने का विरोध करने वाले और तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “17 अप्रैल को जब सरकार ने संसद में परिसीमन का बिल लाया था तो डीएमके ने इंडिया गठबंधन के साथ सरकार के खिलाफ वोट किया था और स्टालिन ने बिल की कॉपी जलाई थी. डीएमके की विचारधारा भी बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ है. डीएमके भी हमारे संविधान बचाओ और संघीय ढांचे को बचाने के हमारे मुहिम के साथ रही है और मुझे नहीं लगता है अप्रैल से लेकर अभी तक हालात में कोई बदलाव हुए हैं. राष्ट्रीय मुद्दों पर हमारा साथ रहा है और यह साथ रह सकता है.”

डीएमके ने कांग्रेस पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
परिसीमन बिल एक ऐसा मुद्दा है जिस पर डीएमके विपक्ष के खेमे में आ सकती है, लेकिन क्या ये इतना आसान है, क्योंकि थिरूमावलवन के बयान पर डीएमके की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. डीएमके अब सत्ता से बाहर है और किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए यह सबसे बड़ा दर्द होता है, दूसरा कांग्रेस का टीवीके के साथ जाने को डीएमके वादाखिलाफी या धोखा देने के रूप में देखती है. यही वजह है कि दोनों दलों के बीच खटास बनी हुई है. अब देखना है कि कांग्रेस और डीएमके के संबंधों के बीच रिश्तों में जो बर्फ जमी है, उसको पिघलाने में सबसे पहला कदम कौन रखता है. क्या यह सब इतना आसान होगा?
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