Parliament Monsoon Session 2026: मॉनसून सत्र के अब केवल दो सप्ताह बचे हैं. 10 बैठकें होनी हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन विधेयक लाएगी या नहीं?
संसद के गलियारों में इस महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर कोई हलचल नहीं है. सत्ता पक्ष खुल कर बोलने को तैयार नहीं. वहीं विपक्ष बेसब्री से सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहा है. हालांकि सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी खेमे में बड़े पैमाने पर तोड-फोड़ और दलबदल ने इन अटकलों को बढ़ावा दिया था कि सरकार मॉनसून सत्र में यह विधेयक ला सकती है.
सरकार ने उन बिलों को भी टालने का फैसला किया जिन पर विपक्षी खेमे में उसके संभावित सहयोगी दलों को आपत्ति थी. जैसे विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, जेल जाने पर पीएम, सीएम और मंत्री की कुर्सी छिनने वाला संविधान संशोधन विधेयक और एक देश एक चुनाव के लिए संविधान संशोधन विधेयक.
छात्रों के प्रदर्शन ने फेल किया सरकार का प्लान
लेकिन इस बीच नीट पेपर लीक पर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की रणनीति को गड़बड़ा दिया. इन प्रदर्शनों ने ऐसे दलों को खुलकर सरकार का विरोध करने पर मजबूर कर दिया जो परिसीमन के संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार का साथ दे सकते हैं. इनमें डीएमके और एनसीपी शरद पवार प्रमुख हैं. इनके तीस सांसदों का समर्थन मिलने से सरकार लोक सभा में दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के नजदीक पहुंच सकती है.
अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रहा विपक्ष
दूसरी और कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दल छात्र प्रदर्शन और श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने अपनी तोप का मुंह गृह मंत्री अमित शाह की ओर मोड़ दिया है. छात्रों पर पुलिस की ज्यादती के विरोध में अब वे शाह के इस्तीफे की मांग कर रही हैं.
अगले हफ्ते FCRA संशोधन बिल ला रही सरकार
इस बीच सरकार ने शोरगुल के बीच ही बिल पारित कराना शुरू कर दिया है. वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने वाले बिल पर विपक्ष ने वॉकआउट किया. लेकिन डीएमके ने चर्चा में भाग लेकर विरोध किया. वहीं जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक हंगामे के बीच बिना चर्चा के ही पारित करा लिया गया. अगले सप्ताह सरकार एफसीआरए संशोधन बिल ला रही है, जिसका विपक्ष तीखा विरोध कर रहा है.
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चर्चा टालने के लिए हंगामे की रणनीति होगी?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपने तीखे विरोध को आगे भी जारी रखने की योजना बना रही है. कांग्रेस जानती है कि सरकार दो तिहाई बहुमत के मुहाने पर पहुंच चुकी है. ऐसे में उसकी योजना संसद में हंगामे को लगातार बनाए रखने की हो सकती है ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण के संविधान संशोधन विधेयकों पर चर्चा का माहौल ही न बन सके.
गौरतलब है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए विशेष बहुमत चाहिए. इसके लिए कम से कम आधे सदस्यों की उपस्थिति और इसमें दो तिहाई बहुमत चाहिए. मतदान के समय सदन में शांति होनी आवश्यक है.
12 साल में पहली बार सरकार का बिल गिरा
दूसरी ओर सरकारी सूत्र यह इशारा दे चुके हैं कि दो तिहाई बहुमत के प्रति आश्वस्त होने के बाद ही सरकार यह बिल मॉनसून सत्र में लाएगी. अप्रैल में विशेष सत्र में सरकार यह बिल पारित नहीं करा सकी थी. पिछले बारह वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ था जब सरकार का कोई बिल गिरा. इससे उसकी किरकिरी हुई थी. हालांकि बीजेपी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया था और प बंगाल विधानसभा चुनाव में उसे इसका लाभ भी मिला.
'J&K और असम में जो हुआ वही पूरी देश में होगा'दूसरी ओर कांग्रेस परिसीमन विधेयक को लेकर आशंकित है. उसे लगता है कि बीजेपी इसके माध्यम से 2029 लोक सभा चुनाव के लिए जमीन मजबूत करना चाहती है. परिसीमन को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर बीजेपी अपने आधार के क्षेत्रों को मजबूत कर सकती है. इसे गेरीमैंडरिंग कहते हैं यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को ऐसे तय करना जिसमें सत्तारूढ़ दल को लाभ मिल सके. कांग्रेस के अनुसार, बीजेपी मे जम्मू-कश्मीर और असम में ऐसा ही किया और अब महिला आरक्षण के बहाने पूरे देश में यही करना चाहती है.
सरकार वेट एंड वॉच के मोड में हैशुक्रवार को कैबिनेट की बैठक के बाद पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अलग से करीब पंद्रह मिनट तक मुलाकात हुई. सरकार के आला सूत्रों का कहना है कि परिसीमन बिल के बारे में अभी पक्के तौर पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. अगले कुछ दिनों में सदन में क्या कुछ होता है, उसे देख कर ही तय होगा कि बिल लाया जाए या नहीं. सरकार तेल देखेगी और तेल की धार भी. यानी सरकार वेट एंड वॉच के मोड में है.
हालांकि जानकार कहते हैं कि अगर परिसीमन के आधार पर 2029 लोक सभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना है तो इसकी वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिक समय नहीं बचा है. अगर सरकार की मंशा अगला लोक सभा चुनाव 33% महिला आरक्षण के साथ कराना है तो उसे यह बिल जल्दी ही पारित कराना होगा.
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