Parliament Monsoon Session 2026: सोमवार 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. इनमें 2029 से महिलाओं को 33% आरक्षण देने और लोक सभा तथा विधानसभाओं के परिसीमन के बिल शामिल हैं. इस साल अप्रैल में सरकार ने इन्हें पारित कराने की कोशिश की थी लेकिन आवश्यक दो तिहाई बहुमत न होने के कारण यह पारित नहीं हो सका था. उसके बाद से ही सरकार ने दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशें की हैं जिनमें सफलता भी मिलती दिख रही है. इसके बावजूद सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन बिल तभी लाए जाएंगे जब सरकार संख्या बल को लेकर आश्वस्त होगा. वह पिछली बार की तरह अपनी फ़ज़ीहत नहीं कराना चाहती.
मानसून सत्र में सरकार का बड़ा प्लान
इस साल सत्रह अप्रैल को विशेष सत्र में सरकार लोक सभा और विधानसभाओं की सीटें बढ़ाने का संविधान संशोधन बिल पारित कराने में नाकाम रही थी. इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे. सूत्रों के मुताबिक़ उसी दिन सरकार के शीर्ष स्तर पर निर्णय किया गया था कि अब दो तिहाई बहुमत जुटाने का प्रयास किया जाएगा. प बंगाल में मिली बड़ी जीत ने यह काम आसान कर दिया. टीएमसी के बीस लोक सभा और तीन राज्य सभा सांसदों की टूट ने एनडीए को मज़बूत किया है. इसी तरह डीएमके का इंडिया ब्लॉक से रिश्ता टूट गया लिहाज़ा उसके 22 सांसदों का समर्थन जुटाने का प्रयास भी किया जा रहा है. वहीं एनसीपी शरद पवार के आठ सांसदों को भी एनडीए के पाले में लाने की कोशिश है. समाजवादी पार्टी के कुछ सांसदों पर भी डोरे डाले जा रहे हैं ताकि उन्हें मतदान के समय गैरहाजिर रहने को मनाया जा सके. हालांकि यूपी में छह महीने बाद ही होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह काम आसान नहीं है.
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ऐसे में सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि सरकार दो तिहाई के आंकड़े के प्रति आश्वस्त होने के बाद ही बिल दोबारा लाएगी. संविधान संशोधन पारित कराने के लिए विशेष बहुमत चाहिए जिसमें सदन के कम से कम आधे सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य है और उपस्थित सांसदों का दो तिहाई बहुमत चाहिए.
इन बिलों में सरकार कर सकती है बदलाव
इस बीच सरकार इन बिलों में बदलाव भी कर रही है. सूत्रों के अनुसार महिला कोटा और परिसीमन बिल के साथ ही जेल से सरकार नहीं के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं. तीस दिन से अधिक की हिरासत पर पीएम, सीएम और मंत्री की कुर्सी जाने वाले बिल पर बनी जेपीसी ने कई महत्वपूर्ण संशोधन सुझा कर विपक्ष की कुछ आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया है.
इसमें राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया गया है. राज्यों के बीच मौजूदा सीटों के अनुपात को सुरक्षित रखने के लिए, सरकार 1971 की जनगणना के आधार को बनाए रखना चाहती है. हालांकि, राज्यों के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को 2011 की जनगणना के आधार पर फिर से तय किया जा सकता है.
परिसीमन और महिला आरक्षण को एक साथ जोड़कर लाया जा सकता है प्रस्ताव
कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की संख्या में "जहां तक व्यावहारिक और व्यवहार्य हो, एक समान 50% की वृद्धि" का संदर्भ हो सकता है. इसे लागू करने के लिए सरकार वर्तमान में लोकसभा में लंबित परिसीमन विधेयक में संशोधन करने पर विचार कर रही है. इसी अनुपात में अनुसूचित जाति और जनजाति की सीटों में वृद्धि की जाएगी. इसमें महिलाओं को वर्टिकल आरक्षण दिया जाएगा. यानी अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में महिलाओं की 33% सीटें आरक्षित की जाएंगी.
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