Naeoero island story: दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदल लिया है. हम बात कर रहे हैं पैसिफिक आइलैंड के देश नाउरू की जिसे अब 'रिपब्लिक ऑफ नाओएरो' (Republic of Naoero) के नाम से जाना जाएगा. केवल 12 हजार लोगों की आबादी वाले इस देश के राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव देश की अपनी भाषा में नाम की स्पेलिंग और उच्चारण के हिसाब से किया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे जुड़े क्या फैसले लिए गए हैं और यह देश खास क्यों है?
क्या-क्या फैसले लिए गए हैं?
एपी की रिपोर्ट के अनुसार देश का इंटरनेशनल कोड NRU से बदलकर NRO हो जाएगा. अब यहां के लोगों को 'नाउरूअन' (Nauruan) के बजाय 'देई-नाओएरो' (dei-Naoero) कहा जाएगा. विदेश में इसे आम तौर पर 'नाउ-रू' कहा जाता है, लेकिन नए नाम का उच्चारण 'नाउ-एरो होगा.
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सरकार के फेसबुक अकाउंट पर पिछले गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया कि इस कदम से दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित यह दूर-दराज का द्वीप देश अपने पारंपरिक नाम पर वापस लौट आएगा. सरकार के एक पुराने बयान के अनुसार, देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'नाउरू' के नाम से इसलिए जाना जाने लगा क्योंकि विदेशियों के लिए इसका स्थानीय नाम बोलना मुश्किल था. यह नाम पसंद के बजाय सुविधा के कारण चुना गया था.
क्यों खास है यह देश?
12,000 निवासियों वाला नाउरू, आबादी के लिहाज से तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है. मूंगे और चूना-पत्थर से बने इस छोटे से द्वीप पर पहले जर्मनी का कब्जा था और बाद में ऑस्ट्रेलिया ने इसका प्रशासन संभाला. 1968 में यह एक स्वतंत्र गणराज्य बना. इस देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. 1970 के दशक में फॉस्फेट माइनिंग से द्वीप पर बहुत दौलत आई. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) के अनुसार, नाउरू के ज्यादातर हिस्से के नीचे फॉस्फेट के बड़े भंडार थे,जो हजारों सालों में पक्षियों की बीट जमा होने से बने थे. लेकिन बाद में यह इंडस्ट्री ठप हो गई. 1990 के दशक में नाउरू आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुंच गया.
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