विज्ञापन

सिर्फ 12 हजार आबादी वाले मुल्क ने बदला नाम, स्पेलिंग से था परेशान, कभी चिड़ियों की 'बीट' से हुआ था मालामाल

नाउरू आबादी के लिहाज से तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है. यहां की आबादी केवल 12 हजार लोगों की है.

सिर्फ 12 हजार आबादी वाले मुल्क ने बदला नाम,  स्पेलिंग से था परेशान, कभी चिड़ियों की 'बीट' से हुआ था मालामाल
दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने बदला अपना नाम

दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदल लिया है. हम बात कर रहे हैं पैसिफिक आइलैंड के देश नाउरू की जिसे अब 'रिपब्लिक ऑफ नाओएरो' (Republic of Naoero) के नाम से जाना जाएगा. केवल 12 हजार लोगों की आबादी वाले इस देश के राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव देश की अपनी भाषा में नाम की स्पेलिंग और उच्चारण के हिसाब से किया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे जुड़े क्या फैसले लिए गए हैं और यह देश खास क्यों है?

क्या-क्या फैसले लिए गए हैं?

एपी की रिपोर्ट के अनुसार देश का इंटरनेशनल कोड NRU से बदलकर NRO हो जाएगा. अब यहां के लोगों को 'नाउरूअन' (Nauruan) के बजाय 'देई-नाओएरो' (dei-Naoero) कहा जाएगा. विदेश में इसे आम तौर पर 'नाउ-रू' कहा जाता है, लेकिन नए नाम का उच्चारण 'नाउ-एरो होगा.

सरकार के फेसबुक अकाउंट पर पिछले गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया कि इस कदम से दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित यह दूर-दराज का द्वीप देश अपने पारंपरिक नाम पर वापस लौट आएगा. सरकार के एक पुराने बयान के अनुसार, देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'नाउरू' के नाम से इसलिए जाना जाने लगा क्योंकि विदेशियों के लिए इसका स्थानीय नाम बोलना मुश्किल था. यह नाम पसंद के बजाय सुविधा के कारण चुना गया था.

राष्ट्रपति डेविड एडांग ने जनवरी में संसद में यह प्रस्ताव रखते हुए कहा था, "इस प्रस्तावित बदलाव का मकसद हमारे देश की विरासत, हमारी भाषा और हमारी पहचान का बेहतर तरीके से सम्मान करना है." प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन को सांसदों ने जरूरी दो राउंड की वोटिंग में मंजूरी दे दी है. हालांकि यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि दस्तावेज में औपचारिक रूप से संशोधन किया गया है या नहीं.

क्यों खास है यह देश?

12,000 निवासियों वाला नाउरू, आबादी के लिहाज से तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है. मूंगे और चूना-पत्थर से बने इस छोटे से द्वीप पर पहले जर्मनी का कब्जा था और बाद में ऑस्ट्रेलिया ने इसका प्रशासन संभाला. 1968 में यह एक स्वतंत्र गणराज्य बना. इस देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. 1970 के दशक में फॉस्फेट माइनिंग से द्वीप पर बहुत दौलत आई. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) के अनुसार, नाउरू के ज्यादातर हिस्से के नीचे फॉस्फेट के बड़े भंडार थे,जो हजारों सालों में पक्षियों की बीट जमा होने से बने थे. लेकिन बाद में यह इंडस्ट्री ठप हो गई. 1990 के दशक में नाउरू आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुंच गया.

यह भी पढ़ें: वो देश जो पक्षियों की 'बीट' से रातोरात बन गया था दुनिया का सबसे अमीर मुल्क... आज कैसे हैं हालात?

यह भी पढ़ें: जंगल की आग में सुनाई दिए धमाके, बाद में पता चला- जमीन में दबे थे दूसरे विश्व युद्ध के हथियार

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nauru, Nauru Island, Nauru Richest Country
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com