हरियाणा के पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में 8 साल के लड़के के हमले में घायल हुई 6 साल की बच्ची को बुधवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. हमला करने वाले लड़के को भी छोड़ दिया गया है. लेकिन अब इस पूरे मामले में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. लापरवाही और किसी ने नहीं, बल्कि हरियाणा के बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने की है.
हुआ कि बच्ची से मिलने पहुंची तृप्ति श्योराण ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बच्ची की तस्वीरें डाल दीं. इससे पीड़ित बच्ची की पहचान उजागर हो गई. जबकि, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बच्ची की तस्वीरें और वीडियो हटाने का आदेश दिया था.
लेकिन अब तृप्ति श्योराण की ओर से ही सोशल मीडिया पर बच्ची की पहचान उजागर कर दी गई. इसके बाद उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
जिम्मेदार ही लापरवाह!
हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण का काम बच्चों के अधिकारों और उनकी निजता की रक्षा करना है.
लेकिन इसकी चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण के फेसबुक, इंस्टाग्राम पेज और स्टोरी पर ही पीड़ित बच्ची की तस्वीरें लगातार साझा किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
इतना ही नहीं, कानून भी इसकी इजाजत नहीं देता.
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 74 के तहत सोशल मीडिया या दूसरे प्लेटफॉर्म से ऐसी तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट नहीं डाल सकते, जिनसे किसी मामले में शामिल बच्चों की पहचान उजागर होने की आशंका है.
क्या है पूरा मामला?
28 अक्टूबर को पंचकूला के एक स्कूल में क्लासरूम के अंदर आठ साल के एक लड़के ने 6 साल की बच्ची पर हमला कर दिया था. इसमें बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी.
इसके बाद बच्ची को बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ के PGIMER में भर्ती कराया गया था. कई दिन तक चले इलाज के बाद 4 नवंबर को बच्ची को छुट्टी मिल गई थी.
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