हमारे देश में कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है. बस एक तय उम्र पार कर ली हो. अगर 25 साल के हैं तो विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. और अगर 21 साल के हो गए हैं तो पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं. लेकिन पंचायत चुनाव लड़ना विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तुलना में ज्यादा कठिन है. वह इसलिए क्योंकि पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शर्तें और कठिन हो जाती हैं.
अब हिमाचल प्रदेश की सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए एक शर्त और जोड़ दी है. इसके मुताबिक, अगर अब परिवार के किसी सदस्य ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया है तो उसकी बहू भी पंचायत का चुनाव नहीं लड़ सकेगी.
पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए हर राज्य में अलग-अलग शर्तें हैं. अब आप ये समझ लीजिए कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कोई मिनिमम एजुकेशन क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं है, लेकिन कई राज्यों में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए ये शर्त भी है.
चुनाव लड़ने के लिए क्या है शर्तें?
संविधान हर किसी को चुनाव लड़ने की छूट देता है. बस कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं. जैसे- लोकसभा के लिए 25 और राज्यसभा के लिए 30 साल और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए 35 साल की उम्र जरूरी है. जबकि, पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 21 साल की उम्र पूरा होना जरूरी है.
इसके अलावा, जो भी व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहता है वह भारत का नागरिक होना चाहिए और वह किसी भी सरकारी पद पर नहीं होना चाहिए. इसके अलावा, वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं होना चाहिए.
अगर आप इन शर्तों को पूरा करते हैं तो राष्ट्रपति से लेकर सांसद-विधायक तक का चुनाव लड़ सकते हैं. लेकिन पंचायत चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उसके लिए और भी कुछ शर्तें होती हैं.
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पंचायत चुनाव के लिए ज्यादा शर्तें क्यों?
जरूरी कानूनी उम्र पूरी कर ली हो, भारत के नागरिक हो और किसी सरकारी नौकरी में नहीं हो तो कोई भी चुनाव लड़ सकते हैं.
लेकिन पंचायत चुनाव में इनके अलावा और दूसरी शर्तें भी होती हैं. वह इसलिए क्योंकि पंचायत के चुनाव हर राज्य के पंचायती राज कानून के हिसाब से होते हैं. हर राज्य का अपना पंचायती राज कानून है और शर्तें.
कुछ राज्यों में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए एक मिनिमम एजुकेशन क्वालिफिकेशन पूरी करना जरूरी है. कुछ राज्यों में दो से ज्यादा बच्चों के माता या पिता चुनाव नहीं लड़ सकते. तो वहीं कुछ राज्यों में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए घर में टॉयलेट होना भी जरूरी है.
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किस राज्य में क्या-क्या शर्तें?
नवंबर 2023 में पंचायती राज मंत्रालय ने एक रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कई राज्य ऐसे हैं जहां पंचायत चुनाव लड़ने के लिए एक तय कक्षा तक पढ़ाई जरूरी है. उदाहरण के लिए हरियाणा में अगर सामान्य वर्ग का कोई उम्मीदवार पंचायत चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे 10वीं पास होना जरूरी है. उत्तराखंड में भी यही शर्त है.
इसी तरह कई राज्यों में दो से ज्यादा बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक है. राजस्थान पहला राज्य था जिसने सबसे पहले 1992 में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए टू-चाइल्ड पॉलिसी लागू की थी. हालांकि, 2019 में उसने इस शर्त को खत्म कर दिया. इसके बाद 1994 में हरियाणा और आंध्र प्रदेश ने भी यही शर्त लागू कर दी थी. पंचायती राज मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि 9 राज्यों में टू-चाइल्ड पॉलिसी लागू है.
इसके अलावा, कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पंचायत चुनाव वही लड़ सकता है जिसके घर में टॉयलेट बना होगा. गुजरात ने सबसे पहले 2015 में यह नियम बनाया था. इसके बाद 2015 में हरियाणा और 2016 में उत्तराखंड ने ये नियम बना दिया था. दमन-दीव और दादरा-नगर हवेली में भी 2020 में यह नियम बना दिया गया था.
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कब होते हैं पंचायत चुनाव?
भारत में पहली बार पंचायत चुनाव राजस्थान में हुए थे. अक्टूबर 1959 में नागौर में पहले पंचायत चुनाव हुए थे. फिर आंध्र प्रदेश ने भी उसी साल अक्टूबर में पंचायत चुनाव करवाए.
धीरे-धीरे कई राज्यों में पंचायत चुनाव होने लगे लेकिन इन्हें लेकर संविधान में कोई प्रावधान नहीं था. इस कारण पंचायत चुनाव अक्सर टाल दिए जाते थे. 1993 में संविधान संशोधन हुआ, ताकि हर 5 साल में पंचायत चुनाव हों.
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