- चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने SIR के दौरान 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज करवाईं.
- इस खुसाले के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त फिर से विवादों के केंद्र में आ गए हैं.
- हालांकि चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयुक्तों में असहमति के दावे का खंडन किया है.
चुनाव आयुक्तों में मतभेद वाली रिपोर्ट को लेकर बड़ा सियासी हंगामा शुरू हो गया है. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिवसेना सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इस रिपोर्ट को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए हैं. इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है. चुनाव आयोग ने एक पत्र जारी कर कहा कि ECI एक संवैधानिक संस्था है जो संविधान के अनुच्छेद 324, कानूनी नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के सख्त निर्देशों के तहत काम करती है. आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है. लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जाँच-पड़ताल और संतुलन मानक और निरंतर चलने वाली प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें पूरी पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और कामकाज में सख्ती सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है.
ECI के सभी काम कानूनों और आयोग के निर्देशों के अनुसार
ECI के सभी काम कानूनों और आयोग के निर्देशों के अनुसार रहे हैं. आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश, निर्णय और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह से कानूनी रूप से मान्य हैं और 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' के तहत स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं.
ड्राफ्टिंग के चरणों के दौरान आयोग के सदस्यों द्वारा उठाए गए किसी भी कामकाज से जुड़े सवाल या इनपुट, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की जाने वाली मानक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं. आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाने के लिए थे.

'विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य बात'
किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है. ये अंतिम निर्णय लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. न केवल तीन आयुक्त, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है.
'SIR सहित सभी पहले सर्वसम्मत निर्णय'
आयोग ने अपने जवाब में आगे कहा कि 10 महीनों की अवधि में कुछ खास आंतरिक नोट/टिप्पणियों को उजागर करना, और अन्य मंजूरियों, फैसलों और निर्देशों को नजरअंदाज करना स्थिति का केवल एक ही पहलू दिखाता है. हाल के महीनों में आयोग ने कई निर्णय लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और कई चुनावी सुधार किए हैं, जिनमें देश भर में मतदाता सूची संशोधन (SIR सहित) का संचालन शामिल है. ये सभी निर्णय पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं.
आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और इस अवधि के दौरान चुनाव से जुड़ी गतिविधियां सफलतापूर्वक आयोजित की हैं. इस काम में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और कामकाज से जुड़ी मशीनरी और आयोग की कई मंजूरियाँ और निर्देश शामिल थे.
ECINet जैसे कमीशन के डिजिटल प्लेटफॉर्म, बिना इजाज़त के छेड़छाड़ या बदलाव वगैरह को रोकने के लिए कड़े डेटा सुरक्षा नियमों के तहत काम करते हैं. IT सुरक्षा जांच और ऑडिट कंट्रोल, राष्ट्रीय डेटाबेस में लागू किए जाने वाले स्टैंडर्ड साइबर-सुरक्षा उपाय हैं. कानूनी अधिकारी, जिनमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और जिला चुनाव अधिकारी शामिल हैं, कानून के तहत रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने के लिए अपनी कानूनी शक्तियों के अनुसार काम करते हैं.
भारत का चुनाव आयोग हमारे लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका को समझते हुए, पूरी ईमानदारी के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
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