भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था अगर कोई है तो वह भारत ही है. सोमवार को 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के जो आंकड़े आए हैं, वह दिखाते हैं कि दुनियाभर में भले ही 'टॉक्सिक' माहौल क्यों न हो, लेकिन इंडियन इकोनॉमी 'धुरंधर' बनी हुई है.
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 7.8% रही. जबकि 2025-26 की पहली तिमाही में यह 6.9% थी. पहली तिमाही में ग्रोथ रेट RBI के अनुमान से भी कहीं ज्यादा रही. RBI ने पहली तिमाही में 7% ग्रोथ का अनुमान लगाया था.
हालांकि, पिछली तिमाही यानी जनवरी से मार्च में ग्रोथ रेट 8.6% रही थी. यह दिखाता है कि अमेरिका-ईरान जंग और बाजारों में उथल-पुथल का असर भारत की इकोनॉमी पर भी पड़ा.
कोविड से झटका लगा, लेकिन...
भारत की अर्थव्यवस्था हर साल तेजी से ग्रोथ कर रही है. 2012 से अब तक के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं.
बीते 15 साल में इंडियन इकोनॉमी को अगर झटका लगा भी है तो कोविड के समय लगा था. लेकिन वह ऐसा दौर था जिसमें पूरी दुनिया का कामकाज ठप हो गया था. 2020-21 वाल ही वह साल था, जब GDP ग्रोथ रेट निगेटिव में थी. उस साल ग्रोथ रेट में 5.8% की गिरावट आई थी. लेकिन भारत जल्द ही इससे उबर गया और अगले ही साल 2021-22 में 9.9% की तेजी आई.
कोविड के बाद हालात भले ही सुधर गए, लेकिन दुनियाभर का माहौल 'टॉक्सिक' बन गया. कोविड के बाद फरवरी 2022 में ही रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जंग शुरू कर दी. इस जंग ने दुनियाभर पर असर डाला, लेकिन उस साल भी 2022-23 में भारत की ग्रोथ रेट 7.5% रही.
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कितना भी 'टॉक्सिक' हो, हम 'धुरंधर' हैं
कोविड और रूस-यूक्रेन की जंग के बाद तो जैसे दुनिया में अनिश्चितता ही आ गई है. 2025 में डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति बने तो आते ही टैरिफ लगाने लगे.
ट्रंप ने भारत पर भी अपने टैरिफ थोपे. लेकिन इसका असर इंडियन इकोनॉमी पर दिखाई नहीं दिया. ट्रंप के टैरिफ के बावजूद 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की ग्रोथ रेट 6.9%, दूसरी तिमाही में 8.1%, तीसरी तिमाही में 7.7% और चौथी तिमाही में 8.6% रही. ओवरऑल 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.2% रही.
इसके बाद इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. उसके बाद से ही पश्चिम एशिया में संकट बना हुआ है. इस संकट के शुरू होने के बाद जो पहली तिमाही के आंकड़े आए हैं, वह 7.8% ग्रोथ का अनुमान लगाते हैं.
इससे पता चलता है कि दुनिया का माहौल 'टॉक्सिक' जरूर था, लेकिन इंडियन इकोनॉमी 'धुरंधर' बनी ही रही.
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सबसे तेज इकनॉमी
2026-27 की पहली तिमाही में इंडियन इकोनॉमी ने उम्मीद से भी कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है.
ईरान जंग से तेल-गैस की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई के दबाव और वैश्विक मांग कमजोर होने की आशंका थी. ऐसे में उम्मीद से बेहतर ग्रोथ से संकेत मिलता है कि बाहरी झटकों के बावजूद भारत की ग्रोथ रेट की रफ्तार अब तक कायम रही है.

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में चीन की ग्रोथ रेट 4.3% तो अमेरिका की 2.1%, जबकि यूके की 1.2% रही. वहीं, फ्रांस और जर्मनी की ग्रोथ रेट तो 1% से भी कम रही.
इन आंकड़ों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'दुनिया युद्ध में डूबी हुई है, चारों तरफ युद्ध की खबरें आ रही हैं, विश्व संकटों से घिरा हुआ है, आपूर्ति शृंखला पूरी तरह बाधित है और 2020 के कोविड काल से अब तक, कहीं पर भी स्थिरता नजर नहीं आ रही है. उसके बावजूद भी भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है.'
उन्होंने कहा, 'दूसरी तरफ भारत के भीतर भी निराशा की गर्त में डूबे लोग झूठ की गूंज और चारों तरफ निराशा फैलाने में लगे हैं. इन सारी चीजों को पार करके भी, उन सभी बातों को धता बताकर देश ने 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वद्धि दर हासिल की है.'
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद पहली तिमाही में ग्रोथ उम्मीद से बेहतर रही. यह अर्थव्यवस्था के मजबूत घरेलू पहलुओं और अनिश्चित दौर से निकल पाने की क्षमता को दिखाता है.
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