- कपिल सिब्बल ने कहा- CEC ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग में बहुमत का समर्थन नहीं है.
- कपिल सिब्बल ने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड किया जाए और बिहार समेत हालिया चुनाव रद्द हों.
- कपिल सिब्बल ने कहा- दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार फैसलों पर आपत्ति जताई.
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बुधवार को दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच बहुमत का समर्थन हासिल नहीं है. उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' यानी एसआईआर प्रोसेस और वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं में बदलाव से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा, "ऐसा लगता है कि इस देश में कुछ लोगों के पास अभी भी जमीर है. देखिए चुनाव आयोग में किस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं."
कपिल सिब्बल ने बीते दिनों को याद करते हुए कहा कि पहले चुनाव का एक ही मेंबर होता था लेकिन अब तीन सदस्य होते हैं. कोई भी फैसला मेजॉरिटी पर तय होता है. आज यह तय हो गया है कि मेजॉरिटी ज्ञानेश कुमार के साथ नहीं थी. ज्ञानेश कुमार अपनी मनमर्जी से फैसले करते रहे हैं. जोशी साहब और संधू साहब दोनों ने दस महीने में 14 बार ज्ञानेश कुमार के फैसलों का विरोध किया.
उन्होंने आगे कहा कि सारा सिस्टम सेंट्रलाइज कर दिया गया. ईआरओ को एक्सेस नहीं दिया गया. दोनों चुनाव आयुक्त फैसलों का विरोध करते रहे. गोवा का एक उदाहरण भी सामने आया, जहां ईआरओ ने 27 लोगों को सही वोटर बताया लेकिन उनका डेटा अपलोड नहीं होने दिया गया.
'अब तक 13 करोड़ नाम हटाए गए...'
कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सब कुछ चुनाव आयुक्त के प्रोसीजर के खिलाफ था. इसका मतलब यह हुआ कि ज्ञानेश कुमार के अधीन बैठा हुआ अधिकारी तय कर रहा है कि क्या होगा और क्या नहीं होगा. सारे फैसले मेजॉरिटी के आधार पर होने चाहिए लेकिन दो चुनाव आयुक्तों को नजरअंदाज किया गया.
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कपिल सिब्बल ने एक और उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, "फॉर्म-6 नए वोटर को भरना होता है और कहना होता है कि मैंने पहले कभी वोट नहीं किया. ऐसे में अगर किसी का नाम कट जाए, तो उसको यह फॉर्म भरते वक्त झूठ बोलना होगा कि उसने वोट नहीं किया है." कपिल सिब्बल ने कहा कि इस पर विरोध हुआ लेकिन इस पर भी सुनवाई नहीं हुई.
सिब्बल ने आरोप लगाया कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में बहुमत से वोटिंग के जरिए फैसले लिए जाने चाहिए थे. उन्होंने कहा, "फैसले बहुमत से होने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बाकी दो कमिश्नर इसके खिलाफ थे. यह कदम इसलिए उठाया गया, जिससे सिर्फ उन्हीं वोटर्स को रखा जा सके, जिन्हें वे चाहते थे और बाकी को हटा दिया जाए."
उन्होंने कहा, "अब तक 13 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं. हम रोजाना सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला उठाते हैं, लेकिन कोर्ट हमारी बात पर ध्यान नहीं देता. चुनाव आयोग भरोसेमंद नहीं है."
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'SIR प्रोसेस रोका जाए, बिहार चुनाव रद्द किया जाए...'
सिब्बल ने तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए और SIR प्रक्रिया को रोका जाए.
उन्होंने कहा, "ज्ञानेश कुमार को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए, इस प्रक्रिया को फौरन रोका जाना चाहिए और बिहार व अन्य जगहों पर हाल ही में हुए चुनावों को रद्द कर दिया जाना चाहिए."
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत, DMK प्रवक्ता TKS इलांगोवन, AAP नेता सौरभ भारद्वाज और CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संजय राउत ने कहा, "ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. इस देश में चुनाव एक मजeक बन गए हैं. ECI गृह मंत्रालय के अधीन आता है. नंबर एक अपराधी अमित शाह हैं. अगर प्रधानमंत्री देश को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अमित शाह को कैबिनेट से हटा देना चाहिए."
उन्होंने आगे कहा कि अगर मोदी जी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो मैं राष्ट्रपति से ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपील करूंगा. अगर राष्ट्रपति भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो सेना प्रमुख को ऐसे 'हुकुमशाहों' से देश को बचाने के लिए आगे आना चाहिए."
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