- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एकजुट होकर उन्हें पद से हटाने की मांग पर अड़ा है
- कांग्रेस ने फॉर्म 6 में एकतरफा बदलाव को गैरकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है
- ममता बनर्जी, राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी नेता महाभियोग नोटिस तैयार करने में जुटे हुए हैं
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो गया है. कांग्रेस ने शुक्रवार को ज्ञानेश को पद से हटाने की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किया. इंडिया गठबंधन के बड़े नेता एक दूसरे के संपर्क में हैं. वे अगले हफ्ते गठबंधन की बैठक और साझा प्रेस कॉन्फेंस की योजना बना रहे हैं. विपक्षी नेता, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस तैयार कर रहे हैं. इसके लिए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से बात की है. वहीं सीपीएम महासचिव एमए बेबी, ममता बनर्जी से बात कर रही हैं. मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होनी है. माना जा रहा है कि इस दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ममता-राहुल सब एकजुट
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर 'फॉर्म 6' में एकतरफा बदलाव करके जानबूझकर कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने और ज्ञानेश को जवाबदेह ठहराने की मांग की. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ज्ञानेश कुमार का पद पर बने रहना भारत की जनता का अपमान है, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, जैसा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सुझाव दिया था.जयराम ने कहा कि शुक्रवार देर रात, घबराए हुए चुनाव आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के जरिए उनका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया.
कांग्रेस नेता ने कहा कि CEC ने खुद ही पहले 'फॉर्म 6' में एक पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक बदलाव करके युवा वोटरों को जोड़ने का काम लगभग नामुमकिन बना दिया था. इसमें एक नया जरूरी सेक्शन जोड़ा गया, जिसमें पूछा जाता है कि क्या आपके माता-पिता/दादा-दादी पिछली SIR (मतदाता सूची) में शामिल थे, जिससे पहली बार वोट देने वाले Gen Z वोटरों के लिए एक रुकावट पैदा हो गई.
कांग्रेस ने 'फॉर्म 6' में बदलाव का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह बदलाव पूरी तरह से गैर-कानूनी है. उल्लंघन 1: जुलाई 2026 की शुरुआत में, बिना किसी आधिकारिक सूचना के चुपके से ऑनलाइन फॉर्म बदल दिया गया. दूसरे उल्लंघन की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि ECI के पास 'फॉर्म 6' में बदलाव करने का अधिकार नहीं है.जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अनुसार यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है. यह साफ तौर पर चुनाव आयोग द्वारा अपनी सीमा से बाहर जाकर किया गया काम है.
उन्होंने आगे कहा, "उल्लंघन 3: 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' के तहत इस फॉर्म को नियंत्रित करने वाले नियमों में बिना किसी संशोधन के ही फॉर्म बदल दिया गया. ऐसा केवल केंद्र सरकार ही संसद को उचित सूचना देकर कर सकती है. कानून द्वारा परिभाषित एक वैधानिक फॉर्म को घबराए हुए PM-HM की जोड़ी के कहने पर CEC ज्ञानेश ने एकतरफा तरीके से बदल दिया.
चुनाव आयोग पर जयराम रमेश का हमला
जयराम रमेश ने दावा किया कि संयोग से, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस "गैर-कानूनी और अनधिकृत" बदलाव को वापस लेने की मांग की थी ताकि "युवा और पहली बार वोट देने वाले बिना किसी परेशानी के पंजीकरण करा सकें. CEC ने न केवल संवैधानिक परंपराओं और तौर-तरीकों का उल्लंघन किया है, बल्कि संसद द्वारा पारित कानून को भी जानबूझकर तोड़ा है। उनका पद पर बने रहना भारत के लोगों का अपमान है.
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कानून लागू करने की जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति खुद कानून तोड़ने वाला है. भारतीय लोकतंत्र किस स्तर पर गिर गया है. सुप्रीम कोर्ट को तुरंत स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए.उन्होंने जोर देकर कहा कि कुमार अभी भी इस्तीफा देकर और सरकारी गवाह बनकर खुद को सुधार सकते हैं, और युवा इस कदम का स्वागत करेंगे.
ये भी पढ़ें-'ज्ञानेश कुमार को फांसी हो, लोकतंत्र की हत्या सबसे बड़ा आतंकवाद': पप्पू यादव
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं