- विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीन स्तरों पर रणनीति बनाकर महाभियोग और आपराधिक मुकदमा करने की तैयारी कर रहा है
- कांग्रेस ने विपक्षी दलों से संपर्क किया है और गठबंधन के नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव है
- डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की
चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने कमर कस ली है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विपक्ष इस मामले में एकजुट होकर रणनीति बनाकर साथ काम करने की तैयारी कर रहा है. राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब विपक्ष तीन स्तरीय रणनीति पर काम करने वाला है. कांग्रेस ने इस संबंध में बाकी विपक्षी दलों से संपर्क करना शुरू कर दिया है. इस रणनीति के तहत आने वाले दिनों में इंडिया गठबंधन के नेताओं की एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. दूसरा, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में एक बार फिर महाभियोग लाया जाएगा. तीसरा, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पुलिस में आपराधिक मुकदमा दायर किया जाएगा. टीएमसी के एक सांसद ने तो दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा दी है और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है.
एसआईआर प्रक्रिया रोकने की मांग
विपक्षी दल अब चुनाव आयोग पर यह दबाव बनाने वाले हैं कि एसआईआर की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और जितने भी लोगों के नाम मतदाता सूची से कटे हैं, उन्हें तुरंत मतदान का अधिकार वापस दिया जाए. इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इंडिया गठबंधन से अलग हो चुकी डीएमके भी अब अपने आप को विपक्ष का हिस्सा बता रही है. डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि, “CEC ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए. उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.”
स्टालिन ने एसआईआर पर उठाए सवाल
“द्रविड़ मुनेत्र कड़गम दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (#SIR) के नाम पर वोटर लिस्ट से करोड़ों वोटर्स के नाम हटाने के कदम का लगातार विरोध कर रही है. एक के बाद एक राज्यों में चुनाव से कुछ महीने पहले जल्दबाजी में किया गया यह काम गड़बड़ियों से भरा था और इससे बड़े पैमाने पर अशांति फैल गई, खासकर पश्चिम बंगाल में.”
इस ट्वीट में स्टालिन अपने आप को विपक्ष का हिस्सा बता रहे हैं. स्टालिन ने आगे कहा है कि, “इस साल मार्च की शुरुआत में ही DMK ने दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था. उन्हें अब पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.”
जबकि डीएमके के वरिष्ठ सांसद टी. आर. बालू ने एनडीटीवी से कहा कि, “जहां तक मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की बात है, हम संसद के सत्र से पहले बाकी विपक्षी दलों के साथ बातचीत कर फैसला लेंगे.”
समाजवादी पार्टी भी महाभियोग के पक्ष में
वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने एनडीटीवी से कहा कि, “इस चुनाव आयुक्त को जाना होगा. वैसे अब उनको खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में खुद संज्ञान लेना चाहिए. जब तक ज्ञानेश कुमार कुर्सी पर बने रहेंगे, लोकतंत्र पर खतरा बना रहेगा. मुख्य चुनाव आयुक्त को नैतिकता के आधार पर हट जाना चाहिए. समाजवादी पार्टी महाभियोग के पक्ष में है.”
अब सबसे बड़ा सवाल है कि महाभियोग से विपक्ष को क्या हासिल होगा, क्योंकि पहले भी विपक्ष की तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मार्च में महाभियोग लाया गया था, जिसे दोनों सदनों के सभापतियों ने खारिज कर दिया था. मगर 24 अप्रैल का महाभियोग का एक नोटिस अभी भी राज्यसभा में लंबित है. उस पर राज्यसभा के सभापति को निर्णय लेना है.
विपक्ष का तर्क क्या है
विपक्ष के एक नेता ने एनडीटीवी से कहा कि यदि महाभियोग से कुछ नहीं होता है और सरकार के पास बहुमत भी है, तो सरकार उसे स्वीकार क्यों नहीं कर रही है? सरकार महाभियोग पर चर्चा स्वीकार करे और सदन को तय करने दे. विपक्ष भले ही हार जाएगा, लेकिन भारत के संसदीय इतिहास में यह दर्ज हो जाएगा कि इस देश में एक ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त भी हुए थे, जिन पर पूरे विपक्ष को भरोसा नहीं था और उनके खिलाफ संसद में महाभियोग लाया गया था. विपक्ष का उद्देश्य इसी से पूरा हो जाएगा.
अभी तक भारत के संसदीय इतिहास में पांच बार महाभियोग का प्रस्ताव आया है और वे सभी न्यायाधीशों के खिलाफ लाए गए थे. इनके जरिए किसी भी न्यायाधीश को हटाया नहीं जा सका. कुछ ने महाभियोग से पहले ही इस्तीफा दे दिया और कुछ प्रस्ताव गिर गए. यदि इस बार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो यह पहला मौका होगा.
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