- भारत ने एक साल पहले पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था
- ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवादियों के नौ बड़े कैंप पूरी तरह नष्ट कर दिए गए और कई आतंकवादी मारे गए थे
- भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी आतंकी संगठनों को निशाना बनाया था
आज से एक साल पहले पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर बीजेपी नेताओं की डीपी बदलेगी. सभी बीजेपी नेताओं को अपनी डीपी बदलने को कहा गया है. बीजेपी नेता सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर डीपी बदलेंगे. कल यानी 7 मई से लेकर 10 मई तक डीपी बदलने को कहा गया है. नई डीपी में तिरंगे के साथ ऑपरेशन सिंदूर लिखा है.
भारतीय सेना ने पाकिस्तान में तबाह किए थे आतंकी ठिकाने
बता दें कि भारतीय सेनाओं के इस ऑपरेशन को एक वर्ष पूरा हो गया है. लगभग तीन दिन तक चला यह ऑपरेशन भले ही समय के लिहाज से छोटा था, लेकिन इसकी रणनीति और सैन्य प्रभाव बेहद व्यापक रहे. यह सिर्फ एक सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर ने भविष्य के युद्ध की दिशा और सोच दोनों को बदलकर रख दिया. बीते वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने टूरिस्टों पर हमला किया था. इस हमलों में 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या की गई. इनमें से 25 पर्यटक थे.
भारतीय सेना ने इस कायरता पूर्ण हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को मार गिराया था. वहीं ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद इन आतंकवादियों के कैंपो को भी ध्वस्त कर दिया गया. बीते वर्ष 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया गया था. इस ऑपरेशन में आतंकवादियों के 9 बड़े कैंप पूरी तरह नष्ट कर दिए गए. बड़ी संख्या में वहां मौजूद आतंकवादियों को भी ढेर किया गया था.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस ऑपरेशन में अपने तय लक्ष्यों को हासिल किया. ऑपरेशन सिंदूर ने एक नई रणनीतिक समझ की झलक भी दी, जिसमें आक्रामकता और संयम दोनों साथ-साथ चलते हैं. ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत भारत के सटीक हमलों से हुई थी. इन हमलों का लक्ष्य सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकी कैंप नहीं थे, बल्कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित आतंकी संगठनों के मुख्यालय भी भारतीय सेनाओं के निशाने पर थे.
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