पाकिस्तान से लगी सरहद पर ऑपरेशन सिन्दूर के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना अपनी शक्ति की जबरदस्त क्षमता प्रदर्शित करने जा रही है. ऐसी शक्ति जिससे सीधा संदेश पाकिस्तान को जायेगा कि अगर उसने कुछ भी उल्टी सीधी हरकत करने की कोशिश भी की तो ऑपरेशन सिन्दूर की तरह बुरा नतीजा भुगतने के लिये तैयार रहे. .पहले रडार को तबाह कर उसे अंधा बना दिया . फिर एयरबेस पर निशाना साधा जिससे उसके एयरकाफ्ट उड़ ही नही पाए और बाद में भारतीय वायुसेना ने उसके हैंगर में खड़े लड़ाकू विमानों को तबाह करते हुए परखच्चे उड़ा डाले . वायुसेना के इस अभ्यास में तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि होंगी. वहीं, इस बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख भी रहेंगे .

राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में 27 फरवरी को होने वाली वायु शक्ति अभ्यास में 77 फाइटर जेट, 43 हेलिकॉप्टर और 8 ट्रांसपोर्ट विमान हिस्सा लेंगे. यह अभ्यास शाम करीब 4.45 से शुरु होकर रात 7.45 तक अर्थात 2 घन्टे 35 मिनट तक चलेगा . इस दौरान कुल 23 अलग-अलग टारगेट पर करीब 12 हजार किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाएगा. अभ्यास में दिन और रात दोनों समय ऑपरेशन की क्षमता का प्रदर्शन होगा. पहली बार वायुसेना का ट्रांसपोर्ट एयरकाफ्ट सी 295 रांत के अंधेरे में उबड़ खाबड़ रनवे पर उतरेगा . स्पेशल फोर्स के जवान उतर कर इलाके पर कब्जा करेंगे . सबकुछ रियल जैसा ही होगा .
इस अभ्यास की सबसे खास बात होगी कि इसमें ऑपरेशन सिंदूर की पूरी झलक दिखेगी . यह भी नजर आयेगा कि अगर कही आतंकी कार्रवाई होता है तो यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारत की जमीन पर किसी भी आतंकी हमले का जबर्दस्त जवाब दिया जाएगा और इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी. दुश्मन के इलाके की पहले सेटेलाइट इमेज दिखेगी .सभी एजेसिंयों के बीच डाटा शेयरिंग किया जाएगा . पहला काम होगा कि दुश्मन की दोनों आंखों को डेमेज किया जाएगा यानि दुश्मन के राडार को पूरी तरह बरबाद कर दिया जाएगा. दुश्मन के ठिकाने का सिग्नेचर मिलने पर ड्रोन के जरिये भी हमला होगा . स्पाइस, ब्रहोम्स , हैमर जैसे मिसाइल का इस्तेमाल होगा . हलांकि इनका रियल में तो पोखरण में इस्तेमाल नही होेगा पर जमीन पर वैसा ही खतरनाक असर नजर आयेगा . मकसद साफ है दुश्मन को टारगेट को पुरी तरह बरबाद कर देना .

इस अभ्यास में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की गई सटीक टारगेटिंग की झलक भी देखने को मिलेगी. ऑपरेशन सिन्दूर में दिखा कि किस तरह वायुसेना ने सिवाय अपने टारगेट किसी भी सिविलियन एरिया को निशाना नही बनाया . इस अभ्यास में रफाल, सुखोई , मिग-29 , जगुवार जैसे फाइटर हिस्सा नही लेंगे लेकिन अपना स्वदेशी तेजस इस बार वायु शक्ति में अपना दम खम दिखाने नजर नही आयेगा . वहीं अटैक हेलीकॉप्टर में अपाचे से प्रचंड तक दुश्मनों पर आग उगलते नजर आयेंगे . इस दौरान एम-777 तोप, एल-70 एयर डिफेंस गन और स्पेशल फोर्स कमांडो भी कार्रवाई में हिस्सा लेते दिखेंगे . कुल 277 हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके जरिये वायुसेना की ताकत ताकत और तैयारी का प्रदर्शन किया जाएगा . दरअसल वायु शक्ति अभ्यास का मकसद वायुसेना की क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी दिखाना है, ताकि देश को अपनी वायुसेना की ताकत पर पूरा भरोसा रहे. साथ ही दुश्मन को सीधा संदेश देना है कि देखों कुछ भी करने से पहले सोचो कि हम कितनी तबाही मचा सकते है .
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