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This Article is From Feb 08, 2019

'कांग्रेस गड़े मुर्दे उखाड़ रही है': राफेल पर रिपोर्ट को रक्षामंत्री सीतारमण ने किया खारिज

राफेल सौदे को लेकर एक अखबार द हिंदू की खबर को सिरे से खारिज करते हुए लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह गड़े मुर्दे उखाड़ने के जैसा है.

राफेल पर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण का जवाब
नई दिल्ली:

राफेल (Rafale Deal) पर एक अखबार द हिंदू की रिपोर्ट पर एक बार फिर से सियासत तेज है. राफेल मामले पर रिपोर्ट के हवाले से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ताजा हमले के बाद संसद में भी मामला गरमाया और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को लोकसभा में इसका जवाब देना पड़ा. राफेल के मुद्दे पर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जवाब दिया और कांग्रेस पर पलटवार किया. राफेल सौदे को लेकर एक अखबार द हिंदू की खबर को सिरे से खारिज करते हुए लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह गड़े मुर्दे उखाड़ने के जैसा है. बता दें कि राहुल ने शुक्रवार की सुबह में ही मोदी सरकार पर रिपोर्ट के हवाले से हमला बोला और कहा कि इस रिपोर्ट ने पीएम मोदी की पोल खोल दी और इसने साबित कर दिया कि प्रधानमंत्री ने राफेल में समांतर बातचीत की है.

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लोकसभा में रक्षामंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है और उसका प्रयास गड़े मुर्दे उखाड़ने जैसा है. राफेल सौदे को लेकर एक अखबार की खबर को सिरे से खारिज करते हुए लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘‘यह गड़े मुर्दे उखाड़ने के जैसा है.'' विपक्ष पर निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है. उनकी (विपक्ष) वायु सेना को मजबूत बनाने में कोई रूचि नहीं है.'

अखबार की खबर के जरिये लगाये जा रहे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए सीतारमण ने कहा कि पीएमओ की ओर से विषयों के बारे में समय-समय पर जानकारी लेना हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता है. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) बनाई गयी थी जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं, उसका पीएमओ में कितना हस्तक्षेप था ? उन्होंने कहा कि तब एनएसी एक तरह से पीएमओ चला रही थी. मीडिया की रिपोर्ट के संदर्भ में रक्षा मंत्री ने कहा कि इसमें आचार (एथिक्स) का पालन करना चाहिए था और अगर अखबार चाहता था कि सचाई सामने आए तो उसे तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का बयान भी शामिल करना चाहिए था. पर्रिकर ने कहा था कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है और चीजें अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही हैं. 

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वह 4 जनवरी को इस मुद्दे पर बयान दे चुकी हैं. इससे पहले लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया में आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि यह छोटी बात नहीं है. प्रधानमंत्री कहते हैं कि कांग्रेस लड़ाकू विमान खरीदने को रोक रही है. जबकि हकीकत इसके उलट है. खड़गे ने कहा कि कांग्रेस नीत सरकार के समय 126 लड़ाकू विमान खरीदने की सहमति बनी थी लेकिन 36 विमान खरीदे जा रहे हैं. एक तरफ रक्षा मंत्रालय है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री कार्यालय है, और कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच करायी जाए तब सचाई सामने आ जायेगी. राफेल विमान सौदे के मुद्दे पर विपक्षी दलों के सदस्यों की नारेबाजी के कारण शुक्रवार को लोकसभा की बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी. इस दौरान कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल राफेल मुद्दे पर मीडिया रिपोर्ट की कतरन हाथों में लेकर आसन के समीप नारेबाजी कर रहे थे और ‘‘चौकीदार चोर हैं'' और ‘‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो'' के नारे लगा रहे थे. 

राहुल गांधी का मोदी सरकार पर ताजा हमला: आप रॉबर्ट वाड्रा, चिदंबरम की जांच कीजिए, मगर राफेल पर भी जवाब दीजिए

राहुल गांधी ने क्या कहा :
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल मामले को लेकर शुक्रवार को कहा कि पीएम मोदी सरकार रॉबर्ट वाड्रा, पी चिदंबरम या किसी के भी खिलाफ जांच कराए, लेकिन ‘राफेल घोटाले' पर प्रधानमंत्री जवाब दें और कार्रवाई करें. राहुल ने अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार ‘द हिंदू' की एक खबर की पृष्ठभूमि में यह भी आरोप लगाया कि इस विमान सौदे को लेकर मोदी ने फ्रांस के साथ समानांतर बातचीत कर रक्षा मंत्रालय के पक्ष को कमजोर किया और पूरी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अपने ‘मित्र' अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये का कांट्रैक्ट दिलवाया. उन्होंने कहा, ‘‘ हम यह एक साल से कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री राफेल घोटाले में सीधे तौर पर शामिल हैं. अखबार की रिपोर्ट से साफ है कि प्रधानमंत्री फ्रांस के साथ समानांतर बातचीत कर रहे थे. मैं देश के युवाओं और रक्षा बलों से कहना चाहता हूं कि अब स्पष्ट हो चुका है कि प्रधानमंत्री ने प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए आपके 30 हजार करोड़ रुपये चुराए और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिए. इसकी जांच होनी चाहिए.' 

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उन्होंने कहा कि पहले फ्रांस्वा ओलांद (फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति) ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बोला था कि अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये का अनुबंध दिया जाए. अब रक्षा मंत्रालय कह रहा है कि प्रधानमंत्री ने चोरी की है. पूरा मामला एकदम स्पष्ट है.' उन्होंने कहा, ‘‘ वायुसेना के मेरे पायलट मित्रों, आप लोग समझ लो कि ये 30 हजार करोड़ रुपये आपके लिए इस्तेमाल हो सकते थे . उन्होंने ये पैसे अनिल अंबानी को दे दिए. अब साफ हो चुका है कि प्रधानमंत्री ने इस देश से चोरी की है. मैं कड़े शब्द इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन करने को विवश हो रहा हूं कि भारत के प्रधानमंत्री चोर हैं.''    

क्या है द हिंदू की रिपोर्ट में:

रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस के साथ रफ़ाल सौदे की बातचीत में प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल पर एतराज़ जताया था. अंग्रेज़ी अखबार द हिंदू की ख़बर के मुताबिक रक्षा मंत्रालय तो सौदे को लेकर बातचीत कर ही रहा था, उसी दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय भी अपनी ओर से फ्रांसीसी पक्ष से बातचीत में लगा था. अखबार के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को रक्षा मंत्रालय के एक नोट में कहा गया कि PMO के दखल के चलते बातचीत कर रहे भारतीय दल और रक्षा मंत्रालय की पोज़िशन कमज़ोर हुई. रक्षा मंत्रालय ने अपने नोट में तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का ध्यान खींचते हुए कहा था कि हम PMO को ये सलाह दे सकते हैं कि कोई भी अधिकारी जो बातचीत कर रहे भारतीय टीम का हिस्सा नहीं है उसे समानांतर बातचीत नहीं करने को कहा जाए. इस नोट में ये भी कहा गया कि अगर PMO रक्षा मंत्रालय की बातचीत पर भरोसा नहीं है तो उसे PMO की अगुवाई में नए सिरे से बातचीत शुरू करनी चाहिए.

खास बात ये है कि सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वायुसेना उप प्रमुख की अगुवाई में 7 सदस्यीय टीम ने रफ़ाल सौदे पर बातचीत की. सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने इस बातचीत में PMO की भूमिका का कोई ज़िक्र नहीं किया.

 

राफेल डील पर आपको किसकी बात पर सबसे ज्‍यादा भरोसा है?

 

 

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