- केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े और खच्चरों के साथ अत्यधिक काम और दुर्व्यवहार के मामले सामने आए हैं.
- पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अमानवीय व्यवहार को रोकने के लिए कड़े नियम और जांच प्रक्रिया लागू की है.
- यात्रा के दौरान अब तक 16 खच्चरों की मौत हुई है, जिनमें मुख्य कारण पेट दर्द और अत्यधिक बोझ बताया गया है.
केदारनाथ धाम की पवित्र यात्रा, जहां श्रद्धा और आस्था का संगम होता है, वहीं इन दिनों एक दर्दनाक सच्चाई भी सामने आ रही है. यात्रा मार्ग पर घोड़े और खच्चरों जैसे बेजुबान जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता और बदसलूकी दिल को झकझोर देने वाली है. हर साल यात्रा सीजन में अत्यधिक काम का बोझ, ओवरलोडिंग और लापरवाही के कारण ये मासूम जानवर चोटिल होते हैं और कई बार उनकी जान भी चली जाती है. इन संवेदनशील मुद्दों के बीच अब उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है.
घोड़े-खच्चरों के साथ अमानवीय व्यवहार
केदारनाथ धाम में इन दिनों सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें यात्रा के पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के साथ अमानवीय व्यवहार और उनसे अत्यधिक काम लिए जाने के आरोप सामने आए हैं. 21 किलोमीटर लंबे और कठिन पैदल मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों से भारी वजन ढोने और संचालकों द्वारा दुर्व्यवहार की घटनाओं ने लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है.

उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के तहत अब तक 32 लाख 87 हजार 767 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं, जिनमें से 11 लाख 58 हजार 395 श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं. कठिन चढ़ाई के कारण श्रद्धालु घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी और पालकी का सहारा लेते हैं. हालांकि, वायरल वीडियो में देखा गया है कि कई बार 100 किलो से अधिक वजन के यात्रियों को भी खच्चरों पर बैठाया जा रहा है और तेज चढ़ाई में धीमे चलने पर उन्हें लाठियों से पीटा जा रहा है. इसके अलावा मामूली बातों पर संचालकों के बीच झगड़े के वीडियो भी सामने आए हैं.
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वायरल वीडियो में मृत खच्चर को दिखाया गया
एक वायरल वीडियो में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रियंका त्यागी ने भी पैदल यात्रा के दौरान अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पैदल चलने वाले यात्रियों के साथ भी गलत व्यवहार किया जाता है. वीडियो में यह भी दिखाया गया कि भारी वजन के कारण पशुओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और उनके साथ मारपीट की जाती है. एक तस्वीर में मृत खच्चर को भी दिखाया गया है, जिससे लोगों में रोष और बढ़ गया है.
बताया गया है कि केदारनाथ धाम में 8,512 घोड़े-खच्चर और करीब 7,865 डंडी-कंडी व पालकी संचालक पंजीकृत हैं. शिकायत मिलने पर करीब 950 संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और 4 मामलों में मुकदमा भी दर्ज किया गया है. वहीं यात्रा के दौरान अब तक 16 खच्चरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जिनका कारण पेट दर्द बताया गया है.

घोड़े-खच्चर संचालन के लिए सख्त गाइडलाइन
उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के लिए घोड़े-खच्चर संचालन के लिए सख्त गाइडलाइन बनाई गई है. केदारनाथ के लिए लगभग 50 और यमुनोत्री के लिए 10 सदस्यीय टास्क फोर्स तैनात की गई है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि पशुओं के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार न हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि घोड़े-खच्चर दिन में केवल एक ही चक्कर लगाएंगे और उसके बाद उन्हें आराम दिया जाएगा, साथ ही मार्ग पर निर्धारित स्थानों पर ही उन्हें रोका जाएगा.
इसके अलावा बिना मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र के किसी भी पशु को सेवा में नहीं लगाया जाएगा. रुद्रप्रयाग के डिप्टी चीफ वेटरिनरी ऑफिसर डॉ. राजीव गोयल ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लिया जाता है और यह भी जांच की जाती है कि वीडियो वर्तमान का है या पुराना. उन्होंने कहा कि प्रतिदिन पशु चिकित्सकों की टीम घोड़े-खच्चरों का निरीक्षण करती है और शाम को उनके ठहराव स्थलों पर जाकर उनकी स्थिति की जांच करती है, ताकि किसी भी घायल या बीमार पशु का इलाज तुरंत किया जा सके. साथ ही पशुओं की ऊंचाई और क्षमता के अनुसार उन पर वजन तय किया जाता है.
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