दिल्ली एनसीआर के श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा आने वाले वक्त में बेहद आसान और आधे वक्त में पूरी होगी. दरअसल, एकतरफ दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन को आगे उत्तराखंड में हरिद्वार और ऋषिकेश से जोड़ने के प्लान पर मुहर लग गई है. वहीं दूसरी ओर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल लाइन भी काम तेजी पर है. इससे दिल्ली-एनसीआर में नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली से उत्तराखंड के चारधाम जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए चारधाम यात्रा बेहद आसान हो जाएगी.इससे दिल्ली से कर्णप्रयाग की यात्रा जो अभी 11 से 13 घंटे में होती है वो 5 से 6 घंटे की हो जाएगी. इससे श्रद्धालुओं के करीब 7 घंटे बचेंगे.
नमो भारत और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन
यूपी और उत्तराखंड के बीच मुजफ्फरनगर होते हुए मेरठ से हरिद्वार-ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन चलाने पर मुहर लग गई है. मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत कॉरिडोर मोदीपुरम (मेरठ) से लक्ष्मण झूला (ऋषिकेश) तक होगा, जो पहले ही दिल्ली से कनेक्ट है. 150 किलोमीटर लंबे रूट पर रैपिड रेल 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी.इससे भारी ट्रैफिक वाले सड़क रास्तों की जगह सीधे तेजी से ऋषिकेश पहुंच सकेंगे.
दिल्ली एनसीआर से चारधाम यात्रा
रूट अभी समय संभावित समय
दिल्ली NCR से ऋषिकेश 5–6 घंटे 2.5–3 घंटे
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग 5–6 घंटे 2–2.5 घंटे
कुल यात्रा 11–13 घंटे 5–6 घंटे
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन रूट
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पहाड़ों के बीच महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट लगभग 125 किलोमीटर लंबा है. इसमें 16 सुरंगें और 35 पुल बन रहे हैं. इसका रेल लाइन का 85% हिस्सा यानी 105 किलोमीटर रेल सुरंग और पुल से होते हुए गुजरेगा. ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट में 12 रेलवे स्टेशन हैं. ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी रेल से 125 किलोमीटर की रह जाएगी, जो अभी सड़क से 173 किलोमीटर की दूरी पर है. 2029 तक यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. रेल लाइन का पहला ट्रायल जून 2028 को ऋषिकेश के शिवपुरी से ब्यासी तक किया जाएगा. इससे उत्तराखंड के पहाड़ों पर रेल का सपना साकार होगा.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी.
चारधाम यात्रा आसान होगी
इस रेल लाइन से न सिर्फ उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि चारधाम यात्रा में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा आसान हो जाएगी. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र तक पहुंच आसान होगी. साथ ही भारत तिब्बत चीन सीमा में सैनिकों को रसद और सैन्य साजोसामान पहुंचाना आसान हो जाएगा. भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल संपर्क बढ़ाना संभव होगा. सामरिक दृष्टि से भारत तिब्बत चीन सीमा तक रेल लाइन का विकास भारत की सीमा को और मजबूत बनाने में मदद करेगा.
अभी देहरादून, ऋषिकेश, काठगोदाम तक रेल लाइन
उत्तराखंड में अभी देहरादून,ऋषिकेश, कोटद्वार, रामनगर और काठगोदाम अंतिम छोर के स्टेशन हैं, जहां से पर्वतीय क्षेत्र शुरू होता है. अंग्रेजों ने यहां तक रेल का विकास किया लेकिन इसके आगे रेल नहीं जा सकी. लेकिन अब ऋषिकेश से ऊपर पर्वतीय क्षेत्र पर रेल लाइन प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है. पर्यावरण को ध्यान में रखने के साथ सुरंग खोदने वाली मशीन TBM के जरिये तेजी से काम हो रहा है. सुरंग के अंदर दोहरी रेल लाइन के लिए पर्याप्त चौड़ाई,जल निकासी व्यवस्था, वेंटिलेशन और आपातकालीन रास्ता भी होगा.
कर्णप्रयाग से केदारनाथ यात्रा
कर्णप्रयाग से केदारनाथ धाम की सड़क मार्ग और पैदल यात्रा मिलाकर 120 से 125 किलोमीटर है. इस यात्रा में गौरीकुंड तक सड़क मार्ग से जाना होता है. केदारनाथ मंदिर तक 16 किलोमीटर की पैदल या हेलीकॉप्टर यात्रा करनी होती है. कर्णप्रयाग से सोनप्रयाग, गौरीकुंड की दूरी लगभग 105 किलोमीटर है. कार या बस से इस दूरी को तय करने में 3.5 से 4 घंटे लगते हैं. गौरीकुंड चारधाम यात्रा का आधार शिविर यानी बेस कैंप है.यहां से केदारनाथ मंदिर तक 16 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है.इसे पूरा करने में पैदल 6 से 8 घंटे लगते हैं.
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