- नेपाल में आई भयानक बाढ़ का असर भारत से सटे सीमावर्ती जिलों में दिख रहा है.
- यूपी के कुशीनगर और महाराजगंज में जिलों में बहने वाली नदियों में कुछ शव तैरते हुए पहुंचे हैं.
- जिन्हें यूपी प्रशासन ने सुरक्षित रखवा दिया है. यह जानकारी नेपाल को भी भेजी गई है.
नेपाल में बुधवार को आई भयानक बाढ़ का असर भारत से सटे सीमावर्ती जिलों में भी देखा जा रहा है. इस प्राकृतिक आपदा की डरावनी तस्वीर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और महराजगंज जिलों में भी देखने को मिली है. नेपाल से बहकर आए शव गंडक और नारायणी नदी में तैरते मिले हैं. पानी के तेज बहाव की वजह से ये शव करीब 150 किलोमीटर दूर बहकर भारतीय सीमा तक आ पहुंचे हैं. जिन्हें प्रशासन सुरक्षित रख दिया है. ताकि पहचान के बाद उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा. वहीं यूपी में भी नेपाल से बहने वाली गंडक और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है. आलम यह है कि नदियों से सटे गांवों में लोग रातभर जाग रहे हैं, जबकि कई गांवों को पुलिस और प्रशासन की टीमों ने पहले ही खाली करा दिया था. किसी भी आपात स्थिति में यहां लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
महाराजगंज और कुशीनगर में तैरकर आए शव
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद तबाही के निशान दिख रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक अब तक उत्तर प्रदेश की सीमा में 6 शवों को बरामद किया है, जो नेपाल से बहकर यहां पहुंचे हैं. बताया जा रहा है कि करीब 150 किलोमीटर दूर से यह शव यहां बहकर पहुंचे हैं. कुशीनगर में मिले चार शवों में 2 महिलाओं के शव हैं. इन शवों की जानकारी ग्रामीणों की तरफ से पुलिस को दी गई थी, जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने इन्हें नदी से बाहर निकालकर सुरक्षित रखा और उनकी पहचान के निर्देश दिए गए हैं. महराजगंज जिले में सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने गंडक नदी की पेट्रोलिंग के दौरान 3 अन्य शवों को सुरक्षित बाहर निकाला है. इंसानी लाशों के अलावा मवेशी, उजड़े हुए घरों का घरेलू सामान और बड़ी संख्या में लकड़ियां भी बहकर आई हैं.
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नेपाल के साथ संपर्क में भारतीय अधिकारी
भारतीय अधिकारी और एसएसबी (SSB) के वरिष्ठ कमांडर नेपाल के स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं. शवों के शारीरिक हुलिए, कपड़ों और तस्वीरों का विवरण नेपाल के अधिकारियों के साथ साझा किया जा रहा है ताकि उनके परिजनों का पता लगाया जा सके.
रातभर जाग रहे गांव के लोग
नेपाल की बाढ़ का डर यूपी-बिहार में भी देखा जा रहा है. नेपाल में वाल्मीकि बैराज के सभी 36 फाटक खोले जाने और नदियों में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद स्थिति का संज्ञान लेते हुए महराजगंज, कुशीनगर, और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में नदी के तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी करने के सख्त निर्देश दिए हैं. बाढ़ की आशंका को देखते हुए नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीण सहमे हुए हैं और अपना सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रात-रात भर जागकर वक्त बिता रहे हैं.
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपी सरकार ने बचाव और राहत कार्यों के लिए नेपाल में 32 सदस्यों वाली SDRF प्लाटून और 22 PAC जवानों को तैनात किया है. जबकि फंसे हुए यूपी निवासियों के परिवार 1070 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं. नेपाल में बाढ़ तब आई जब चीन के साथ देश की सीमा के पास एक नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से लैंडस्लाइड रास्ता बंद हो गया. नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ ने कई जिलों को प्रभावित किया है और कम से कम 826 लोग लापता हैं.
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