- कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने न्यूक्लियर फिशन हासिल किया
- भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हुआ जिसके पास ऐसा काम करने वाला रिएक्टर है.
- यह उपलब्धि भारत को न्यूक्लियर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने के और करीब ले जाती है.
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा और ऐतिहासिक पड़ाव पार हो गया है. तमिलनाडु के कलपक्कम में बने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने लगातार न्यूक्लियर फिशन हासिल कर लिया है. करीब दो दशकों की मेहनत के बाद मिली इस सफलता को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी कामयाबी नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर न्यूक्लियर भविष्य की ओर एक मजबूत कदम है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे भारत अब अपने लंबे समय के परमाणु ऊर्जा लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है.
इस पर विस्तार से और जानकारी हासिल करने NDTV के साइंस एडिटर पल्लव बागला पहुंचे तमिलनाडु के अति सुरक्षित सुविधा केंद्र इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च. जहां उन्हें अंदर जाने की खास इजाजत मिली और उन्होंने इसके निदेशक श्रीकुमार पिल्लई से इस पर खास बातचीत की.

Photo Credit: PIB
श्रीकुमार ने क्या बताया?
पिल्लई ने बताया कि यह रिएक्टर लगातार न्यूक्लियर फिशन बनाए रखने में सफल रहा है, जो किसी भी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के लिए सबसे अहम स्टेज होती है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है जिनके पास इस तरह का काम करने वाला रिएक्टर है. अभी दुनिया में केवल रूस के पास यह क्षमता है.
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खास बात यह है कि यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा ईंधन पैदा भी कर सकता है. यानी यह तकनीक भविष्य में परमाणु ऊर्जा को ज्यादा टिकाऊ और किफायती बना सकती है. भारत के लिए यह इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के पास थोरियम जैसे संसाधनों की भरमार है, जिन्हें आगे चलकर इसी तकनीक के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
#NDTVExclusive | India Enters the Fast Lane of Nuclear Energy Independence
— NDTV (@ndtv) April 10, 2026
NDTV's Science Editor @pallavabagla spoke to Mr Sreekumar Pillai, Director, Indira Gandhi Center for Atomic Research (IGCAR) pic.twitter.com/QsoDIsZLm2
न्यूक्लियर एनर्जी में गेमचेंजर
करीब 20 साल की लंबी रिसर्च, डिजाइन और निर्माण के बाद यह रिएक्टर तैयार हुआ है. खास बात यह है कि इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है. यानी डिजाइन से लेकर निर्माण तक, सब कुछ भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने किया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इस रिएक्टर के सुरक्षा सिस्टम बेहद मजबूत और कई स्तरों पर जांचे-परखे हुए हैं. हर संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स लगाए गए हैं.
यह सफलता भारत के तीन चरणों वाले न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे और तीसरे चरण की दिशा में भी बड़ा कदम मानी जा रही है. इससे देश को लंबे समय तक साफ और स्थिर ऊर्जा मिल सकेगी, जो बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगी और यही न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में गेमचेंजर बनेगा.
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