Nuclear Energy Production: कल्पना कीजिए एक ऐसी भट्टी की, जिसमें आप जितना कोयला डालें, जलने के बाद वो उससे कहीं ज्यादा कोयला वापस कर दे. सुनने में ये किसी जादुई कहानी जैसा लगता है, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु के कलपक्कम में इस 'जादू' को हकीकत में बदल दिया है. भारत के सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टर- प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 'क्रिटिकैलिटी' का मुकाम हासिल कर लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लिए एक 'निर्णायक मोड़' बताया है. लेकिन क्या आप ये समझ पा रहे हैं कि आपके लिए इसका क्या मतलब है?
ये समझने के लिए ये जानना जरूरी होगा कि भारत, परमाणु बिजली (Atomic Energy) के मामले में अभी कहां खड़ा है और अगले 10-20 साल में हम कहां होंगे? आइए, इस रोमांचक सफर को समझने की कोशिश करते हैं.
क्या है कलपक्कम का 'अक्षय पात्र'?
परमाणु विज्ञान की भाषा में 'क्रिटिकैलिटी' का मतलब है कि रिएक्टर अब अपने पैरों पर खड़ा हो गया है. अब इसे चलाने के लिए बाहर से किसी चिंगारी या दखल की जरूरत नहीं है, ये खुद न्यूट्रॉन पैदा करेगा और खुद ही बिजली बनाएगा.
इसीलिए वैज्ञानिक इसे ऊर्जा का 'अक्षय पात्र' कह रहे हैं. दुनिया में केवल रूस के पास ही फिलहाल ऐसी तकनीक का कमर्शियल रिएक्टर है.
परमाणु ऊर्जा के मामले में अभी हम कहां हैं?
अगर आज की बात करें, तो भारत अपनी कुल बिजली का लगभग 3 फीसदी हिस्सा परमाणु ऊर्जा से बनाता है. ये आंकड़ा करीब 8.8 गीगावॉट है. देश के परमाणु (एटॉमिक) बिजली घरों ने एक साल में 56,681 मिलियन यूनिट यानी करीब 56.7 TWh बिजली पैदा की. वर्तमान में चालू परमाणु संयंत्रों की स्थापित क्षमता लगभग 8.78 गीगावॉट (8,780 MW) है, जो 24 रिएक्टरों (RAPS‑1 को छोड़कर) से मिल कर बनी है.
सरकार ने बीते फरवरी में संसद में जो आंकड़े दिए हैं, वे बताते हैं कि हम धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ा रहे हैं.
- मौजूदा क्षमता: भारत में अभी 24 परमाणु रिएक्टर कमर्शियल काम कर रहे हैं, जो कुल 8,780 मेगावाट (MW) बिजली पैदा करते हैं.
- बिजली उत्पादन: वित्त वर्ष 2024-25 में हमारे परमाणु बिजलीघरों ने 56,681 मिलियन यूनिट बिजली बनाई. 2020-21 (43,029 यूनिट) के मुकाबले इसमें करीब 31% की शानदार बढ़त देखी गई है.

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मिशन 2047: 100 गीगावाट का महा-लक्ष्य
भारत की ऊर्जा जरूरत को देखते हुए सरकार ने बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है. अभी हम 8.78 गीगावाट पर हैं, लेकिन मूल बात ये है कि 'मीलों हम आ चुके, मीलों जाना बाकी है.'
2031-32 तक निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पूरे होने पर हमारी क्षमता बढ़कर 22,380 मेगावाट (लगभग 22 GW) हो जाएगी और साल 2047 तक, जब देश आजादी के 100 साल मना रहा होगा, तब सरकार का लक्ष्य 100 गीगावाट (100 GW) परमाणु बिजली पैदा करने का है.
इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार ने 'शांति' (SHANTI) एक्ट भी लागू किया है, ताकि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ सके और काम में तेजी आए.

जितनी जरूरत, उससे ज्यादा बिजली पैदा होगी
कलपक्कम की यह कामयाबी सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है. ये हर भारतीय के घर को बिना प्रदूषण वाली 'सस्ती और निर्बाध' बिजली देने का वादा है. परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ अजीत कुमार मोहंती इस सफलता को ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हैं.
उन्होंने कहा, 'कलपक्कम का ये स्वदेशी रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करेगा, जो भारत के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के लिए निर्णायक है. ये उपलब्धि भविष्य में भारत के प्रचुर थोरियम भंडार के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे हम ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेंगे.'
जानकारों का कहना है कि जब ये रिएक्टर पूरी क्षमता से काम करना शुरू करेगा, तो भारत न केवल एक परमाणु महाशक्ति बनेगा, बल्कि नेट-जीरो उत्सर्जन (2070) के लक्ष्य की ओर भी तेजी से कदम बढ़ाएगा. भारत का 'न्यूक्लियर युग' अब सही मायने में शुरू हुआ है.
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