Indian Nuclear Program : भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जो उसे दुनिया के गिने-चुने देशों की कतार में खड़ा कर देती है. चेन्नई के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने सफलतापूर्वक 'क्रिटिकैलिटी' (Criticality) हासिल कर ली है. इसकी जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्वीट करके दी है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की असैन्य परमाणु यात्रा का एक निर्णायक मोड़ बताया है. तो चलिए जानते हैं आखिर PEBR क्या है और इसे भारत के लिए अक्षय पात्र क्यों कहा जा रहा है.
आखिर क्या है यह PFBR?
आसान शब्दों में समझें तो यह एक ऐसा जादुई चूल्हा है, जो जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे कहीं ज्यादा पैदा करता है. इसीलिए इसे 'ब्रीडर' (Breeder) कहा जाता है.
आपको बता दें कि सामान्य परमाणु रिएक्टर यूरेनियम का उपयोग करते हैं और काफी कचरा छोड़ते हैं, लेकिन PFBR प्लूटोनियम और यूरेनियम-238 का इस्तेमाल कर अधिक ऊर्जा और ईंधन (प्लूटोनियम-239) दोनों बनाता है.
Today, India takes a defining step in its civil nuclear journey, advancing the second stage of its nuclear programme.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam has attained criticality.
This advanced reactor, capable of producing more fuel…
इस तकनीक को किसने बनाया
PFBR को BHAVINI (भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड) द्वारा तैयार किया गया है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसमें इस्तेमाल होने वाला लिक्विड सोडियम था. सोडियम हवा या पानी के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेता है, इसलिए इसे कंट्रोल करना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी परीक्षा थी. 2004 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर अब तक लगभग 7,700 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है.
PEBR से भारत को क्या मिलेगा फायदा?
ऊर्जा आत्मनिर्भरतायह भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण है.
थोरियम का रास्तायह सफलता तीसरे चरण का मार्ग प्रशस्त करती है, जहां भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग कर सकेगा.
अक्षय ऊर्जायह रिएक्टर ऊर्जा के ऐसे स्रोत की तरह है जो कभी खत्म नहीं होगा.
क्रिटिकैलिटी हासिल करने का मतलब है कि रिएक्टर के अंदर परमाणु विखंडन (Fission) की नियंत्रित प्रक्रिया शुरू हो गई है. अगले कुछ महीनों में इसके सुरक्षा प्रणालियों की जांच होगी, टर्बाइन को ग्रिड से जोड़ा जाएगा और धीरे-धीरे इसकी क्षमता 500 मेगावाट तक बढ़ाई जाएगी.
यह भी पढ़ें- India Post GDS 2nd Merit List 2026 LIVE : Marksheet में ग्रेड हो तो कैसे बनेगी GDS की मेरिट लिस्ट?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं