- एनसीपी की सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री और विधायक दल की नेता बनाने का निर्णय पहले ही किया जा चुका है
- दोनों एनसीपी गुटों के विलय की संभावना बढ़ रही है, जो राज्य की राजनीति में एनसीपी की ताकत बढ़ा सकती है
- प्रफुल्ल पटेल की भूमिका पर सवाल हैं कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे या विलय के बाद उनकी स्थिति क्या होगी
उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई स्तर पर संकट पैदा हो गया है. एक तो महाराष्ट्र सरकार में ये दिक्कत हो गई है कि बजट कौन पेश करेगा और अगला वित्त मंत्री कौन होगा? महाराष्ट्र का बजट सत्र 23 फ़रवरी से शुरू हो रहा है.यदि तब तक नया वित्त मंत्री तय नहीं होता है तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी बजट पेश कर सकते हैं.
दूसरा जो सबसे अहम निर्णय होना है वह यह कि एनसीपी की तरफ से उपमुख्यमंत्री कौन होगा? इस बारे में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाकात की है और यह भी तय है कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ही होंगी. साथ में एनसीपी विधायक दल की नेता भी. मगर सवाल ये है कि वित्त मंत्रालय किसके पास रहेगा अभी तक तो ये एनसीपी के पास था,तो क्या सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री के साथ साथ वित्त मंत्री भी होंगी या फिर कोई और. कहने को तो ये भी कहा जा रहा है कि यदि दोनों एनसीपी एक हो जाती हैं तो जयंत पाटिल भी वित्त मंत्री बन सकते हैं, पहले भी रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि सुनेत्रा पवार की राज्यसभा सीट पर उनके बेटे पार्थ पवार चुन कर आ जाएंगे. वैसे अजित पवार वाली एनसीपी को जुलाई में होने वाले राज्यसभा चुनाव में एक और सीट मिलेगी.
पटेल की भूमिका?
दूसरी बात ये है कि प्रफुल्ल पटेल की भूमिका क्या रहेगी.क्या वो एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे और यदि दोनों एनसीपी एक हो जाती है तो उनकी भूमिका क्या होगी.वैसे शरद पवार ने 2019 में प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले को एनसीपी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था.
NCP का विलय होगा?
अब रही बात कि क्या दोनों एनसीपी एक होने जा रही है.खबरों की मानें तो अजित पवार के रहते यह तय हुआ था कि महाराष्ट्र के जिला परिषदों के चुनाव के बाद 8 फरवरी को दोनों एनसीपी एक हो जाएंगे.एनसीपी अजित गुट के नेता नवाब मलिक का मानना है कि आज नहीं कल तो यह होना ही है.दोनों परिवार को यह तय करना है और दोनों पार्टी के नेताओं को.हालांकि इन पर पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं का दबाव है कि एकजुट हो जाएं.
महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का भी मानना है कि एनसीपी को राज्य की राजनीति में एक अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए सत्ता जरूरी है. महाराष्ट्र की राजनीति जहां कोऑपरेटिव या सहकारी संघों का बहुत महत्त्व रहता है इसलिए वहां दबदबा होना जरूरी है.मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में राजनीति इन्हीं के जरिए होती है और इसके लिए सत्ता जरूरी है और यदि आपके पास वित्त विभाग भी है तो चीजें और भी आसान हो जाती है. अब रही बात कि क्या दोनों एनसीपी एक होंगी. इसका सीधा और सरल जवाब है कि क्यों नहीं हो सकती,हो जाएं सबके हित में होगा. मगर यह फैसला शरद पवार को करना होगा.यहां तक तो कोई दिक्कत नहीं है.
शरद पवार एनडीए के साथ जाएंगे?
समस्या यहां पर ये है कि क्या शरग पवार एनडीए के साथ जाएंगे क्योंकि अभी तक अपने पचास साल से अधिक के राजनैतिक सफर में उन्होंने कभी बीजेपी से हाथ नहीं मिलाया है और वो अभी भी इंडिया गठबंधन के साथ हैं और संसद में उनके सांसद विपक्ष में बैठते हैं.शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल इसी साल जुलाई में खत्म हो जाएगा और उन्होंने कहा है कि वो अब और सक्रिय राजनीति में नहीं रहना चाहते हैं.मगर इस बदली परिस्थितियों में वो क्या सोच रहे हैं और वो क्या निर्णय लेंगे ये केवल वही बता सकते हैं. पिछले तीन दशकों से शरद पवार की राजनीति को रिपोर्ट करने के बाद मैं केवल इतना कह सकता हूं कि शरद पवार ने अपने इतने लंबे राजनैतिक सफर में कई बार चौंकाने वाले फैसले भी लिए हैं इसलिए उनके अगले किसी भी कदम पर कयास लगाने से अच्छा होगा कि उनके अगले निर्णय का इंतजार किया जाए.
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