Why Gold-Silver Prices Fall: पिछले कुछ महीनों से तेजी से ऊपर भाग रहे सोने-चांदी के भाव में बीते 2 ही दिनों में गजब की गिरावट आई है. सोना तो गिरा ही, लेकिन चांदी तो ऐसी लुढ़की कि गिरावट का भी रिकॉर्ड बना दिया. वायदा कारोबार में शुक्रवार 30 जनवरी को चांदी और सोने की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. सोना करीब 9 फीसदी गिरकर 1.54 लाख/10 ग्राम के भाव पर चल रहा था, जबकि चांदी का वायदा भाव करीब 17 फीसदी गिरकर 3.32 लाख रुपये/किलो रह गया. सोना और चांदी दोनों में गिरावट को जोड़ें तो शुक्रवार को एक ही दिन में 83,000 से ज्यादा की गिरावट है. एक्सपर्ट इस गिरावट के पीछे 3 बड़ी वजहें बता रहे हैं, इनमें मुनाफावसूली एक बड़ी वजह है.
आज कितना गिरा सोना-चांदी?
शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में, मार्च डिलीवरी वाले चांदी वायदा का भाव 67,891 रुपये या 16.97 फीसदी गिर कर 3,32,002 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जो एक दिन में इसकी सबसे बड़ी गिरावट है. गुरुवार को चांदी में बड़ा उछाल देखा गया था और ये 4,20,048 रुपये/किलो के अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी, हालांकि बाद में ये गिर कर 3,99,893 रुपये/किलो पर बंद हुई.
वहीं दूसरी ओर सोने के वायदा भाव में भी बड़ी गिरावट देखी गई. सोने के फरवरी डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 15,246 रुपये या 9 फीसदी टूटकर 1,54,157 रुपये/ 10 ग्राम रह गई. गुरुवार को सोने की कीमत करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 1,80,779 रुपये/10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई थी. बाद में MCX पर सोने का भाव 1,69,403 रुपये/10 ग्राम रह गया.

क्या हैं गिरावट के बड़े कारण?
- मुनाफावसूली: बीते कुछ दिनों से चांदी और सोना, दोनों लगातार ऑल टाइम हाई बना रहे थे, जिसके बाद ऊंचे भाव पर भारी मुनाफावसूली देखने को मिली. यानी निवेशकों ने खूब सोना-चांदी बेचा और मोटा मुनाफा कमाया. चांदी में ताजा गिरावट के पीछे कई और भी वजहें बताई जा रही हैं. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस विश्लेषक, मानव मोदी ने कहा कि चांदी और सोने की कीमतों ने आज सभी फॉर्मेट, 'मेगा' और 'मिनी' कॉन्ट्रैक्ट्स में निचले सर्किट स्तर को छू लिया है. उन्होंने कहा, '...यह एक मजबूत मुनाफावसूली है जो हमने ऊपरी स्तर से देखी है, और ETF की कीमतें, वायदा कारोबार में जो हम देख रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा फीसदी नीचे है.' बता दें कि घरेलू बाजारों में सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में 20 फीसदी तक की गिरावट आई है.
- तेजी के बाद करेक्शन: केडिया एडवायरजरी के मुताबिक, हाल की रैली में कीमती धातुओं की तेजी काफी गर्म हो चुकी थी, ऐसे में करेक्शन लगभग तय माना जा रहा था. सोने की तुलना में चांदी का बाजार आकार में छोटा और ज्यादा अस्थिर होता है, इसलिए जब भी बिकवाली तेज होती है तो इसमें गिरावट अपेक्षाकृत ज्यादा दिखती है. जैसे ही सोना रिकॉर्ड स्तर से फिसलना शुरू हुआ, चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली और यह दबाव और बढ़ गया.
- इंडस्ट्रियल डिमांड आउटलुक: गिरावट की एक बड़ी वजह इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग को लेकर कमजोर आउटलुक भी बताया जा रहा है. चांदी का व्यापक इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मैन्युफैक्चरिंग जैसी इंडस्ट्री में होता है. ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार सुस्त पड़ने, चीन और यूरोप से नरम मांग की आशंकाओं ने औद्योगिक कमोडिटीज के आउटलुक पर दबाव डाला है, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिख रहा है.
- चौथी बड़ी वजह अमेरिका से: अमेरिका इसी के साथ अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने निकट भविष्य में फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक दर कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है. ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर ऐसी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं. ऐसे माहौल में कुछ निवेशक सोना‑चांदी से पैसा निकालकर बांड और इक्विटी जैसे यील्ड वाले एसेट्स की ओर रुख करते हैं. जिंस बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट इस रिपोर्ट के बीच आई है कि अमेरिकी प्रशासन, केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व प्रमुख के रूप में नामित करने की तैयारी कर रहा है. एक विशेषज्ञ ने कहा, 'वॉर्श ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत होगा और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ेगा.' अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल के उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान करने वाले हैं.
आगे कैसी रहेगी चांदी की चाल, क्या करें निवेशक?
तेज गिरावट के बावजूद एनालिस्ट का मानना है कि चांदी अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रही है. इसका मतलब है कि लॉन्ग टर्म तेजी का रुझान अभी टूटा नहीं है, लेकिन निकट भविष्य में उतार‑चढ़ाव बना रह सकता है.
आगे चलकर चांदी की चाल महंगाई की ट्रेंड, सेंट्रल बैंकों की नीतियों, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और भू‑राजनीतिक जोखिम जैसे कारकों पर निर्भर करेगी. अगर अनिश्चितता फिर बढ़ती है या ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू होता है तो चांदी में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि ग्रोथ को लेकर आशंकाएं गहराती हैं तो उतार भी संभव है.

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि मौजूदा माहौल में सावधानी बरतने की जरूरत है. मार्केट को टाइम करने की कोशिश करने की बजाय धीरे‑धीरे निवेश, SIP‑टाइप अप्रोच और पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन जैसी स्ट्रैटजी अधिक सुरक्षित मानी जा रही हैं. चांदी अभी भी हेज (Hedge) के रूप में जगह रख सकती है, लेकिन इसकी ज्यादा उथल‑पुथल को देखते हुए इसे किसी संतुलित पोर्टफोलियो का सीमित हिस्सा ही रखना समझदारी होगी.
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