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'तीन दिन पाक में रहा मुर्शिदाबाद, मेरे दादा ने वापस हिंदुस्तान में मिलाया, अब मेरे ही खानदान के वोट काट दिए'...नवाब के पोते का दर्द

मुर्शिदाबाद के नवाब खानदान के 120 लोगों के वोट SIR में कट गए. आजादी के वक्त इसी खानदान ने मुर्शिदाबाद को भारत में शामिल कराया था.

'तीन दिन पाक में रहा मुर्शिदाबाद, मेरे दादा ने वापस हिंदुस्तान में मिलाया, अब मेरे ही खानदान के वोट काट दिए'...नवाब के पोते का दर्द
मुर्शिदाबाद के नवाब खानदान के कई लोगों के वोट कटे
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  • मुर्शिदाबाद के नवाब खानदान के 120 सदस्यों के नाम चुनाव आयोग की SIR सूची से काट दिए गए हैं
  • नवाब परिवार के फहीम मिर्जा का नाम भी SIR से कट गया है, जबकि वह टीएमसी के पार्षद हैं
  • नवाब खानदान ने 1947 में मुर्शिदाबाद को भारत में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के नवाब के खानदान के 120 लोगों के नाम SIR में कट गए हैं. छोटे नवाब यानी सैयद रजा अली मिर्जा इंदिरा गांधी के समय से वोट कर रहे हैं और सबसे मजेदार बात है कि उनके बेटे फहीम मिर्जा जो खुद टीएमसी से पार्षद हैं का नाम भी एसआईआर में कट गया है. वो खुद टीएमसी के लिए प्रचार कर रहे हैं मगर खुद वोट नहीं कर पाएंगे. दिलचस्प बात ये है कि उनका बूथ भी उनके घर से कुछ ही मीटर पर है. नवाब परिवार ने बताया कि उनके दादा ने आजादी के वक्त मुर्शिदाबाद को भारत का हिस्सा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. नवाब परिवार से NDTV की टीम ने खास बातचीत की. जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं.

'300 साल से भारत में है हमारा परिवार'

छोटे नवाब ने बताया कि हम यहां 300 साल से हैं, मेरे दादा की वजह से ही मुर्शिदाबाद हिंदुस्तान में है. हमारे यहां कोई भेदभाव नहीं है, कोई मारामारी नहीं है. हिंदु और मुस्लिम साथ में मिलकर रहते हैं. वो मोहर्रम, ईद और बकरीद में आते हैं. हम भी कीर्तन में जाते हैं, मंदिर भी जाते हैं.

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नवाब खानदान के 120 वोट कटे

इलाके के पार्षद और छोटे नवाब के बेटे फहीम अहमद मिर्जा का कहना है कि हमारे वार्ड से 386 वोट कटें हैं, जिसमें से नवाब परिवार के 120 सदस्यों के नाम कटे हैं. बहुत कम नाम ही बचे हैं. फिलहाल स्क्रूटनी चल रही है. हमने इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल का रूख किया है. उन्होंने कहा कि हम लोग असली वोटर हैं. हम ना ही बांग्लादेश से आए हैं और ना ही रोहिंग्या हैं. हम शुद्ध हिंदुस्तानी हैं.

फहीम बताते हैं कि 1947 में आजादी के वक्त भी मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल इलाका था. उस वक्त यहां के नवाब हमारे दादा वासिफ अली मिर्जा थे. उनको पाकिस्तान से ऑफर मिला था कि आप बांग्लादेश आ जाएं, हम आपको बड़ा दर्जा देंगे. लेकिन मेरे दादा ने कहा था कि मैं बांग्लादेश नहीं आऊंगा. मैं वहीं रहूंगा जहां हमारे बाप-दादा दफन हैं. उनकी यहां मिट्टी है, मैं यहीं रहूंगा, इसी मुल्क में. जो सपना उन्हें दिखाया गया था, वो उन्होंने नकार दिया. यह शहर बकायदा तीन दिनों तक पाकिस्तान बना रहा, हर मस्जिद और चौराहे पर पाकिस्तान का झंडा लहरा रहा था. मेरे दादा आए हुकुमत से बात की और मुर्शिदाबाद को दोबारा हिंदुस्तान में शामिल कराया. हम उस खानदान से वास्ता रखते हैं. हम इस किस्म के हिंदुस्तानी हैं जो जन्म और अपनी मर्जी से हिंदुस्तानी हैं.
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जब फहीम अहमद से पूछा गया कि आप यहां के पार्षद हैं तो फिर आपका नाम SIR में कैसे कटा? इस पर उन्होंने कहा, 'कैसे कटा पता नहीं. चुनाव आयोग ने जो भी डॉक्युमेंट्स मांगे हमने जमा किए. एक बार नहीं दो बार जमा किए. सुनवाई के दौरान भी दस्तावेज दिए. ताज्जुब इस बात का है कि डॉक्युमेंट को वैरिफाई नहीं किया गया. मैंने पिता जी की 1976 की हाईस्कूल मार्कशीट भी दी, जिसमें उनकी जन्मतिथि 1944 भी लिखी हुई है.

'इंदिरा गांधी के जमाने से कर रहे वोट'

जह छोटे नवाब से पूछा गया कि वो कब से यहां वोट कर रहे हैं, तो उन्होंने बताया, 'मैं इंदिरा गांधी के समय से वोटिंग कर रहा हूं. सारी सरकारें देखी हैं. अब ममता बनर्जी की सरकार है. हमारा नाम कट गया है क्या करें, कोशिश जारी है. DM से लगातार मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके हाथ में कुछ नहीं है सब कुछ चुनाव आयोग के हाथ में है.

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वहीं फहीम मिर्जा न बताते हैं कि सबसे दुख की बात है कि पोलिंग बूथ हमारे घर से कुछ ही मीटर पर है. अगर हमारा वोट नहीं जुड़ा तो हम यहां रहते हुए वोट नहीं दे पाएंगे. अगर किसी मोहल्ले में कोई कहे कि हमारे यहां कोई काम नहीं हुआ, तो पूरा प्रशासन लग जाता है कि आप कृपया वोट कीजिए. लेकिन आज जब हम असली वोटर हैं, वो चीख चीख कर कह रहे हैं, हिंदुस्तान के सारे जिम्मेदार लोगों को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि हम हिंदुस्तानी हैं हमें वोट डालने दें, मगर कोई हमारी आवाज नहीं सुन रहा है. हमने अपने पिता की मार्कशीट और सर्विस डॉक्युमेंट तक दिए हैं. उन्होंने कहा, 'मैं खुद चार साल से पार्षद हूं कितनी दुख की बात है कि मैं घूम घूमकर कर अपनी पार्टी के लिए वोट मांग रहा हूं मगर खुद वोट नहीं डाल सकता.'

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