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66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और 703 करोड़ का बीमा ! लालबागचा राजा नहीं, ये हैं मुंबई के सबसे अमीर बप्पा

मुंबई के GSB सेवा मंडल का 72वां गणेशोत्सव चर्चा में है. 66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और 703 करोड़ रुपये के बीमा कवर के साथ जाने क्यों कहलाते हैं ये 'मुंबई के सबसे अमीर बप्पा'.

66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और 703 करोड़ का बीमा ! लालबागचा राजा नहीं, ये हैं मुंबई के सबसे अमीर बप्पा

मुंबई में गणेशोत्सव का जिक्र हो और लालबागचा राजा की चर्चा न हो, ऐसा कम ही होता है. लेकिन मायानगरी में एक और गणपति हैं, जिनके दरबार में आस्था के साथ-साथ वैभव भी लोगों को हैरान कर रहा है. किंग्स सर्कल स्थित GSB सेवा मंडल के गणपति को 'मुंबई का सबसे अमीर बप्पा' कहा जाता है. इस साल बप्पा को 66 किलो सोने और 335 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए 703.27 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बीमा कराया गया है. पांच दिनों तक चलने वाले इस गणेशोत्सव में देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु और सेवादार पहुंच रहे हैं.

66 किलो सोना, 335 किलो चांदी... देखते रह जाते हैं लोग

GSB सेवा मंडल इस साल अपना 72वां गणेशोत्सव मना रहा है. यहां विराजमान महागणपति की भव्यता पहली नजर में ही लोगों का ध्यान खींच लेती है. बप्पा की प्रतिमा को 66 किलो शुद्ध सोने और 335 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है. ये भी एक बड़ी वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.  मंडल ने इस वर्ष 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है. इस बीमा में सिर्फ गणपति के बहुमूल्य आभूषण ही नहीं, बल्कि दर्शन के लिए आने वाले भक्त, स्वयंसेवक और पूरा आयोजन भी शामिल है. धार्मिक आयोजनों में इसे सबसे बड़े बीमा कवरों में से एक माना जा रहा है.

विदेशों से आते हैं NRI सेवादार

बप्पा यहां सिर्फ पांच दिनों के लिए विराजते हैं, लेकिन उनकी सेवा के लिए दुनिया के कई देशों से NRI सेवादार मुंबई पहुंचते हैं. पूरा आयोजन स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है. मंडल के अनुसार यहां एक लाख से ज्यादा विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.  GSB गणेशोत्सव की एक खास पहचान तुलादान की परंपरा भी है. मन्नत पूरी होने पर कई श्रद्धालु अपने वजन के बराबर दान करते हैं. इसके अलावा आयोजन के दौरान दो लाख से ज्यादा भक्तों को भोजन-प्रसादम भी कराया जाता है. यही वजह है कि यह आयोजन सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सेवा और दान का भी बड़ा केंद्र बन जाता है.

66 किलो सोना एक दिन में नहीं जुटा, 72 साल में बना 'खजाना'

GSB सेवा मंडल के गणपति पर दिखने वाला 66 किलो सोना और 335 किलो चांदी किसी एक कारोबारी या उद्योगपति की देन नहीं है. मंडल का यह संग्रह पिछले सात दशकों में धीरे-धीरे तैयार हुआ है. 1950 के दशक में शुरू हुए गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने पर सोने के सिक्के, चेन, कंगन, हार और अन्य आभूषण चढ़ाने शुरू किए थे. समय के साथ देश ही नहीं, विदेशों में बसे गौड़ सारस्वत समुदाय और अन्य भक्त भी इस परंपरा से जुड़ते गए. नतीजा यह हुआ कि हर साल बढ़ते दान और चढ़ावे ने GSB गणपति को देश के सबसे समृद्ध गणेशोत्सवों में शामिल कर दिया. आज बप्पा पर सजने वाला हर आभूषण सिर्फ उसकी कीमत की वजह से नहीं, बल्कि उसके पीछे जुड़ी किसी श्रद्धालु की मन्नत, धन्यवाद या आस्था की कहानी की वजह से भी खास माना जाता है.

नेताओं से लेकर फिल्मी सितारों तक की आस्था

GSB सेवा मंडल का गणेशोत्सव मुंबई की पहचान बन चुका है. यहां हर साल नेता, अभिनेता, उद्योगपति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं. इस बार अभिनेता मनोज जोशी भी बप्पा के दर्शन करने पहुंचे. गणेशोत्सव के जरिए मंडल सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं करता, बल्कि सालभर शिक्षा सहायता, जरूरतमंदों की आर्थिक मदद, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्नदान जैसे कई सामाजिक कार्यों से भी जुड़ा रहता है.
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