- इज़रायली कॉन्सुलेट जनरल यानिव रेवाच ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा कर संस्थापक को श्रद्धांजलि दी थी.
- रेवाच ने आरएसएस की युवा पीढ़ी को जड़ों और विरासत से जोड़ने वाली गतिविधियों की प्रशंसा की.
- उन्होंने कहा कि RSS और इज़रायल के ज़ायोनी आंदोलन में युवाओं को जोड़ने और मूल्यों की स्थापना में समानताएं हैं.
मध्य-पश्चिम भारत में इज़रायली कॉन्सुलेट जनरल यानिव रेवाच ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने RSS संस्थापक डॉ. हेडगेवार और डॉ. गोलवलकर को श्रद्धांजलि भी दी. अब उन्होंने संघ मुख्यालय के अपने अनुभव को साझा किया है. इसके साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी को उनकी जड़ों, विरासत और भारत के इतिहास से जोड़ने के लिए संघ की जमकर तारीफ भी की.
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यानिव रेवाच ने कहा कि यह देखना वाकई दिलचस्प था कि आरएसएस युवा पीढ़ी के साथ कितने जुड़ाव से काम करती है. RSS की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अद्भुत था. शिक्षा, नेतृत्व, मूल्यों और विशेष रूप से समुदाय की बात करें तो, वे लोगों से जुड़ने और सभी को आपस में जोड़ने की सच्ची कोशिश करते हैं. रेवाच ने कहा उनको लगता है कि RSS के कामकाज की इज़रायल के साथ कई समानताएं हैं. उन्होंने बताया कि जब इज़रायल की स्थापना हुई थी, तब ज़ायोनी आंदोलन ने मूल्यों को स्थापित करने, युवाओं को जोड़ने और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया था.
Mumbai, Maharashtra: Consulate General of Israel to Mid-West India, Yaniv Revach says, "It was really interesting to see how they (RSS) work so closely with the young generation, it was truly amazing. When it comes to education, leadership, values and especially community, they… pic.twitter.com/zNccAyKpML
— IANS (@ians_india) January 2, 2026
संगठन की गतिविधियां बहुत प्रभावशाली हैं
यानिव रेवाच ने कहा कि संगठन द्वारा संचालित गतिविधियां बहुत प्रभावशाली हैं. इजराइली महावाणिज्यदूत ने नागपुर हवाई अड्डे पर न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-वीडियो' से कहा, “मेरे लिए आरएसएस का दौरा करना और यहां उनके द्वारा आयोजित गतिविधियों को देखना महत्वपूर्ण था. ये गतिविधियां बहुत प्रभावशाली हैं क्योंकि वे युवा पीढ़ी के साथ काम कर रहे हैं और उन्हें भारत की जड़ों, विरासत और इतिहास से जोड़ रहे हैं.
RSS मुख्यालय पहुंचे थे यानिव रेवाच
बता दें कि उन्होंने एक दिन पहले रेशिमबाग क्षेत्र स्थित स्मृति मंदिर परिसर का दौरा किया था, जहां आरएसएस के संस्थापक के. बी. हेडगेवार का स्मारक है. रेवाच ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और इजरायल अलग-अलग सीमाओं से आतंकवाद का सामना करते हैं. आतंकवाद से लड़ने में दोनों देश रणनीतिक सहयोगी हैं.
रेवाच के दौरे के संबंध में आरएसएस ने बताया कि उन्हें स्मृति मंदिर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व के बारे में जानकारी दी गई. संघ ने एक विज्ञप्ति में कहा था कि रेवाच को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और कार्यों का संक्षिप्त विवरण दिया गया और देश भर में लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के केंद्र के रूप में स्मृति मंदिर की भूमिका के बारे में बताया गया.
रेवाच ने संघ के सफर को गहराई से समझा
रेवाच ने संघ के संगठनात्मक सफर और उससे जुड़ी सामाजिक पहलों को समझने में गहरी रुचि दिखायी. यह दौरा सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जो आपसी सम्मान और सांस्कृतिक समझ को दर्शाता है. बता दें कि रेवाच ने ‘एक्स' पर लिखा, “आरएसएस के शताब्दी वर्ष के दौरान नागपुर में स्थित मुख्यालय का दौरा करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. मैंने उस शाखा को देखा जहां 1925 में इसकी शुरुआत हुई थी. मैंने आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार और उनके उत्तराधिकारी डॉ. गोलवलकर को भी श्रद्धांजलि दी.
इनपुट- IANS के साथ
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