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'तो ऐसे मामलों में दोबारा चुनाव की जरूरत नहीं होती', सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में की ये टिप्पणी, जान लीजिए

चुनाव ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि अयोग्यता के आरोप बिना किसी विवाद के सबूतों से साबित होते है.इसके बाद ट्रिब्यूनल ने विजेता उम्मीदवार का चुनाव शून्य घोषित कर दिया और अधिनियम की धारा 44-J(2)(b) के तहत अपीलकर्ता को, जो चुनाव में दूसरा और एकमात्र अन्य उम्मीदवार था, अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित घोषित कर दिया.

'तो ऐसे मामलों में दोबारा चुनाव की जरूरत नहीं होती', सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में की ये टिप्पणी, जान लीजिए
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि किसी चुनाव में केवल दो उम्मीदवार ही मैदान में हों और विजेता उम्मीदवार का चुनाव रद्द कर दिया जाए, तो ऐसे मामलों में दोबारा चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होती.ऐसी स्थिति में दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित किया जाना चाहिए.जस्टिस विक्रम नाथ  और  जस्टिस संदीप मेहता  की पीठ ने उड़ीसा हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें विजेता उम्मीदवार का चुनाव निरस्त होने के बाद नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था.

आपको बता दें कि ये मामला वर्ष 2022 में ओडिशा के डेलंग पंचायत समिति के अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ा है. इस चुनाव में अपीलकर्ता और प्रतिवादी ही केवल दो उम्मीदवार थे और प्रतिवादी को विजयी घोषित किया गया था.अपीलकर्ता ने ओड़िशा पंचायत समिति एक्ट, 1959 की धारा 45(1)(v) के तहत चुनाव को चुनौती देते हुए कहा कि निर्वाचित उम्मीदवार कानून में तय कट-ऑफ तिथि के बाद तीसरे बच्चे के जन्म के कारण अयोग्य था.

चुनाव ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि अयोग्यता के आरोप बिना किसी विवाद के सबूतों से साबित होते है.इसके बाद ट्रिब्यूनल ने विजेता उम्मीदवार का चुनाव शून्य घोषित कर दिया और अधिनियम की धारा 44-J(2)(b) के तहत अपीलकर्ता को, जो चुनाव में दूसरा और एकमात्र अन्य उम्मीदवार था, अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित घोषित कर दिया.हालांकि,अपीलीय ट्रिब्यूनल और बाद में हाई कोर्ट ने अयोग्यता को तो बरकरार रखा, लेकिन अपीलकर्ता को निर्वाचित घोषित करने वाले हिस्से को रद्द करते हुए दोबारा चुनाव कराने का आदेश दे दिया.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि चुनाव में केवल दो उम्मीदवार ही थे, इसलिए अन्य सदस्यों को चुनाव लड़ने का मौका देने के आधार पर पुनः चुनाव कराने का निर्देश देना कानूनी रूप से उचित नहीं था.

पीठ ने कहा कि चुनाव अपीलीय ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर त्रुटि की कि डेलंग पंचायत समिति के अन्य सदस्यों को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाना चाहिए, जबकि चुनाव पहले ही विशिष्ट उम्मीदवारों के बीच हो चुका था. अदालत ने कहा कि ऐसे में नए चुनाव का आदेश देना “पूरी तरह अनुचित और अनावश्यक” था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव ट्रिब्यूनल के आदेश को बहाल करते हुए अपीलकर्ता को डेलंग पंचायत समिति का अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया और अपील स्वीकार कर ली.

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