विज्ञापन

मध्य प्रदेश BJP में दो दिन में दो बड़ी नियुक्तियां, 2027 के चुनाव से पहले सत्ता-संगठन के समीकरणों पर नजर

मध्य प्रदेश में भाजपा ने दो बड़ी नियुक्तियां की हैं. पहली नियुक्ति बिप्लब कुमार देब की है जो त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. और दूसरी नियुक्ति आरएसएस के प्रचार चंद्रशेखर की है.

मध्य प्रदेश BJP में दो दिन में दो बड़ी नियुक्तियां, 2027 के चुनाव से पहले सत्ता-संगठन के समीकरणों पर नजर
चंद्रशेखर और बिप्लब देब को मध्य प्रदेश भेजा गया है.
NDTV
  • भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश में दो अहम पदों पर बिप्लब कुमार देब और चंद्रशेखर को नियुक्त किया है
  • चंद्रशेखर को प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया है, ये पद आठ महीने से खाली पड़ा था
  • बिप्लब कुमार देब को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है, जिनका त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के तौर पर अनुभव है
भोपाल:

मध्य प्रदेश में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने दो दिनों के भीतर दो अहम नियुक्तियां कर प्रदेश के संगठनात्मक नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है. त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुभवी प्रचारक चंद्रशेखर को ऐसी जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनका असर आगामी चुनावों की तैयारियों के साथ सरकार, संगठन और पार्टी के भीतर प्रभावशाली नेताओं के समीकरणों पर भी पड़ेगा.

बिप्लब कुमार देब को 23 सितंबर को मध्य प्रदेश का प्रभारी और पूर्व सांसद रेखा वर्मा को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया, अगले दिन चंद्रशेखर को प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई. इसके साथ ही लगभग आठ महीने से खाली चल रहे इस महत्वपूर्ण पद पर पूर्णकालिक नियुक्ति हो गई. ये फैसले भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर हुए व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा हैं.

नई टीम के सामने चुनौतियां

नई टीम के सामने पहला बड़ा चुनावी पड़ाव 2027 में संभावित पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव होंगे. इसके बाद 2028 के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन उनकी राजनीतिक परीक्षा चुनाव प्रचार शुरू होने से काफी पहले शुरू हो जाएगी. 

मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के संगठन और स्थानीय स्तर पर टिकट की उम्मीद लगाए कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बैठाना इसकी सबसे अहम चुनौती होगी.

इन नियुक्तियों का महत्व दोनों पदों की भूमिका को साथ रखकर देखने पर स्पष्ट होता है. प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होता है. वहीं, संगठन महामंत्री पार्टी के आंतरिक ढांचे, कार्यकर्ताओं और संघ के साथ समन्वय में केंद्रीय भूमिका निभाता है. जमीनी कार्यकर्ताओं की बात नेतृत्व तक कैसे पहुंचे और दिल्ली के फैसले जिलों तक कैसे लागू हों, इसमें दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.

चंद्रशेखर कितने अहम?

चंद्रशेखर उस पद पर आए हैं, जो 31 जनवरी को हितानंद की संघ में वापसी के बाद खाली हुआ था. हितानंद को बाद में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को शामिल करने वाले मध्य क्षेत्र का सह-बौद्धिक प्रमुख बनाया गया और उनका केंद्र जबलपुर तय किया गया. इस बीच क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल संगठन का काम देख रहे थे.

अब पूर्णकालिक संगठन महामंत्री की नियुक्ति से प्रदेश भाजपा के भीतर निर्णय, संवाद और जवाबदेही की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था फिर स्थापित हुई है.

यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के रिश्तों को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगती रही हैं. 

हालांकि, दोनों नेता मतभेद की बात सार्वजनिक रूप से खारिज कर चुके हैं. 11 सितंबर को मुख्यमंत्री, खंडेलवाल के घर पहुंचे और उन्हें अपनी कार में लेकर भाजपा कार्यालय आए. संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिश्तों को लेकर सवाल पूछे जाने पर दोनों ने मतभेद की खबरों को अफवाह बताया और अपनी मित्रता का जिक्र किया.

चंद्रशेखर ऐसे संगठनात्मक बदलावों का अनुभव लेकर आ रहे हैं, जिनसे चुनावी सफलता के साथ पार्टी के भीतर प्रतिरोध भी पैदा हो सकता है.

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से आने वाले चंद्रशेखर ने संघ में काम करने के बाद भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके पास काशी क्षेत्र में संगठन का दायित्व था. साल 2017 में चंद्रशेखर को राजस्थान भेजा गया और 2023 में भाजपा की सत्ता में वापसी तक वे वहां संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे.

राजस्थान में उनकी भूमिका चुनाव अभियान के प्रबंधन तक सीमित नहीं रही, उनके कार्यकाल में उस प्रदेश इकाई के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव हुए, जिस पर लंबे समय तक वसुंधरा राजे जैसे प्रभावशाली क्षेत्रीय नेताओं की छाप रही थी. सतीश पूनिया की जगह सीपी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने.

इन बदलावों के साथ राजस्थान इकाई के नेतृत्व को आकार देने में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका और स्पष्ट हुई. इसी दौर में संगठनात्मक फेरबदल, टिकट वितरण और पुराने नेताओं तथा उनके समर्थकों की भूमिका को लेकर असंतोष भी सामने आया.

मध्य प्रदेश में चंद्रशेखर की नियुक्ति को इसलिए भी गौर से देखा जाएगा, संगठन में बदलाव के साथ प्रभाव का बंटवारा भी बदलता है किस नेता की बात सुनी जाती है, किसकी सिफारिश को महत्व मिलता है और पुराने राजनीतिक नेटवर्क फैसलों को कितना प्रभावित कर पाते हैं.

राजस्थान में उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में भाजपा को एक बड़ी चुनावी असहजता का सामना भी करना पड़ा था, जनवरी 2024 में करणपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र पाल सिंह टीटी चुनाव हार गए, जबकि मतदान से पहले ही उन्हें मंत्री पद की शपथ दिला दी गई थी. उसी महीने चंद्रशेखर को तेलंगाना भेज दिया गया बताया गया था कि उन्होंने खुद नई जिम्मेदारी मांगी थी.

यह भी पढ़ेंः सिंहस्थ के लिए टूटेगा CM मोहन यादव का पैतृक आवास, बहन और दोस्तों के मकान भी आए जद में

ये वीडियो भी देखेंः सड़क में गड्ढे को लेकर High Court की टिप्पणी पर क्या बोले CM मोहन यादव?

बिप्लब कुमार देब का आना कितना अहम?

बिप्लब कुमार देब अलग तरह का राजनीतिक अनुभव लेकर आ रहे हैं. साल 2018 से 2022 तक त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे देब सरकार चलाने और पार्टी की अपेक्षाओं के बीच संतुलन की चुनौतियों से परिचित हैं. मध्य प्रदेश से उनका पुराना जुड़ाव भी बताया जाता है, देब सतना सांसद गणेश सिंह के सहयोगी के तौर पर काम कर चुके हैं, जिससे उनका विंध्य क्षेत्र के राजनीतिक नेतृत्व से पहले का संपर्क रहा है.

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका पहला भोपाल दौरा 30 सितंबर को प्रस्तावित है. दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान वे प्रदेश पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे और एक अक्टूबर को दिल्ली लौट सकते हैं. इन बैठकों से नई टीम की शुरुआती संगठनात्मक प्राथमिकताओं का संकेत मिलने की उम्मीद है.

भाजपा अगले चुनावी दौर में मजबूत स्थिति से प्रवेश कर रही है. पार्टी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में 230 में से 163 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 29 सीटों पर कब्जा किया था.

स्थानीय चुनावों में बढ़त जरूरी

लेकिन स्थानीय चुनावों का अनुभव बताता है कि प्रदेश स्तर की यह बढ़त हर मुकाबले में एक समान परिणाम नहीं देती. साल 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने 16 में से नौ महापौर पद जीते थे, कांग्रेस को पांच, आम आदमी पार्टी को एक और एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली थी.

कई शहरों में भाजपा का महापौर उम्मीदवार हार गया, लेकिन पार्टी को पार्षदों की संख्या में बहुमत मिला. यही अनुभव 2027 के चुनावों को महत्वपूर्ण बनाता है, इनमें उम्मीदवारों के चयन, टिकट न मिलने से नाराज दावेदारों को संभालने और स्थानीय शिकायतों पर संगठन की प्रतिक्रिया की परीक्षा होगी. 

कांग्रेस के लिए भी ये चुनाव उन शहरों और जिलों में अवसर बन सकते हैं, जहां भाजपा की प्रदेशव्यापी बढ़त उतनी निर्णायक नहीं रहती.

अगर आने वाले समय में मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो नई संगठनात्मक टीम की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, मंत्रियों के प्रदर्शन और संगठन की अपेक्षाओं को एक साथ साधना होगा.

इस बदलाव के शुरुआती संकेत चुनावी मंचों से पहले पार्टी के भीतर दिखाई देंगे कार्यकर्ताओं की शिकायतें कैसे सुनी जाती हैं, टिकट के प्रतिस्पर्धी दावों का निपटारा कैसे होता है और सरकार-संगठन के बीच समन्वय कितना प्रभावी रहता है. 

इन्हीं फैसलों से स्पष्ट होगा कि नई नियुक्तियां भाजपा के कामकाज में कितना बदलाव लाती हैं और मध्य प्रदेश में पार्टी के भीतर प्रभाव का संतुलन किस दिशा में जाता है.

यह भी पढ़ेंः सरकार चुनाव से चुनाव तक क्यों सोचे ? 2047 तक MP की प्रति व्यक्ति आय 22 लाख रुपये होगी: मोहन यादव

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Mohan Yadav, MP BJP, Biplab Kumar Deb, MP Assembly Election 2028, MP Politics
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com